सर्प की हत्या करने से यह दोष लगता है जिससे जातक संतानहीन होता है। शास्त्रों एवं पुराणों में भी सर्प की हत्या स्वयं करना या किसी दूसरे से करवाना पाप कर्म माना गया है। इस पाप के कारण जातक का वंश नष्ट हो जाता है क्योंकि पुत्रोत्पत्ति के साथ इस प्रकार की सर्प हत्याओं का संबंध होता है। उदाहरण के तौर पर इसे विभिन्न ज्योतिष सूत्रों के माध्यम से दर्शाया गया है। 1- यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में लग्नेश राहु से युत हो तथा पंचमेश मंगल से युत हो, कारक गुरु राहु से युत हो, सर्प के श्राप से संतान की हानि होती है। 2- यदि जन्मकुंडली में मंगल के अंश में मंगल से युक्त पंचमेश बुध हो और लग्न में राहु हो, तो सर्प के श्राप से संतान की हानि होती है। 3- यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में संतान कारक ग्रह गुरु मंगल से युक्त हो और लग्न में राहु हो तथा पंचमेश षष्ठम्, अष्टम या द्वादश भावों में हो अर्थात इन भावों में से किसी भी भाव में हो तो सर्प के श्राप से संतानहीनता होती है। 4- यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में पंचमेश राहु से युक्त हो तथा पंचम भाव में नीच शनि चंद्रमा से युत हो अथवा दृष्ट हो तो सर्प के श्राप से संतान की हानि होती है। 5- यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में तीन केंद्र भावों में पापी ग्रह हांे तो ऐसे व्यक्ति को पुत्र का सुख सर्प श्राप के कारण नहीं मिलता है। 6- यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में पंचम भाव में राहु बैठा हो और उसे मंगल देखता हो तो ऐसे जातक की संतान हानि सर्प के श्राप से होती है। पंचम भाव में सूर्य, शनि, मंगल, राहु, गुरु, बुध हो और पंचमेश एवं लग्नेश निर्बल हो, तो सर्प के श्राप से संतान की हानि होती है। 7- यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में पंचमेश एवं लग्नेश निर्बल हो और पंचमेश मंगल से युत हो तथा लग्नेश राहु से युत हो तो ऐसे जातक की संतान हानि सर्प के श्राप से होती है। 8- यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में पंचमेश मंगल होकर अपने ही नवमांश में हो और पंचम भाव में राहु आदि पापी ग्रह हांे तो ऐसा जातक सर्प के श्राप से संतानहीन होता है। 9- यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में पंचम भाव का कारक बृहस्पति मंगल से युत हो, लग्नेश राहु से युत हो या लग्न में राहु हो तथा पंचमेश छठे, आठवें, बारहवें भाव में हो तो ऐसे जातक की संतान हानि सर्प श्राप से ग्रसित होने के कारण होती है। 10 यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में पंचम भाव में शनि हो और पंचमेश राहु से युत हो तथा चंद्रमा उसे देखता हो तो ऐसे जातक की संतान हानि सर्प के श्राप से होती है।


कालसर्प योग एवं राहु विशेषांक  मार्च 2013

फ्यूचर समाचार पत्रिका के कालसर्प योग एवं राहु विशेषांक में कालसर्प योग की सार्थकता व प्रमाणिकता, द्वादश भावों के अनुसार कालसर्प दोष के शांति के उपाय, कालसर्प योग से भयभीत न हों, सर्पदोष विचार, सर्पदोष शमन के उपाय, महाशिवरात्रि में कालसर्प दोष की शांति के उपाय, राहु का शुभाशुभ प्रभाव, कालसर्पयोग कष्टदायक या ऐश्वर्यदायक, लग्नानुसार कालसर्पयोग, हिंदू मान्यताओं का वैज्ञानिक आधार, वास्तु परामर्श, वास्तु प्रश्नोतरी, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, होलीकोत्सव, गौ माहात्म्य, पंडित लेखराज शर्मा जी की कुंडली का विश्लेषण, व्रत पर्व, कालसर्प एवं द्वादश ज्योर्तिलिंग आदि विषयों पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई है।

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