विभिन्न भावों में मंगल का फल

जून 2013

व्यूस: 25914

जन्मकुंडली के प्रथम भाव में मंगल जातक को साहसी, निर्भीक, क्रोधी, किसी हद तक क्रूर बनाता है, पित्त रोग का कारक होता है तथा चिड़चिड़ा स्वभाव वाला बनाता है। उसमें तत्काल निर्णय लेने की क्षमता होती है तथा वह लोगों को प्रभावित करने तथा अ... और पढ़ें

ज्योतिषघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

कुंडली के विभिन्न भावों में केतु का फल

मई 2014

व्यूस: 20270

प्रथम भाव केतु यदि प्रथम भाव में हो तो व्यक्ति रोगी, चिन्ताग्रस्त, कमजोर, भयानक पशुओं से परेशान तथा पीठ के कष्ट का भागी होता है। वह अपने द्वारा पैदा की गई समस्याओं से लड़ने वाला, लोभी, कंजूस तथा गलत लोगों का चयन करने के कारण... और पढ़ें

ज्योतिषघरग्रहभविष्यवाणी तकनीकराशि

सूर्य

मार्च 2013

व्यूस: 7070

आदिकाल में जब ब्रह्माण्ड से ब्रह्मा जी की उत्पति हुई तो उन्होंने सर्वप्रथम ॐ का उच्चारण किया। यही ॐ दृष्टि का प्रथम शब्द था सूर्य का शरीर कहा जाता है। जब ब्रह्मा के चारों मुखों से वेद प्रकट हुए तब वे सूर्य के तेज से प्रकाशित हुए।... और पढ़ें

ज्योतिषघरग्रहभविष्यवाणी तकनीकराशि

चन्द्र

अप्रैल 2013

व्यूस: 6224

दक्षराज की 27 कन्याओं के चन्द्रमा से विवाह के विषय में बहुत ही सुन्दर कथा का वर्णन मिलता है। इसके अनुसार राजा दक्ष की सभी कन्याओं में रोहिणी सबसे अधिक रूप और गुणों से परिपूर्ण थी।... और पढ़ें

ज्योतिषघरग्रहभविष्यवाणी तकनीकराशि

केतु

अप्रैल 2014

व्यूस: 6103

मानव मन सदा कथाओं में रूचि रखता है तथा हम उनके बार - बार कथन और उनके नये अर्थ विस्तार से सदा ही आत्मिक संतोष प्राप्त करते हैं। यही कारण है कि हम ज्योतिष में ग्रहों के जन्म और प्रभाव के विषय में विभिन्न कथाएं पाते हैं। यह कथाएं अपन... और पढ़ें

ज्योतिषग्रह

मंगल

मई 2013

व्यूस: 4444

मंगल के जन्म से संबंधित एक बहुत ही सुंदर कथा है। प्राचीन काल में जब हिरण्य कश्यप दैत्य के बड़े भाई हिरण्याक्ष ने पृथ्वी का हरण किया तो पृथ्वी को दैत्य से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने वराह के रूप में अवतार लेकर हिरण्याक्ष का वध कर प... और पढ़ें

ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

बुध

जुलाई 2013

व्यूस: 3227

बुध के जन्म की कथा काफी अद्भुत तथा उत्तेजक है। यदि हम उस काल की ओर लौटें जबकि यह घटनाएं हुई थीं तो इन घटनाओं ने सृष्टि में काफी उथल-पुथल मचा दी थी। शुरू में बुध को अपनाने के लिए कोई भी तैयार नहीं था तथा इसके पितृत्व को लेकर बहुत व... और पढ़ें

ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

कुंडली के विभिन्न भावों में

मार्च 2014

व्यूस: 3041

प्रथम भाव में राहु व्यक्ति को दूसरों के भीतर झांककर उनकी सही पहचान पाने की दृष्टि देता है। वह कष्टदायक, आलसी, बुद्धिहीन, स्वार्थी, अधार्मिक, बातूनी, साहसी तथा विपरीत लिंग वालों से लाभ प्राप्त करने वाला होता है। वैवाहिक सुख से वंचि... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगग्रह

राजनैतिक उथल-पुथल वाला वर्ष 2011

फ़रवरी 2011

व्यूस: 2866

वर्ष 2011 किन परिवर्तनों को साथ लेकर चलेगा आइए जानें विशेष रूप से स्वतंत्र भारत के इस वर्ष के भविष्य को ज्योतिष के आइने में... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणकुंडली व्याख्यामेदनीय ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीक

कुंडली के विभिन्न भावों में केतु का फल

मई 2014

व्यूस: 1876

प्रथम भाव केतु यदि प्रथम भाव में हो तो व्यक्ति रोगी, चिन्ताग्रस्त, कमजोर, भयानक पशुओं से परेशान तथा पीठ के कष्ट का भागी होता है। वह अपने द्वारा पैदा की गई समस्याओं से लड़ने वाला, लोभी, कंजूस तथा गलत लोगों का चयन करने के कारण... और पढ़ें

ज्योतिषघरग्रहभविष्यवाणी तकनीकराशि

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