एस्ट्रो पामिस्ट्री

एस्ट्रो पामिस्ट्री  

शुक्र, बुध दोनों स्वास्थ्य रेखा से मिल जाएं और सूर्य रेखा सुंदर व स्पष्ट पाई जाए तथा सूर्य का सितारा बुध पर्वत की ओर हो तो सूर्य खाना नंबर एक में होगा। Û भाग्य रेखा या सूर्य रेखा बृहस्पति का रूख करें, मगर शनि के पर्वत पर कोई शनि रेखा न हो तो सूर्य खाना नंबर दो में होगा। Û सूर्य रेखा की कोई शाखा निम्न मंगल की ओर जाए तो सूर्य खाना नंबर तीन में होगा। Û सूर्य के पर्वत और चंद्र के पर्वत का किसी रेखा द्वारा मिलन होता सा लगता हो लेकिन वास्तव में न हो रहा हो। सूर्य रेखा छोटी हो तो सूर्य खाना नंबर 4 में होगा। Û सूर्य रेखा बिल्कुल सीधी सूर्य पर्वत पर हो सूर्य के अपने घर में हो और सूर्य पर्वत श्रेष्ठ हो। स्वास्थ्य रेखा बुध पर्वत से चलकर हथेली में खाना नंबर 11 तक जाए तो सूर्य को पंचम भावस्थ मानें। Û सूर्य रेखा शुक्र पर्वत से आरंभ होकर सूर्य पर्वत की ओर जाए तो खाना नंबर 7 में समझें। Û भाग्य रेखा या सूर्य रेखा न हों या भाग्य रेखा व सूर्य रेखा न मिलें। सूर्य रेखा उध्ेर्व मंगल से आरंभ हो तो सूर्य को खाना नंबर 8 में समझें। Û भाग्य रेखा की जड़ में चार शाखाएं हों तो सूर्य को खाना नंबर 9 में समझें। Û सूर्य रेखा शनि के पर्वत की ओर हो तो खाना नंबर दस में समझें। Û सूर्य रेखा हथेली में खाना नंबर 11 से आरंभ होती हो तो सूर्य को खाना नंबर 11 में समझें। Û सूर्य रेखा हथेली में खाना नंबर 12 से आरंभ होती हो तो सूर्य को कुंडली के खाना नंबर 12 में समझें।


विवाह विशेषांक  मार्च 2014

फ्यूचर समाचार पत्रिका के विवाह विशेषांक में सुखी वैवाहिक जीवन के ज्योतिषीय सूत्र, वैदिक विवाह संस्कार पद्धति, कुंडली मिलान का महत्व, विवाह के प्रकार, वर्तमान परिपेक्ष्य में कुंडली मिलान, तलाक क्यों, शादी के समय निर्धारण में सहायक योग, शनि व मंगल की वैवाहिक सुख में भूमिका, शादी में देरी: कारण-निवारण, दाम्पत्य जीवन सुखी बनाने के उपाय तथा कन्या विवाह का अचूक उपाय आदि विषयों पर विस्तृत जानकारी देने वाले आलेखों को सम्मिलित किया गया है।

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