लाल किताब

लाल किताब  

लाल किताब बीमारी का बगैर दवाई भी इलाज है, मगर मौत का कोई इलाज नहीं। ज्योतिष दुनियावी हिसाब-किताब है, कोई दावाए खुदाई नहीं। बीमारी का इलाज हो सकता है, लेकिन मौत का नहीं। इसी प्रकार ज्योतिष गणना द्वारा फलित कथन कहा जाता है, लेकिन यह खुदा का कहा गया वचन नहीं है कि इसमें त्रुटि न हों। ज्योतिष में फलित कथन की अनेको पद्धतियां है, जिसमें मुख्य रूप से पाराशर पद्धति प्रचलित है। लेकिन जैमिनी, या कृष्णमूर्ति पद्धतियां भी उपयोग में लायी जाती हैं। ऐसी ही एक पद्धति का नाम है ‘लाल किताब’। भारतीय परंपराओं में लाल रंग जीवन के विकास का रंग है। शायद इसी लिए इसका नाम लाल किताब रखा गया है। लाल किताब पद्धति के लेखक कौन हैं, यह कहना तो कठिन है। लेकिन जिस रूप में आज यह प्रचलित है, उसके मुख्य रचयिता श्री रूपचंद जोशी जी हैं। वह रक्षा विभाग में लेखा अधिकारी थे। उन्होंने फारसी के गुटके को उर्दू में अनुवाद कर लाल किताब के नाम से प्रकाशित करवाया। प्रकाशन स्व. पं. गिरधारी लाल शर्मा ने किया, जो गांव फरवाला, तहसील नूरमहल, जिला जालंधर, पंजाब के वासी थे। लाल किताब मुख्य रूप से उर्दू भाषा में छपी है और इसके सन 1939 से ले कर 1952 तक के संस्करणों में लाल किताब गुटका, लाल किताब के अरमान, लाल किताब के फ़रमान, लाल किताब वर्षफल सारणी, लाल किताब लग्न सारणी आदि मुख्य हैं। लाल किताब में अधिसंख्य शब्द उर्दू-फारसी के साथ-साथ अंग्रेजी, पंजाबी एवं संस्कृत के भी हैं। इसमें हिंदी और पंजाबी के मुहावरे भी हैं। इसके लेखक अवश्य ही फारसी, उर्दू एवं संस्कृत के भारतीय विद्वान रहे होंगे, क्योंकि इसके उपायों में हिंदू देवी-देवताओं के नाम, पीपल आदि का जिक्र अनेक बार आया है। लाल किताब पद्धति की पाराशर पद्धति से कई समानताएं हैं। इसमें जन्मपत्री की गणना उसी रूप से की जाती है, जैसे पाराशर पद्धति में। लेकिन इसमें पाराशर पद्धति का सरलीकरण किया गया है। पाराशरी में ग्रहों के बाद भाव की ही सबसे अधिक महत्ता है। राशि की महत्ता उससे कहीं कम है। राशियां केवल ग्रह की शक्ति को जानने के लिए ही काम आती हैं। कौन सा ग्रह कैसा फल देगा, यह निश्चित होता है केवल उसके भाव से; अर्थात ग्रह जिस भाव में बैठा होगा, वह उसका ही फल देगा। इसी तथ्य को अधिक महत्ता देते हुए लाल किताब पद्धति में केवल भावों को माना गया है एवं उसे खाने के नाम से जाना गया है। राशियों को छोड़ दिया गया है। अतः लग्न कुंडली बना कर उसमें से राशि के अंक मिटा दिये जाते हैं और उसमें राशियों के बदले खाना नंबर 1 से 12 तक डाल दिये जाते हैं। इस प्रकार ग्रह किस भाव में बैठा है, यह मालूम पड़ जाता है और इसी को ले कर आगे गणना होती है, या फलित किया जाता है। लाल किताब में विंशोत्तरी दशा को बिल्कुल भी नहीं लिया गया है, वरन् ग्रहों को वर्ष संख्या दी गयी है एवं उस आयु पर वह ग्रह फलदायी होता है, जैसे शनि 36 वर्ष में, गुरु 16 वर्ष में इत्यादि। लाल किताब की अपनी दशा पद्धति भी है, लेकिन इसमें केवल 35 साल का चक्र होता है। इसी को मनुष्य जीवन में 3 बार घुमा कर 105 वर्ष तक का हिसाब लगा लिया जाता है। लाल किताब पद्धति में ग्रह सोये, या जागे हुए, धर्मी-अधर्मी, अंधे, नेक या मंदे आदि अवस्था