हस्तरेखाओं में कैरियर दर्शन

हस्तरेखाओं में कैरियर दर्शन  

1. जिन व्यक्तियों की हाथ की रेखाएं स्पष्ट, पतली, गहरी हों और हाथ पर बहुत अधिक छोटी-बड़ी रेखाएं नहीं हों, ऐसे व्यक्तियों का आजीविका क्षेत्र अच्छा रहता है तथा हर परिस्थिति में वे अपने जीवन में उन्नति करते हैं। 2. यदि हथेली की त्वचा स्निग्ध, चमकीली और लालिमा युक्त हो और दबाने पर हाथ मांसल और गद्देदार प्रतीत हों और अंगुलियों के नीचे स्थित पर्वत उभरे हुए हों तो ऐसे व्यक्ति का कैरियर सामान्यतः उत्तम रहता है। 3. यदि हथेली में मस्तिष्क रेखा मंगल के प्रारंभ तक गई हुई हो, अंत में नुकीली हो और भाग्य रेखा मणिबंध से प्रारंभ होकर गुरु, शनि या बुध पर्वत तक गई हुई हो, बीच में कहीं भी खंडित न हो और न इस पर कोई क्रास का निशान हो तो ऐसे व्यक्ति को कैरियर में उच्च स्थान की प्राप्ति होती है। 4. जिन व्यक्तियों के हाथ में अंगुलियां टेढ़ी-मेढ़ी हों और नाखून भी धारीदार या विकृत हों तो ऐसे व्यक्ति अपने कैरियर में बहुत अधिक सफलता प्राप्त नहीं कर पाते हैं और इस संबंध में उन्हें अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। 5. यदि दायें हाथ की अपेक्षा बायें हाथ की रेखाएं बहुत अधिक अच्छी हों और बायें हाथ में त्रिकोण, वर्ग आदि शुभ चिन्हों की अधिकता हो तो ऐसा व्यक्ति कर्म की अपेक्षा अपने भाग्य की सहायता से कैरियर में उन्नति की प्राप्ति करता है। यदि ये शुभ चिन्ह शुक्र पर्वत पर अधिक हों, तो यह भी देखा गया है कि ऐसे व्यक्ति विवाह के बाद अधिक उन्नति करते हैं। हस्तरेखा लक्षण और विभिन्न कैरियर क्षेत्र सफल व्यापारी हेतु 1. यदि अंगुष्ठ एवं कनिष्ठिका लंबी हो, बुध क्षेत्र उभरा हुआ और उस पर त्रिकोण बना हो इसके अतिरिक्त भाग्य रेखा एवं सूर्य रेखा की स्थिति भी हाथ में अच्छी हो तो ऐसा जातक एक सफल व्यापारी बनता है। न्यायाधीश हेतु: यदि हथेली में हृदय रेखा एवं मस्तिष्क रेखा के बीच का भाग बड़ा हो, तर्जनी अंगुली बड़ी हो, कनिष्ठिका का प्रथम पोर और अधिक बड़ा हो, सूर्य पर्वत उन्नत हो, तो ऐसी स्थिति एवं मध्यमा अंगुली भी लंबी हो तो ऐसा जातक सफल न्यायाधीश बनने की योग्यता रखता है। उच्चाधिकारी हेतु 1. यदि हथेली में गुरु पर्वत उन्नत हो, सूर्य रेखा स्पष्ट एवं सीधी हो और भाग्य रेखा पूर्ण हो तो ऐसा व्यक्ति राजकीय सेवा में उच्च प्रशासनिक अधिकारी बनता है। 2. यदि किसी जातक के दायें हाथ की तर्जनी एवं कनिष्ठिका अंगुलियां बायें हाथ की तर्जनी और कनिष्ठिका अंगुलियों की अपेक्षा अधिक लंबी एवं पुष्ट हों, प्रथम मंगल एवं सूर्य के क्षेत्र उन्नत हों तो ऐसा जातक उच्च पद प्राप्त करता है। चिकित्सक बनने के लक्षण: अंगुलियां लंबी हों, बुध क्षेत्र उभरा हुआ और उस पर तीन खड़ी रेखाएं हों, सूर्य रेखा पतली एवं गहरी हो, हृदय रेखा एवं मस्तिष्क रेखा स्पष्ट हों और शुक्र एवं चंद्र पर्वत पर कोई अशुभ चिन्ह न हो तो वह व्यक्ति सफल एवं यशस्वी चिकित्सक बनता है। चित्रकार (कलाकार) बनने के लक्षण: यदि हथेली बड़ी हो, अंगुलियां नुकीली एवं पतली हों, अनामिका अंगुली का प्रथम पोर बड़ा हो और शुक्र पर्वत उन्नत हो तो ऐसा व्यक्ति अच्छा चित्रकार बनता है। अभिनेता के लक्षण 1. अंगुलियां चैकोर हों, मस्तिष्क रेखा दो मुंही हो, उसका एक भाग बुध पर्वत तक गया हो और शुक्र क्षेत्र उन्नत हो तो अभिनय के क्षेत्र में उच्चस्तरीय सफलता प्राप्त करता है। 