अंक ज्योतिष और कर्म

अंक ज्योतिष और कर्म  

अंक ज्योतिष और कर्म मीतू सहगल अंक ज्योतिष ऐसे अंकों की भी बात करता है जो हमारे पिछले जन्म के कर्मों का फल दर्शाते हैं, उन्हेंें कार्मिक अंक कहते हैैंं। कार्मिक अंक हमारे जीवन मेंें तभी आते हैं जब हमने प्र्रकृति व मानवता के नियमोंें का पालन न किया हो, मुखय अंकों में इनकी उपस्थिति का अर्थ है कि उस व्यक्ति को जीवन मेंें बार-बार विफलताओं का सामना करना पड़े़ेगेगा। अंक विज्ञान का महत्व हमें अपने जीवन, प्रतिभाओं, उद्देश्य और रुकावटों के बारे में जागरूक करना है। जन्म होते ही हमारे साथ कुछ अंक जुड़ जाते हैं। जैसे कि नाम, जन्म तिथि, समय आदि के रूप में। इन्हें जानकर हम अपने जीवन को सार्थक व सफल बनाने के लिए सही दिशा में उत्तम प्रयास कर सकते हैं। अंक विज्ञान बहुत ही सरल व सटीक दिशा निर्देश देने में समर्थ है। अंक ज्योतिष ऐसे अंकों की भी बात करता है जो हमारे पिछले जन्म के कर्मों का फल दर्शाते हैं, उन्हें कार्मिक अंक कहते हैं। कार्मिक अंक हमारे जीवन में तभी आते हैं जब हमने प्रकृति व मानवता के नियमों का पालन न किया हो, मुखय अंकों में इनकी उपस्थिति का अर्थ है कि उस व्यक्ति को जीवन में बार-बार विफलताओं का सामना करना पड़ेगा। यदि कार्मिक अंक केवल घटना अंक के रूप में आएं तो उसका प्रभाव केवल सीमित समय तक होता है। जब कर्मों का ऋण उतर जाता है, तब हम अपने जीवन को नई दिशा दे सकते हैं। यदि हम उन ऋणों को जानते हों, तो उन्हें जल्दी और सही तरीके से समाप्त कर सकते हैं। कार्मिक अंक हैं- 13, 14, 16, 10 इनके अतिरिक्त 11 और 22 भी कार्मिक या मास्टर अंक कहलाते हैं। इन अंकों का होना भय की बात नहीं बल्कि जीवन को सार्थक बनाने का अवसर है। ये अंक रास्ता दिखाते हैं ताकि आपकी परेशानियां आपके लिए रुकावट न बन जाएं। कार्मिक अंक 13 13 नामांक, मूलांक या जन्म तिथि वाले जातकों ने पूर्व जन्मों में अपनी जिम्मेदारियों को दूसरों पर डाला होता है। इसके फलस्वरूप उन्हें निरंतर रुकावटों व परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अत्यधिक काम करने के बावजूद भी उन्हें पूर्ण फल नहीं मिलता। इस कारण जातक अपने आपसे और अपनी परिस्थिति से भागने की कोशिश करता है। रास्ता ढूंढने के लिए भी अत्यंत कोशिश करनी पड़ती है। इसका उपचार यही है कि जातक अपनी जिम्मेदारियों को पूरी तरह से निभाए, 13 अंक कई देशों में अशुभ माना जाता है। कार्ड्स में 13 अंक का कार्ड् मृत्यु दर्शाता है। इस मृत्यु का अर्थ जीवन का समाप्त होना नहीं बल्कि परिवर्तन और रूपांतरण है। मृत्यु का अर्थ है नई शुरुआत। कई जातकों के लिए 13 अंक शुभ भी होता है। यह अंक यदि रुकावटें लाता है तो यकायक नए अवसर भी प्रदान करता है। कार्मिक अंक 14 14 नामांक, मूलांक या जन्म तिथि वाले जातक सांसारिक आनंद के इच्छुक होते हैं तथा व्यसनों से ग्रस्त होने की संभावना अधिक होती है जो विनाश की ओर ले जाती है। यह 5 अंक के नकारात्मक गुणों को दर्शाता है। जातक चंचल होने के कारण किसी कार्य में सिद्धि नहीं पाता और न ही किसी विषय की गहरायी तक जा पाता है। उसके लिए यही परामर्श है कि वह हर कार्य को पूर्णता तक करे तभी उसकी प्रतिभाओं का सदुपयोग होगा। विलंब या रुकावटों को दूर करने के लिए जातक मानवता की निष्काम भाव से सेवा करे। कार्मिक अंक 16 16 अंक आपदा, योजनाओं में रुकावट, अपयश, दुर्घटना, कपट, विपत्ति आदि से सावधान करता है। यह अंक पूर्व अवैध प्रेम संबंधों की ओर संकेत करता है। यह मूलतः आशावाद और विश्वास की परीक्षा लेता है। यदि यह अंक मूलांकों में से एक हो तो झूठी दोस्ती, धन, यश और प्रतिष्ठा की हानि का भी सूचक है। जातक ने अपना पूर्व जीवन अज्ञानता और स्वार्थ में नष्ट किया होता है। जातक अपने अहंकार के कारण सच्चे दोस्त खो देते हैं। इसलिए उनको चाहिए कि वह भौतिकवाद और अहंकार को छोड़कर मानवता की निष्काम भाव से सेवा करें किसी को अपने से कम न समझे, सबका सम्मान करे। तभी जातक का जीवन सफल होगा अन्यथा बार-बार मुश्किलों और अकेलेपन का सामना करना पड़ेगा। 