शनि : कितना शुभ, कितना अशुभ

शनि : कितना शुभ, कितना अशुभ  

व्यूस : 1155 | आगस्त 2004

शनि का नाम लेते ही मन में डर की भावना उत्पन्न हो जाती है। किसी के साथ कुछ भी अनिष्ट हो जाए, तो शनि को ही उसका कारण बताया जाता है। क्या शनि सच ही भयंकर ग्रह है? आइए, जानते हैं शनि के बारे में सच्चाई।

प्रश्न: क्या शनि सर्वदा कष्टकारी ही होता है?

उत्तर: शनि सर्वदा कष्टकारी नहीं होता, अपितु सच्चाई यह है कि इसके बराबर ऊपर चढ़ाने वाला भी दूसरा ग्रह नहीं है। यह अवश्य है कि शनि अधिक प्रभावशाली है। इसका बुरा समय जातक के ऊपर प्रभाव छोड़ जाता है एवं इसका शुभ समय याद नहीं रहता।

प्रश्न: शनि क्या शुभाशुभ फल देगा, कैसे जानें?

उत्तर:जन्मपत्री में शनि जिस भाव में गोचर करे, उसके अनुसार फल प्राप्त होते हैं। शनि का शुभाशुभ फल जानने के लिए जन्म राशि एवं जन्म लग्न से गोचरीय शनि की स्थिति जानें। यदि शनि लग्न एवं चंद्र दोनों से 12, 1, 2, 4 एवं 8 स्थानों पर है, तो अशुभ फल प्राप्त होते हैं। लग्न, या चंद्र, किसी एक से स्थिति अच्छी है, तो मध्यम एवं दोनों से स्थिति शुभ है, तो शुभ फल प्राप्त होते हैं। यदि शनि नीच, या शत्रु राशि में भ्रमण करे, तो अशुभ फल अति अशुभ हो जाते हैं।

प्रश्न: कैसे जानें कि शनि कब शुभ फल देगा एवं कब अशुभ?

उत्तर: शनि गोचर में जब राशि परिवर्तन करे, उस समय चंद्र की स्थिति जान लें एवं जन्म राशि से इस गोचरीय चंद्र की स्थिति अनुसार फल जानंे। यदि गोचर में चंद्र जन्म राशि से 1, 6, 11 हो, तो स्वर्ण पाद से शनि का प्रवेश जानें। 2, 5, 9 में रजत पाद, 3, 7, 10 में ताम्र पाद एवं 4, 8, 12 में लौह पाद से शनि का प्रवेश होता है। स्वर्ण पाद उत्तम फलदायक है, रजत मध्यम, ताम्र कम एवं लौह निम्न फलदायक है।

शनि के राशि परिवर्तन के समय जो चंद्र का नक्षत्र हो, उसे जन्म नक्षत्र से गिन कर, 9 से भाग दें एवं शेष के अनुसार शनि का वाहन जानंे। शेष 1 से गर्दभ, 2 से अश्व, 3 से गज, 4 से भैंसा, 5 से जंबूक, 6 से सिंह, 7 से हिरण, 8 से मयूर एवं 9 से हंस शनि के वाहन होते हंै। गर्दभ, भंैसा, जंबूक एवं हिरण अशुभ फलदायक हैं। अन्य 5 शुभ फल प्रदान करते हैं।


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जन्म राशि पाया फल जन्म राशि पाया फल
वृष, कन्या, मकर स्वर्ण श्रेष्ठ कर्क, वृश्चिक, मीन ताम्र सामान्य
मेष, सिंह, धनु रजत शुभ मिथुन, तुला, कुंभ लौह निम्न

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जन्म नक्षत्र वाहन फल
अश्विनी मघा मूल भैंसा अशुभ
भरणी पूर्वाफाल्गुनी पूर्वाषाढ़ गज शुभ
कृतिका उत्तराफाल्गुनी उत्तराषाढ़ अश्व शुभ
रोहिणी हस्त श्रवण गर्दभ अशुभ
मृगशिरा चित्रा धनिष्ठा हंस शुभ
आद्र्रा स्वाति शतभिषा मयूर शुभ
पुनर्वसु विशाखा पूर्वाभाद्रपद हिरण अशुभ
पुष्य अनुराधा उत्तराभाद्रपद सिंह शुभ
अश्लेषा ज्येष्ठा रेवती जंबूक अशुभ

प्रश्न: शनि के लिए तेल दान क्यों करते हैं?

उत्तर: कहते हैं कि शनि एक बार हनुमान जी से हठ करने लगा कि मैं बड़ा हूं। हनुमान जी ने उसे अपनी पूंछ में बांध लिया और अपना काम करते रहे। शनि पूंछ में बंधा जमीन से तथा पत्थर की रगड़ खा कर लहूलुहान हो गया। बाद में शनि ने हनुमान जी से माफी मांगी। हनुमान जी ने शनि से वचन लिया कि वह उनके भक्तों को कभी दुःख नहीं पहुंचाएगा। शरीर की पीड़ा को दूर करने के लिए शनि देव उसी दिन से तेल मांगने लगे एवं तेलदाता पर प्रसन्न हो कर आशीर्वाद देने लगे।

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