2. यदि मस्तिष्क रेखा बुध क्षेत्र पर जाकर समाप्त हो, चंद्र पर्वत उन्नत हो और शुक्र क्षेत्र पर त्रिकोण का चिन्ह बन रहा हो तो ऐसा व्यक्ति अभिनय क्षेत्र में सफल होता है। लेखक, पत्रकार एवं संपादक के योग 1. हथेली में बुध क्षेत्र उन्नत हो, कनिष्ठिका अंगुली अनामिका के अंतिम क्षेत्र के मध्य तक गई हो, चंद्र पर्वत उन्नत हो और मस्तिष्क रेखा नीचे झुककर चंद्र पर्वत तक आ गई हो, तो ऐसे व्यक्ति की कल्पना शक्ति बहुत अच्छी होती है और वह अच्छा लेखक, पत्रकार या संपादक बन सकता है। 2. गुरु पर्वत उन्नत हो उस पर स्वस्तिक या चतुर्भुज का चिन्ह बना हो, मस्तिष्क रेखा बुध या चंद्र क्षेत्र तक गयी हुई हो और सूर्य रेखा पर सितारा का चिन्ह हो, तो कवि, लेखक या प्रकाशक के क्षेत्र में उच्च सफलता प्राप्त होती है। शिक्षक बनने के योग 1. यदि हाथों की अंगुलियां चैकोर हों, गुरु पर्वत उभरा हुआ हो, और उस पर क्राॅस या चतुष्कोण का चिन्ह हो, सूर्य रेखा स्पष्ट एवं निर्दोष हो तो ऐसा व्यक्ति शिक्षक बनता है और शिक्षण क्षेत्र में उच्च पद प्राप्त करता है। 2. यदि बुध क्षेत्र उन्नत, तर्जनी अंगुली मध्यमा की ओर झुकी हुई हो और गुरु पर्वत पर स्वास्तिक या वर्ग का चिन्ह हो तो ऐसा व्यक्ति शिक्षा के क्षेत्र में उच्च पद प्राप्त करता है। इंजीनियर बनने के लक्षण 1. यदि हथेली में अंगुलियां आगे से गोलाई लिये हुए हों, चंद्र एवं मंगल क्षेत्र उन्नत हों और अंगूठा छोटा हो तो ऐसा व्यक्ति एक सफल इंजीनियर बनता है। 2. अंगुलियां नोकदार एवं मोटाई लिए हुए और हथेली चैड़ी एवं चैरस हो, सभी ग्रह क्षेत्र फैले हुए हों और अंगूठा छोटा एवं मजबूत हो तो व्यक्ति सफल इंजीनियर बन सकता है। ज्योतिषी के हस्त लक्षण 1. यदि कनिष्ठिका अंगुली के अंतिम पर्व तक गई हुई हो, गुरु पर्वत उन्नत हो उस पर स्वास्तिक, वलय, चतुष्कोण अथवा त्रिकोण का चिन्ह हो और मस्तिष्क रेखा मंगल क्षेत्र तक गई हो तो ऐसा व्यक्ति सफल ज्योतिषी बनता है और उसे इस क्षेत्र में धन एवं यश दोनों की प्राप्ति होती है। 2. यदि चंद्र क्षेत्र पर खड़ी रेखा बनी हुई हो और मस्तिष्क रेखा इससे आकर मिले, मस्तिष्क रेखा अथवा भाग्य रेखा के समीप त्रिकोण का चिन्ह हो और मध्यमा अंगुली लंबी हो, तो ऐसे व्यक्ति का अंतर्मन शीघ्र जागृत हो जाता है। इस प्रकार के व्यक्तियों की भविष्यवाणियां सच होती है। इन्हें वाक् सिद्धि भी प्राप्त हो सकती है। प्रबंधक बनने के योग: यदि तर्जनी अंगुली लंबी हो, गुरु पर्वत उभार लिए हुए हो, मस्तिष्क रेखा बुध क्षेत्र की ओर झुकाव लिए हुए हो और निर्दोष सूर्य रेखा हाथ में विद्यमान हो, तो ऐसा व्यक्ति सफल प्रबंधक बनता है और प्रशासनिक कार्य सुचारु रूप से चलाता है। खिलाड़ी के योग 1. यदि दोनों मंगल क्षेत्र उन्नत हों, मस्तिष्क रेखा और हृदय रेखा के बीच अधिक अंतर न हो, शनि पर्वत उन्नत हो तो ऐसा व्यक्ति अच्छा खिलाड़ी बन सकता है। 