राजेंद्र शर्मा ‘राजेश्वर’


(13 लेख)
आपका स्वास्थ्य और अंकशास्त्र

जुलाई 2011

व्यूस: 9702

अंकशास्त्र की उपयोगिता जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में लक्षित होती है। जातक का स्वभाव, वाहन, मकान व लॉटरी के नंबर, कंपनी का चयन, मेलापक, शेयर बाजार आदि सभी में अंकों की उपयोगिता सर्वोपरि होती है। आपके मूलांक में ही वे सभी योग्यताएं, ... और पढ़ें

स्वास्थ्यअंक ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीक

राहु के उद्भव की गाथा

जुलाई 2014

व्यूस: 3537

सर्वप्रथम राहु का उल्लेख सूर्य के प्रसंग में ऋग्वेद में प्राप्त होता है जिसका अर्थ अंधकार है। ऋग्वेद में राहु उस दैत्य का नाम प्रतीत होता है जो सूर्य-चंद्र ग्रहण का कारण बनता है। इसे स्वर्भानु कहा गया है, जो सूर्य के प्रकाश को... और पढ़ें

ज्योतिषग्रह

विवाह के प्रकार

मार्च 2014

व्यूस: 3242

विवाह जातक के जीवन काल की सबसे महत्वपूर्ण स्मरणीय घटना होती है। हमारे भारत देश में लड़के और लड़के के माता-पिता के आपसी संपर्क व सहयोग से धार्मिक व सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह होते हैं। विवाह मानव जीवन में एक अपरिहार्य संस्क... और पढ़ें

ज्योतिषविवाह

लक्ष्मी कृपा के ज्योतिषीय आधार

नवेम्बर 2013

व्यूस: 3236

दीपावली महापर्व की परंपरा कब से प्रारंभ हुई है यह बताना व जानना प्रायः दुष्कर है इस दीपावली पर्व परंपरा का इतिहास अलग-अलग ढंग से प्राप्त होता है। हमारी भारतीय संस्कृति वेद प्रधान है। वेदों को लेकर पौराणिक साहित्य में ब्रह्म की चर्... और पढ़ें

ज्योतिषदेवी और देवसंपत्तियंत्र

जन्मपत्रिका के अनिष्टकारी योग एवं अनिष्ट निवारक टोटके

फ़रवरी 2015

व्यूस: 3015

मंदिर में भोग, अस्पताल में रोग और ज्योतिष में योग का बड़ा महत्व है। योग शब्द की विस्तृत व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं, योग मिलन का पर्याय है। दो वस्तुओं के मिलन को योग और अलगाव को वियोग कहते हैं। एक से अधिक प्रकार की... और पढ़ें

ज्योतिषउपायज्योतिषीय योगभविष्यवाणी तकनीकटोटके

लग्नानुसार कालसर्प योग

मार्च 2013

व्यूस: 2563

मेषादि द्वादश राशियों के लग्न में निर्मित होने वाले कालसर्प योगों का विभिन्न रूपों में अलग अलग प्रभाव होता हैं। मेष तथा वृश्चिक लग्न-मंगल की राशि मेष-वृश्चिक लग्न में जन्मकुंडली में कालसर्प निर्मित हो तो मंगल और राहु दोनों से पीड़... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याभविष्यवाणी तकनीकराशि

रुद्राक्ष: उद्भव एवं उत्पत्ति

मई 2014

व्यूस: 2217

‘‘रुद्राक्ष’’ शब्द को अनेक भावार्थों में विवेचित किया गया है। सामान्यतः रुद्राक्ष को रुद्र$अक्ष अर्थात भगवान रुद्र (शिव) के आंसुओं से उत्पन्न एक प्रकार का कसैला, खारा फल माना गया है। रुद्र शब्द का निर्माण ‘रुत्’ से हुआ है, जिस... और पढ़ें

उपायअध्यात्म, धर्म आदिमंत्रमुहूर्तरूद्राक्षराशि

मुहूर्त की प्रासंगिकता आवश्यकता एवं उपादयेता

जून 2011

व्यूस: 2154

इस संसार में समय अनुकूल एवं शुभ होने पर सफलता शत प्रतिशत प्राप्त होती है जबकि समय प्रतिकूल और अशुभ होने पर सफलता असंभव है। इसी कारण शुभ कार्यों हेतु तिथि, वार, नक्षत्र, करण, चंद्रमास, ग्रहों का उदयास्त एवं दैनिक गति के आधार पर शुभ... और पढ़ें

ज्योतिषमुहूर्तभविष्यवाणी तकनीक

हस्तरेखा शास्त्र का इतिहास एवं परिचय

मार्च 2015

व्यूस: 1820

‘‘शब्दकल्पद्रुम खंड’’ के 14 वंे खंड के पृष्ठ 334 के अनुसार द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्णजी ने देवाधिदेव उमापति महादेव जी के समक्ष मानव के शुभाऽशुभ लक्षण जानने की इच्छा प्रकट की। श्रीकृष्ण बोले -‘‘ की दृशः पुरुषो, अवन्द्यो व... और पढ़ें

हस्तरेखा शास्रग्रह पर्वत व रेखाएंभविष्यवाणी तकनीक

ऋण एवं उनके उपाय

सितम्बर 2015

व्यूस: 1792

ऋण का अर्थ है ‘‘कर्ज’’ और कर्ज हर मनुष्य को चुकाना पड़ता है। इसका उल्लेख वेद-पुराणों में प्राप्त होता है। हिंदु धर्म-शास्त्रों के अनुसार मनुष्यों पर तीन ऋण माने गए हैं- देव ऋण, ऋषि ऋण एवं पितृ ऋण। इन तीनों में पितृ ऋण सबसे ... और पढ़ें

ज्योतिषउपायलाल किताब

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