19 अंक प्रतिभा और महत्वाकांक्षा के दुरूपयोग का सूचक है। इस कारण जातक को अवसर तो बहुत मिलेंगे लेकिन वह उनका लाभ नहीं उठा पायेगा और न ही अपनी प्रतिभाओं का अच्छा उपयोग कर पायेगा। वह परिस्थितियों, योजनाओं और षड्यंत्रों का शिकार बन सकता है। 19 अंक वाला जातक कर्म के बंधन को पूरी तरह पहचान पाता है। यह आपको अक्खड़पन से सावधान रहने को कहता है। आपने अपनी शक्तियों का दुरूपयोग किया है जिसका फल आपको इस जन्म में भुगतना पड़ेगा। यह अंक आपके धीरज व सहनशीलता की पूरी परीक्षा लेता है। इसका उपाय सही है कि आप अपनी और अपने आस पास के लोगों की आवश्यकताओं को समझें और गीता के सबसे महत्वपूर्ण उपदेश का पालन करें : कर्म किये जा, फल की चिंता न कर। जैसे जैसे आपका ऋण उतरता जायेगा, आपका जीवन सुखमय हो जायेगा। इन अंकों के अतिरिक्त दो और अंक ऐसे हैं जिन्हें मास्टर अंक बोला जाता है- 11 और 22। अंक शास्त्र में 9 से बड़े अंकों को आपस में जोड़कर एक अंक में बदल दिया जाता है। लेकिन यदि 11 और 22 अंक किसी स्थिति, नामांक या मूलांक के रूप में आते हैं तो इन्हें 11 और 22 के रूप में भी देखें। इनका अपना एक महत्व है। अंक 11 : 11 अंक स्वार्थी महत्वकांक्षाओं का अंक है। इस अंक का जीवन पर बहुत ही गहरा असर पाया जाता है। यह घरेलू या भौतिक जीवन में संकट का भी सूचक हो सकता है। 11 नामांक, मूलांक या जन्म तिथि वाले जातक के जीवन में सब कुछ बहुत अचानक होता है। जैसे शादी, व्यवसाय, नौकरी, गलतफहमी, व्यापार या मान प्रतिष्ठा में हानि। किंतु यदि व्यक्ति का रुझान अध्यात्मिक जीवन की ओर हो जाये या सहनशील और दयालु हो जाये तो उसके जीवन को नई दिशा मिल जाती है। क्राइस्ट और गौतम बुद्ध 11 अंक के अध्यात्मिक पक्ष के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं, हिटलर और मुसोलिनी का अंक भी 11 था किंतु उन्होंने 11 के अध्यात्मिक पक्ष को नहीं ग्रहण किया। इस अंक वाले व्यक्ति बहुत संवेदनशील होते हैं। उनके जीवन में सफलता और शांति तब आती है जब वे अपनी ऊर्जा व प्रतिभाओं का उपयोग मानवता के उत्थान के लिए करते हैं। अंक 22 : 22 अंक वाले जातकों का कर्म के प्रति अधिक रूझान होता है। विशेषतः ऐसे कार्य जो समाज, देश और मानवता के हित में हों, किंतु ऐसे जातक अपनी कार्यक्षमता से अधिक कार्यों की जिम्मेदारी उठा लेते हैं और कार्य समय पर पूरा न होने पर निराशा व तिरस्कार का सामना करते हैं। इनके लिए यही संदेश है कि वे अपनी कार्यक्षमता को समझ कर ही कार्यों की जिम्मेदारी लें। 22 अंक वाले जातक भी अति संवेदनशील होते हैं और अपने आप को सही तरीके से व्यक्त करना इन्हें सीखना पड़ता है। कार्मिक अंकों की उपस्थिति कोई भय की बात नहीं, हर व्यक्ति के जीवन में किसी न किसी कार्मिक अंक की उपस्थिति अवश्य होती है क्योंकि मनुष्य धरती पर अपने कर्मों का लेन-देन पूरा करने के लिए ही आता है। जब यह लेन-देन पूरा हो जाता है और अपने जीवन के उद्देश्य को संपूर्ण कर लेता है तो मनुष्य जन्म मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है। कार्मिक अंक इस लेन-देन को पूरा करने के उत्तम अवसर प्रदान करते हैं।


अंक विशेषांक  जुलाई 2010

अंक शास्त्र की विस्तृत जानकारी के लिए पढ़े अंक विशेषांक की आवरण कथा के रोचक लेख। इसके विचार गोष्ठी कॉलम में पढ़ें- ''कैरियर का चुनाव'' नामक ज्योतिषज्ञानवर्द्धक लेख। 'फलित विचार' स्तंभ के अंतर्गत आचार्य किशोर का ''सूर्य का नीच भंग राजयोग'' नामक लेख विशेष ज्ञानवर्द्धक है। पावन स्थल में मां तारा के प्राचीन सिद्ध पीठ का वर्णन है।

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.