2. यदि मंगल क्षेत्र पर चतुष्कोण का चिन्ह हो, मस्तिष्क रेखा मोटी हो, मध्यमा अंगुली लंबी हो और हाथ देखने में थोड़ा सख्त प्रतीत हो तो ऐसा व्यक्ति सफल खिलाड़ी बन सकता है। उसे इस क्षेत्र में धन एवं यश दोनों की प्राप्ति होती है। शेयर व्यापारी के योग 1. यदि बुध क्षेत्र पर दो या तीन खड़ी रेखाएं हों, कनिष्ठिका अंगुली लंबी एवं नुकीली हो और भाग्य रेखा बुध पर्वत की ओर गई हुई हो तो ऐसे व्यक्ति को शेयर के कार्य में अत्यधिक लाभ होता है। 2. यदि भाग्य रेखा बुध पर्वत पर जाकर समाप्त हो, बुध क्षेत्र उन्नत हो और हथेली के मध्य भाग में त्रिकोण का चिन्ह हो तो ऐसे व्यक्ति को अपने जीवन में आकस्मिक रूप से धन की प्राप्ति होती है। उसके लिए शेयर सट्टे आदि का कार्य भी लाभदायक सिद्ध होता है। ज्ञातव्य तथ्य: हस्तरेखाओं से कैरियर निर्धारण करने में तर्जनी, मध्यमा, अनामिका एवं कनिष्ठिका अंगुलियों और इनके नीचे क्रमशः स्थित गुरु, शनि, सूर्य एवं बुध पर्वतों का विचार विशेष रूप से किया जाता है। इन पर्वतों पर स्थित चिन्ह एवं इनकी स्थिति आदि के अनुसार फल प्राप्त होते हैं। हस्त रेखाओं से कैरियर निर्धारण में सर्वप्रथम प्रश्न यह उठता है कि कौन से हाथ का निरीक्षण करना चाहिए। सामान्य रूप से पुरुषों का दायां और स्त्रियों का बायां हाथ देखने के निर्देश शास्त्रों में प्राप्त होते हैं। दायां हाथ कर्म का और बायां हाथ भाग्य का परिचायक होता है। सामान्य रूप से परिवार में पुरुष आजीविका चलाता है और स्त्री घर की आंतरिक व्यवस्था को देखती है। वर्तमान समय में स्त्री-पुरुष दोनों ही पुरुषार्थ करते हैं और आजीविका अर्जन में तत्पर रहते हैं। इसलिए आजीविका के संबंध में विचार करते समय स्त्री के दायें हाथ को ही अधिक प्राथमिकता देनी चाहिए। चूंकि बायां हाथ भाग्यफल का प्रतीक होता है और भाग्य की सहायता के बगैर कोई भी व्यक्ति उच्च स्थिति को प्राप्त नहीं कर सकता है इसलिए बायें हाथ को भी इस संबंध में अवश्य देखना चाहिए। हस्तरेखा योग व लक्षणादि किसी भी मनुष्य के लिए वह खुली किताब है, जिसमें उसका संपूर्ण जीवन वृतांत, शुभाशुभ समय और शुभाशुभ क्षेत्रादि का अनुमान लगाया जा सकता है। भविष्य कथन में जन्मकुंडली के समान ही हस्तरेखाओं का भी अत्यधिक महत्व होता है। जिसके माध्यम से जीवन के किसी भी क्षेत्र में जानकारी प्राप्त की जा सकती है। अतः यह सुनिश्चित है कि जो फल हस्तरेखाओं द्वारा परिलक्षित होते हैं, वे निश्चित रूप से प्राप्त होते हैं।


फलादेश तकनीक विशेषांक  जुलाई 2010

शोध पत्रिका रिसर्च जर्नल आॅफ एस्ट्राॅलाजी के इस अंक में भविष्यकथन की विभिन्न ज्योतिषीय तकनीकों पर अनेक ज्योतिषीय आलेख हैं।

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