कैसे करें होली में कष्टों का दहन

कैसे करें होली में कष्टों का दहन  

- होली के दिन हनुमान जी की आराधना का भी विशेष महत्व है। चमेली के तेल एवं सिंदूर से श्री हनुमान जी को चोला चढ़ाएं। हनुमान चालीसा के 7 पाठ करके बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं और प्रसाद बांटें, अनेक प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलेगी। - होली के दिन नारायण कवच का पाठ करें। इससे अनिष्ट का नाश व शत्रुओं से मुक्ति मिलती है। - पांच गोमती चक्र सिंदूर का तिलक लगाकर शत्रु का नाम लेकर जलती हुई होली में फेंक दें। इससे आपका शत्रु शत्रुता भूलकर प्रेमपूर्वक व्यवहार करने लगेगा। - होली जलने के बाद जो राख बचती है उस राख को शरीर पर रगड़कर स्नान करने से नवग्रह जनित रोग शांत होते हैं। किसी तांत्रिक कर्म के कारण स्वास्थ्य खराब चल रहा हो तो उससे स्वास्थ्य भी उत्तम हो जाता है। - जन्मकुंडली में अनेक ग्रह दूषित हों और परेशानियां बढ़ रही हों तो होली की राख को बहते हुए जल में प्रवाहित करने से परेशानियां दूर होती हैं। राख को विसर्जित करने के लिये सिद्ध योग हो तो और भी अच्छा है। अगर सर्वार्थ सिद्धि योग के समय यह प्रयोग करें तो उत्तम फल मिलता है। - जिन व्यक्तियों को शीघ्र नजर लगती हो उन्हें होली की राख को तांबे के ताबीज में भरकर काले रंग के धागे में पिरोकर गले में धारण करना चाहिए, नजर लगनी बंद हो जाएगी। - होलिका दहन के समय तीन गोमती चक्र लेकर उनको अपने बायीं ओर रखें तथा इस मंत्र का 51 बार उच्चारण करें और गोमती चक्र जलती हुई होली में डाल दें और शत्रु से रक्षा की प्रार्थना करें मंत्र: ऊँ ह्लीं क्लीं फट्।। ईश्वर से प्रार्थना है कि इस होली पर सबके कष्टों का निवारण हो और जीवन में खुशी व रंगों की बहार हो।


अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.