अंजना अग्रवाल


तिलों का ज्योतिष में महत्व

आगस्त 2014

व्यूस: 129432

तिलों के अध्ययन को Moleosophy कहा जाता है। हस्त विज्ञान, टैरो कार्ड तथा अंकषास्त्र की तरह ही डवसमवेवचील का अध्ययन भी ज्योतिष की ही शाखा है । ज्योतिष के अनुसार सिर्फ हाथ और माथे की रेखाएं ही नहीं बल्कि शरीर पर बने कई अन्य चिह... और पढ़ें

ज्योतिषअन्य पराविद्याएंविविध

रुद्राक्ष धारण करने के नियम

मई 2014

व्यूस: 13701

रुद्राक्ष मानवजाति को भगवान के द्वारा एक अमूल्य देन है। रुद्राक्ष भगवान षिव का अंष है। रुद्राक्ष धारण करना भगवान षिव के दिव्य ज्ञान को प्राप्त करने का साधन है। सभी मनुष्य रुद्राक्ष धारण कर सकते हैं । हिन्दू धर्म ग्रंथो... और पढ़ें

उपायरूद्राक्ष

शनि की ढईया और साढ़ेसाती

नवेम्बर 2014

व्यूस: 10304

साढ़े-साती यानि शनि का आपकी राशि के आस-पास भ्रमण। शनि जब कुंडली में चंद्रमा की स्थिति से बारहवें, प्रथम और द्वितीय स्थान पर होते हैं तब शनि की साढ़े-साती होती है, शनि जब कुंडली में चंद्रमा की स्थिति से चैथे और आठवें स्थान पर होते... और पढ़ें

ज्योतिषविविधग्रह

काला जादू ज्योतिष की नजर में

जून 2014

व्यूस: 9726

काला जादू जिसे अभिचार (Abhichara) के नाम से भी जाना जाता है, जोकि विष्व के विभिन्न स्थानों में कई रूपों में प्रचलित है, इसके द्वारा नकारात्मक शक्तियों को जागृत किया जाता है। काला जादू का मुख्य ध्येय शत्रु को उस स्थान ... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगदशाभविष्यवाणी तकनीक

राहु द्वारा निर्मित योग और उनका फल

जुलाई 2014

व्यूस: 4052

ज्योतिष में राहु नैसर्गिक पापी ग्रह के रूप में जाना जाता है। राहु को Dragon's Head तथा North Node के नाम से भी जाना जाता है। राहु एक छाया ग्रह है। इनकी अपनी कोई राषि नहीं होती। अतः यह जिस राषि में होते हैं उसी राषि के ... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगग्रह

घर में क्या न करें

दिसम्बर 2014

व्यूस: 3346

हन्दू सभ्यता में प्राकृतिक शक्तियों के साथ तालमेल बिठाने के लिए घर के स्वरूप का निर्धारण करने तथा उसकी साज सज्जा करते समय कुछ चीजों का विशेष ध्यान रखा जाता है। घर के सदस्यों के बीच तालमेल बिठाने व शांति का माहौल बनाने के ल... और पढ़ें

अन्य पराविद्याएंअध्यात्म, धर्म आदिविविध

शादी बचपन में या 55 में

मार्च 2014

व्यूस: 2368

ज्योतिषीय विधान में विवाह कार्य की सिद्धि हेतु जन्म कुण्डली के सप्तम भाव तथा कारक ग्रह को देखा जाता है। लेकिन कुंडली में द्वितीय तथा एकादष भाव भी विवाह में महत्वपूर्ण होते हैं। जन्म कुंडली का सप्तम भाव जीवनसाथी तथा साझेदारी का होत... और पढ़ें

ज्योतिषविवाह

पितृ ऋण और पितृ पक्ष

सितम्बर 2014

व्यूस: 1426

भारतीय धर्म ग्रंथों में मनुष्य को तीन प्रकार के ऋणों-देवऋण, ऋषिऋण व पितृऋण से मुक्त होना आवश्यक बताया गया है। इनमें पितृ ऋण सर्वोपरि है। पितृऋण यानि हमारे उन जन्मदाता एवं पालकों का ऋण, जिन्होंने हमारे इस शरीर का ला... और पढ़ें

ज्योतिषउपायअध्यात्म, धर्म आदिभविष्यवाणी तकनीक

मकर संक्रांति पर दूर करें कुंडली के कमजोर ग्रहों के अशुभ प्रभाव

जनवरी 2015

व्यूस: 1306

मकर संक्रांति के पावन पर्व पर पूजा, दान, व्रत द्वारा आप सिर्फ पुण्य ही नहीं कमायेंगे बल्कि आप अपनी कुंडली के कमजोर ग्रहों के अषुभ प्रभाव को भी दूर कर सकते हैं। इसके लिए विषेष रूप से कुण्डली के कमजोर ग्रहों से सम्ब्ंाधित दान ... और पढ़ें

देवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिपर्व/व्रत

मास्टर अंक

जून 2015

व्यूस: 1142

अंकषास्त्र में 11, 22, 33 एवं 44 को मास्टर अंक की संज्ञा दी गई है। मास्टर अंक किसी अंक का साधारणतया अतिषय ;मगजतमउमद्ध रूप है जोकि वास्तव में एकल अंक को प्रदर्षित करते हैं।... और पढ़ें

अंक ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीक

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