शादी में देरी: कारण-निवारण

शादी में देरी: कारण-निवारण  

वैवाहिक जीवन सुखमय बीते इसके लिए शादी से पहले गुण मिलान के साथ-साथ ग्रह मिलान भी आवश्यक है। कन्या की कुंडली में विवाह कारक बृहस्पति होता है और पुरूष की कुंडली में विवाह का विचार शुक्र से किया जाता है। यदि दोनों ग्रह शुभ हों और उनपर शुभ ग्रहों की दृष्टि पड़ती हो तो विवाह का योग जल्दी बनता है। विवाह देरी से कराने में बहुत से ग्रह कारक होते हैं 1. शनि सप्तम भाव में स्थित हो, भले ही स्वगृही हो, परंतु सूर्य से या मंगल से सप्तमस्थ होने के कारण विवाह में बाधा आती है। 2. यदि किसी कन्या की कुंडली में सप्तम भाव में मंगल, शनि व शुक्र के साथ युति कर रहा हो तो कन्या का विवाह बड़ी उम्र में होता है। 3. यदि कन्या की कुंडली में लग्न में मंगल, सूर्य व बुध हो और गुरु द्वादश भाव में हो तो कन्या का विवाह देरी से होता है। 4. यदि कुंडली में शनि व सूर्य पारस्परिक दृष्टि संबंध रखते हों व लग्न या सप्तम भाव प्रभावित हो रहा हो तो विवाह की संभावनाएं बहुत कम होती हैं। शीघ्र विवाह के लिए उपाय 1. कन्या गुरुवार के दिन (शुक्ल पक्ष) जल में हल्दी डालकर नहाए। ये उपाय शुक्ल पक्ष के पहले वीरवार से करे। 2. कन्या गुरुवार के दिन स्टील के लोटे में जल, गंगाजल व हल्दी मिलाकर आधा जल केले व आधा जल पीपल पर चढ़ाए। जल चढ़ाते समय ऊँ बृं बृहस्पतये नमः का जाप करते रहे व शीघ्र विवाह की प्रार्थना करे। 3. कन्या गुरुवार के दिन आटे के दो पेडे़ बनाकर, हल्दी का तिलक लगाकर व चने की दाल पेड़े पर रखकर सफेद गाय को सवेरे खिलाए व शीघ्र विवाह की प्रार्थना करे। 4. कन्या गुरुवार के दिन पांच बेसन के लड्डू और एक सेहरे की कलगी भगवान विष्णु को अर्पित करे और शीघ्र विवाह की प्रार्थना नारायण से करे। ऐसा चार गुरुवार करे। 5. कन्या हर गुरुवार को सफेद गाय को चने की दाल खिलाए व गणेश जी को बेसन का लड्डू अर्पित करे, भोग लगाए व शीघ्र विवाह की प्रार्थना करे। 6. वीरवार (शुक्ल पक्ष) से शुरू करके रोजाना केसर का तिलक माथे, जुबान व नाभि पर लगाए। 7. लड़की व लड़का हर गुरुवार गणेश सहस्त्रनाम का पाठ करें। 8. कन्या हर गुरुवार उबटन लगाकर नहाए। 9. रिश्ते बन


विवाह विशेषांक  मार्च 2014

फ्यूचर समाचार पत्रिका के विवाह विशेषांक में सुखी वैवाहिक जीवन के ज्योतिषीय सूत्र, वैदिक विवाह संस्कार पद्धति, कुंडली मिलान का महत्व, विवाह के प्रकार, वर्तमान परिपेक्ष्य में कुंडली मिलान, तलाक क्यों, शादी के समय निर्धारण में सहायक योग, शनि व मंगल की वैवाहिक सुख में भूमिका, शादी में देरी: कारण-निवारण, दाम्पत्य जीवन सुखी बनाने के उपाय तथा कन्या विवाह का अचूक उपाय आदि विषयों पर विस्तृत जानकारी देने वाले आलेखों को सम्मिलित किया गया है।

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