में माने गये हैं। इससे यह पता चल जाता है कि ग्रह फल देने में सक्षम है, या नहीं। इसी प्रकार प्रत्येक भाव का कोई ग्रह किस्मत जगाने वाला रहता है, जो उस भाव को विशेष रूप से शक्तिशाली बना देता है। लाल किताब में वर्ष कुंडली को विशेष महत्व दिया गया है, लेकिन वर्ष कुंडली बनाने की पद्धति बिल्कुल फ़र्क है। इसमें गत वर्ष के अनुसार ग्रहों को एक खाने से दूसरे खाने में रख दिया जाता है। इस प्रक्रिया में राहु-केतु साथ भी आ सकते हैं, या बुध सूर्य से कई घर अलग हो सकता है। इसके बाद वर्ष कुंडली में जो शुभ, या अशुभ ग्रह हैं, वे उस वर्ष पूर्ण रूप से असर करते हैं। अशुभ ग्रहों को उपाय के द्वारा शांत किया जा सकता है, या शुभ बनाया जा सकता है। वर्ष कुंडली के अशुभ ग्रहों का उपाय जन्मदिन से 43 दिन के अंदर ही करने को कहा गया है। लाल किताब उत्तर भारत के पंजाब में बहुत प्रसिद्ध है। इसकी मुख्य लोकप्रियता इसके आसान उपायों के कारण है, जो आसान होने के साथ-साथ सटीक भी हैं। इसमें कई उपाय ग्रहों की बजाय लक्षणों द्वारा भी बताये गये हैं, जैसे यदि किसी व्यक्ति पर राजदरबार के झगड़े बढ़ते जाएं, या कारोबार में नुकसान होना शुरू हो जाए, तो वह अपने वज़न के बराबर कच्चा कोयला जल प्रवाह करे, या मान-सम्मान की बढ़ोतरी के लिए गऊ की सेवा करे। लाल किताब में पूर्व जन्म के ऋण एवं उनके उपाय अति विशिष्टता से दिये गये हैं। पितृ ऋण, मातृ ऋण, कन्या ऋण आदि सभी ऋण ग्रहों की विशेष खाने में स्थिति द्वारा दर्शाये जाते हैं। ऋणों से मुक्ति के लिए सरल उपाय भी दिये गये हैं जैसे पितृ ऋण गुरु के 2,5,9, या 12 वें खाने में बैठने से होता है और इससे मुक्ति के लिए प्रत्येक परिवार वाले से एक-एक रुपया एकत्रित कर के मंदिर में दान दें। ऐसा करने से निरंतर नुकसान, या खराब स्वास्थ्य, या मुकद्दमा आदि समाप्त हो जाते हैं और जातक सुख से रह पाता है। लाल किताब के सभी उपाय दिन में ही करने को बताये गये हैं एवं विशेष दिन, या वार का कोई विचार नहीं किया गया है। सच्चाई एवं शुद्ध भोजन पर विशेष ध्यान दिया गया है। किसी भी उपाय के बीच मांस, मदिरा, झूठे वचन, परस्त्री गमन की विशेष मनाही है। आज के इस कंप्यूटर युग में लाल किताब पद्धति को पूर्ण रूप से फ्यूचर पाॅइंट द्वारा निर्मित लियो गोल्ड एवं लियो पाम साॅफ्टवेयर में उतारा गया है। इसके द्वारा लाल किताब कुंडली से ले कर ग्रह स्थिति, दशा, ग्रह फल, पितृ ऋण, उपाय, वर्ष कुंडली निर्माण एवं वर्ष उपाय आदि सभी बखूबी जान सकते हैं। कुल मिला कर लाल किताब एक सरल एवं सटीक ज्योतिषीय पद्धति है। इसमें, अधिक गणना में न पड़ कर, फलित तथा उपाय पर अधिक जोर दिया गया है। अधिक जानकारी के लिए प्रस्तुत है यह विशेषांक।



वास्तु विशेषांक  December 2016

ज्योतिषीय पत्रिका फ्यूचर समाचार के इस वास्तु विशेषांक में बहुत अच्छे विवाह से सम्बन्धित लेखों जैसे वास्तुशास्त्र का वैज्ञानिक आधार, वास्तु निर्माण काल पुरुष योग, वास्तु दोष शांति हेतु कुछ सरल उपाय/टोटक,वीथिशूल: शुभाशुभ फल एवं उपाय आदि। इसके अतिरिक् प्रत्येक माह का राशिफल, वास्तु फाॅल्ट, टोटके, विचार गोष्ठी आदि भी पत्रिका का आकर्षण बढ़ा रहे हैं।

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