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प्रश्न: मंत्र के प्रारंभ में ‘हरि ओऽम’ क्यों? उत्तर: वेद पाठ के प्रारंभ में मंत्रोच्चारण से पूर्व ‘हरि ओऽम’ का उच्चारण करना वैदिक परंपरा है। वेद के अशुद्ध उच्चारण में ‘महापातक’ नामक दोष लगता है। इस संभावित दोष की निवृत्ति हेतु आदि और अंत में ‘हरि ओऽम’ शब्द का उच्चारण करना अनिवार्य है। श्री मद्भागवत में भी लिखा है कि - ‘‘सर्वं करोति निश्छिद्रं नाम संकीर्तनं हरेः।’ मंत्रोच्चार, विधि-विधान, देशकाल और वस्तु की कमी के कारण धर्मानुष्ठान में जो भी कमी हो, हरि नाम का संकीर्तन करने से वे सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। प्रश्न: प्रथम गणेश पूजन क्यों? उत्तर: सनातन हिंदू धर्म में कोई ऐसा कार्य नहीं, जो कि गणपति पूजन के बिना प्रारंभ किया जाता हो, फलतः प्रारंभ का पर्याय ‘श्री गणेश’ हो गया। इसका कारण यह है कि गणेश, गणपति एवं सभी देवगणों के गणाध्यक्ष कहलाते हैं। ये अपनी विलक्षण बुद्धिमत्ता के कारण सभी देवताओं में अग्रपूज्य हैं। याज्ञवल्क्य स्मृति के अनुसार गणपति की पूजा करके, विधिपूर्वक नवग्रह पूजन करना चाहिए, जिससे समस्त कार्यों का शुभ फल प्राप्त होता है तथा लक्ष्मी की भी प्राप्ति होती है।

विवाह विशेषांक  मार्च 2014

फ्यूचर समाचार पत्रिका के विवाह विशेषांक में सुखी वैवाहिक जीवन के ज्योतिषीय सूत्र, वैदिक विवाह संस्कार पद्धति, कुंडली मिलान का महत्व, विवाह के प्रकार, वर्तमान परिपेक्ष्य में कुंडली मिलान, तलाक क्यों, शादी के समय निर्धारण में सहायक योग, शनि व मंगल की वैवाहिक सुख में भूमिका, शादी में देरी: कारण-निवारण, दाम्पत्य जीवन सुखी बनाने के उपाय तथा कन्या विवाह का अचूक उपाय आदि विषयों पर विस्तृत जानकारी देने वाले आलेखों को सम्मिलित किया गया है।

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