भारतीय कैलेंडर

भारतीय कैलेंडर  

भारतीय कैलेंडर रत एक बहुसांस्कृतिक देष है। विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न भाशाएं प्रचलित हैं और इसी प्रकार भिन्न-भिन्न समय मानक पद्धतियां प्रचलित हैं। विष्व में ग्रेगोरियन कैलेंडर का प्रयोग किया जाता है। लेकिन भारत का राश्ट्रीय कैलेंडर सौर कैलेंडर है। इसके अतिरिक्त भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में धार्मिक प्रयोग के लिए अनेक सौर एवं चांद्र कैलेंडर प्रचलित हैं। कलि 5107, षक् 1928, संवत् 2063 राश्ट्रीय कैलेंडर के अनुसार 22 मार्च, 2006 को प्रारंभ हो रहा है। लेकिन उत्तर भारत में विषेशतः प्रचलित चैत्रादि कैलेंडर का प्रारंभ चैत्र षुक्ल प्रतिपदा तदनुसार 30 मार्च, 2006 को हो रहा है। आइए देखते हैं विभिन्न कैलेंडरों की गणना का आधार क्या है और वे वर्श में कब-कब प्रारंभ होते हैं। गे्रगोरियन कैलेंडर में सायन वर्श ;ज्तवचपबंस ल्मंतद्ध को वर्श माना गया है जिसका मान 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 46.08 सेकंड अर्थात् 365.2422 दिन है जबकि भारतीय कैलेंडरों में सूर्य और चंद्र की गणना के कारण नाक्षत्र वर्श ;ैपकमतमंस ल्मंतद्ध को वर्श माना गया है जो 365 दिन 6 घंटे 9 मिनट 12.96 सेकंड अर्थात् 365.2564 दिन का होता है। यह सायन वर्श ;ज्तवचपबंस ल्मंतद्ध से लगभग 20 मिनट 26.88 सेकंड बड़ा होता है। नाक्षत्र वर्श में तारों को स्थिर मानकर पृथ्वी पूर्व स्थिति पर आ जाती है। राश्ट्रीय कैलेंडर: यह कैलेंडर सौर मास पर आधारित है। भारत सरकार ने इसे 22 मार्च 1957 से लागू किया। इसमें प्रथम माह चैत्र 22 मार्च को प्रारंभ होता है और यह माह 30 दिन का होता है, लेकिन अध् िावर्श ;स्मंच ल्मंतद्ध में 21 मार्च को प्रारंभ होकर यह 31 दिन का होता है। क्योंकि सूर्य वृश से कन्या तक 30.5 दिन से अधिक समय में राषि पार करता है अतः वैषाख से भाद्र तक सभी माह 31 दिन के एवं आष्विन से फाल्गुन तक सभी माह 30 दिन के होते हैं। इस कैलेंडर में अधिवर्श ;स्मंच ल्मंतद्ध ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार ही रखा गया है। राश्ट्रीय कैलेंडर के अलावा भारत में अन्य अनेक सौर एवं चांद्र कैलेंडर प्रचलित हैं। इन कैलेंडरों में माह सूर्य की संक्रांति से प्रारंभ होता है और माह में 29 से 32 दिन हो सकते हैं। पंजाबी/उड़िया कैलेंडर: इस पद्धति में माह सूर्य की संक्रांति के दिन प्रारंभ होता है। यदि संक्रांति सूर्योदय से पहले हो जाती है तो माह पहले दिन प्रारंभ हो जाता है। इसमें वर्श सूर्य की मेश संक्रांति से प्रारंभ होता है। तमिल कैलेंडर: इस कैलेंडर में यदि संक्रांति सूर्यास्त से पहले हो तो माह संक्रांति के दिन प्रारंभ होता है, अन्यथा अगले दिन। वर्श सूर्य की मेश संक्रांति से प्रारंभ होता है। मलयाली कैलेंडर: इसमें तमिल कैलेंडर के अनुसार ही यदि संक्रांति अपराह्न से पहले हो तो माह संक्रांति के दिन से प्रारंभ होता है, अन्यथा अगले दिन से। दिन के 18 घटी व्यतीत होने के समय से शुरू होने वाले भाग को अपराह्न कहते हैं। इस कैलेंडर में माहों के नाम राषियों के नामों के अनुसार ही रखे गए हैं एवं वर्श प्रवेष सूर्य के सिंह राषि में प्रवेष से होता है। बंगाली कैलेंडर: यदि संक्रांति सूर्योदय और मध्य रात्रि के बीच होती है तो माह अगले दिन से प्रारंभ होता है, अन्यथा उससे अगले दिन से। इस कैलेंडर में वर्श सूर्य की मेश संक्रांति से प्रारंभ होता है। नेपाली कैलेंडर: इस कैलेंडर में यदि सूर्य संक्रांति मध्याह्न के बाद होती है तो माह उसी दिन से प्रारंभ होता है, अन्यथा उसके पहले दिन से। वर्श मेश संक्रांति के साथ वैषाख माह से प्रारंभ होता है। चांद्र मास मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं - अमावस्या को समाप्त होने वाला अमांत और पूर्णिमा को समाप्त होने वाला पूर्णिमांत। चांद्र हर पक्ष में 15 दिन होते हैं। माह के नाम नक्षत्रों के नाम पर रखे गए हैं जिन पर सूर्य गोचर करता है। जैसे चित्रा नक्षत्र के नाम पर चैत्र, विषाखा के नाम पर वैषाख आदि। चैत्रादि कैलेंडर: यह पूर्णिमांत कैलेंडर है और उत्तर भारत में इसका प्रचलन सर्वाधिक है। यह मुख्यतः उत्तर प्रदेष, बिहार, मध्य प्रदेष, राजस्थान, हिमाचल प्रदेष एवं जम्मू-कष्मीर में प्रचलित है। हरियाणा, पंजाब और उड़ीसा में भी इसका कुछ-कुछ प्रचलन है। इसमें माह सूर्योदयकालीन तिथि के अनुसार कृश्ण पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होकर पूर्णिमा को समाप्त होता है। वर्श चैत्र माह के मध्य शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होता है। कार्तिकादि कैलेंडर: इस कैलेंडर में माह सूर्योदयकालीन शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होकर अमावस्या को समाप्त होता है। यह मुख्यतः गुजरात, महाराश्ट्र, कर्नाटक व आंध्र प्रदेष में प्रचलित है। इसमें वर्श का प्रारंभ कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से अर्थात दीपावली के अगले दिन से होता है। मुस्लिम कैलेंडर: मुस्लिम कैलेंडर में माह चंद्र दर्षन से और तिथि सूर्यास्त से शुरू होती है। व्यवहारतः माह चंद्र दर्षन के अगले दिन से शुरू होता है। इस कैलेंडर में वर्श केवल 354 दिन का होता है अतः वर्श हर वर्श 11 दिन पहले शुरू हो जाता है और इस प्रकार 33 वर्शों में मुस्लिम कैलेंडर के लगभग 34 वर्श व्यतीत हो जाते हैं। इस प्रकार विभिन्न कैलेंडर निम्न तारीखों पर शुरू होंगे: राश्ट्रीय कैलेंडर -22 मार्च, चैत्रादि -30 मार्च, कार्तिकादि -23 अक्तूबर, पंजाबी/उड़िया -14 अप्रैल, तमिल -14 अप्रैल, मलयाली -17 अगस्त, बंगाली -15 अप्रैल, नेपाली -13 अप्रैल, मुस्लिम -31 जनवरी।



पराविद्याओं को समर्पित सर्वश्रेष्ठ मासिक ज्योतिष पत्रिका  मार्च 2006

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