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होली: भारत का महापर्व

होली: भारत का महापर्व  

होली बसंत व प्रेम-प्रणय का पर्व है तथा धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक है। यह रंगों का, हास-परिहास का भी पर्व है। यह वह त्योहार है, जिसमें लोग ‘क्या करना है, तथा क्या नहीं करना’ के जाल से अलग होकर स्वयं को स्वतंत्र महसूस करते हैं। यह वह पर्व है, जिसमें आप पूर्ण रूप से स्वच्छंद हो, अपनी पसंद का कार्य करते हैं, चाहे यह किसी को छेड़ना हो या अजनबी के साथ भी थोड़ी शरारत करनी हो। इन सबका सर्वोत्तम रूप यह है कि सभी कटुता, क्रोध व निरादर बुरा न मानो होली है की ऊँची ध्वनि में डूबकर घुल-मिल जाता है। बुरा न मानो होली है की करतल ध्वनि होली की लंबी परम्परा का अभिन्न अंग है। होली एक रंगबिरंगा मस्ती भरा पर्व है। इस दिन सारे लोग अपने पुराने गिले-शिकवे भूल कर गले लगते हैं और एक दूजे को गुलाल लगाते हैं। बच्चे और युवा रंगों से खेलते हैं। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को यह त्योहार मनाया जाता है। होली के साथ अनेक कथाएं जुड़ी हैं। होली मनाने के एक रात पहले होलिका दहन किया जाता है। पूर्णिमा को होलिका जलाते हैं, और अगले दिन सब लोग एक दूसरे पर गुलाल, अबीर और तरह-तरह के रंग डालते हैं। यह त्योहार रंगों का त्योहार है। इस दिन लोग प्रातःकाल उठकर रंगों को लेकर अपने नाते-रिश्तेदारों व मित्रों के घर जाते हैं और उनके साथ जमकर होली खेलते हैं। बच्चों के लिए तो यह त्योहार विशेष महत्व रखता है। वे एक दिन पहले से ही बाजार से अपने लिए तरह-तरह की पिचकारियां व गुब्बारे लाते हैं। बच्चे गुब्बारों व पिचकारी से अपने मित्रों के साथ होली का आनंद उठाते हैं।

विवाह विशेषांक  मार्च 2014

फ्यूचर समाचार पत्रिका के विवाह विशेषांक में सुखी वैवाहिक जीवन के ज्योतिषीय सूत्र, वैदिक विवाह संस्कार पद्धति, कुंडली मिलान का महत्व, विवाह के प्रकार, वर्तमान परिपेक्ष्य में कुंडली मिलान, तलाक क्यों, शादी के समय निर्धारण में सहायक योग, शनि व मंगल की वैवाहिक सुख में भूमिका, शादी में देरी: कारण-निवारण, दाम्पत्य जीवन सुखी बनाने के उपाय तथा कन्या विवाह का अचूक उपाय आदि विषयों पर विस्तृत जानकारी देने वाले आलेखों को सम्मिलित किया गया है।

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