क्या आप जानते है

क्या आप जानते है  

1- द ग्रेट नास्त्रेदमस को सर्वाधिक महान भविष्यवक्ता माना जाता है। इनके द्वारा की गई भविष्यवाणियों में प्रमुख हैं- द्वितीय विश्वयुद्ध, अमेरीकी राष्ट्रपति जॅन. एफ. कैनेडी की हत्या और वल्र्ड ट्रेड सेंटर पर हमला। 2- मध्य युग में बहुत से धार्मिक गुरुओं (कैथोलिक पोप) को ज्योतिष की अति विशिष्ट जानकारी रहती थी। सिक्सस IV पहले पोप थे जिन्हें जन्मपत्री बनाने व इसके आधार पर भविष्यवाणी करने की योग्यता प्राप्त थी। जूलियस II ने अपने राज्याभिषेक का समय ज्योतिष के आधार पर दिए गए मुहूर्तानुसार किया और लियो X और पाल III ज्योतिष पर विशेष रूप से विश्वास करते थे। 3- एडाल्फ हिटलर ने पूरे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान एक ज्योतिषी की सहायता ली। 4- एस्ट्रोकार्टोग्राफी का अभ्यास यह बताता है कि आप अपनी भौगोलिक स्थिति से किस प्रकार प्रभावित होते हैं। ऐसा विश्वास किया जाता है कि आपकी जन्मकुंडली की संसार के विभिन्न भागों से तुलना किए जाने पर यह पता लगाया जा सकता है कि संसार के किस क्षेत्र में आप सर्वाधिक सफल होंगे। 5- फ्रौ एल्सबैथ इबर्टिन नामक जर्मन एस्ट्रोलाजर को सन 1924 में जब हिटलर की जन्मपत्री दिखाई गई तो उसने एकदम सटीक भविष्यवाणी की थी कि हिटलर फ्यूहरर अर्थात् महान नेता बनेगा। 6- टोक्यो में 24 ऐसी घटनाओं का रिकार्ड है जिसमें जापानी लोग पारंपरिक जापानी अभिवादन करते हुए मृत्यु को प्राप्त हुए या उनके लिए जख्मी हो गए। 7- कौक्रोच की रेडिएषन के कुप्रभाव से बचने की प्रतिरोधात्मक क्षमता सर्वाधिक है। इसलिए परमाणु युद्ध में जीवित रहने की सर्वाधिक संभावना कौक्रोच की ही है। 8- मानव शरीर में प्रत्येक सैकेंड में आठ मिलियन रक्त कोशिकाएं मरती हैं और दूसरे ही सैकेंड में आठ मिलियन रक्त कोशिकाएं उत्पन्न हो जाती हैं। 9- एक रेड ब्लड सेल को पूरा दौरा करने के लिए 20 सैकेंड का समय लगता है।

कालसर्प योग एवं राहु विशेषांक  मार्च 2013

फ्यूचर समाचार पत्रिका के कालसर्प योग एवं राहु विशेषांक में कालसर्प योग की सार्थकता व प्रमाणिकता, द्वादश भावों के अनुसार कालसर्प दोष के शांति के उपाय, कालसर्प योग से भयभीत न हों, सर्पदोष विचार, सर्पदोष शमन के उपाय, महाशिवरात्रि में कालसर्प दोष की शांति के उपाय, राहु का शुभाशुभ प्रभाव, कालसर्पयोग कष्टदायक या ऐश्वर्यदायक, लग्नानुसार कालसर्पयोग, हिंदू मान्यताओं का वैज्ञानिक आधार, वास्तु परामर्श, वास्तु प्रश्नोतरी, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, होलीकोत्सव, गौ माहात्म्य, पंडित लेखराज शर्मा जी की कुंडली का विश्लेषण, व्रत पर्व, कालसर्प एवं द्वादश ज्योर्तिलिंग आदि विषयों पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई है।

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