विक्रम संवत् 2067 ज्योतिष के आईने में

विक्रम संवत् 2067 ज्योतिष के आईने में  

विक्रम संवत् 2067 का आरंभ आगामी 15-16 मार्च को मध्य रात्रि 02 बजकर 32 मिनट पर मंगलवार को हो रहा है। इस समय धनु लग्न उदित है जिसकी कुंडली नीचे दी गई है। लग्न का स्वामी गुरु नीच राशिस्थ मंगल से दृष्ट है। मंगल अग्नि तत्व ग्रह है, जो नव वर्ष का राजा तथा मेघेश है। चतुर्थ सुख स्थान में चार ग्रहों का योग है, जो अच्छा नहीं है। चतुर्थ स्थान तथा इसमें स्थित चार ग्रहों पर दशमस्थ वक्री ग्रह शनि की दृष्टि है। गुरु और मंगल के बीच षडाष्टक योग है। इन योगों के फलस्वरूप बिहार, आसाम, महाराष्ट्र , उड़ीसा, झारखंड आदि राज्यों में भारी उपद्रव होना संभव है, जिसे कानून व्यवस्था द्वारा सुलझाना संभव नहीं हो पाएगा। इस वर्ष पुलिस, मिलिट्री आदि के उच्चाधिकारियों तथा राजनीतिज्ञों के घोटालों मंे फंसने की संभावना है। वे हिंसा के शिकार भी हो सकते हैं। कुछ प्रमुख नगरों और स्थलों की सुरक्षा को भी खतरा होगा। कुंडली में लग्नस्थ राहु पर वक्री कन्या राशिस्थ शनि का केंद्रीय प्रभाव है। अग्नि तत्व ग्रह मंगल पंचमेश होकर नीच राशिस्थ है। चतुर्थ भाव में स्थित ग्रहों का शनि से समसप्तक योग है। इस ग्रह स्थिति के परिणामस्वरूप वैश्विक तापमान में वृद्धि होने से कहीं भयंकर बाढ़, समुद्री तूफान, सूखे, संक्रामक बीमारियों आदि के कारण जन-मानस को स्वास्थ्य तथा अन्य विषम स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। राजनीतिक नेताओं मे वैमनस्यता व गतिरोध दिखाई देगा। राजनीतिक दलों में तालमेल की कमी तथा राजनीतिज्ञों में पदलोलुपता की भावना बढ़ेगी। महंगाई और बेरोजगारी के साथ-साथ भ्रष्टाचार भी बढ़ेगा। किसी विशिष्ट राजनीतिज्ञ की मृत्यु या सŸााच्युत होने से स्तब्धता की स्थिति बनेगी। शास्त्रों के अनुसार धनु लग्न का फल इस प्रकार है। धनुर्लग्ने तूŸारस्यां पूर्वस्यां च सुखम् नृणाम्। दुर्भिक्षं प्रबला वृष्टिर्मध्ये देशे सरोगता।। पश्चिमायां घृतं धान्यां समर्घं मास पंचकम्। दक्षिणस्यां सुखं लोके किंचित्पीड़ा चतुष्पदे।। पूर्वी और उŸारी देशों में वातावरण अनुकूल बनता दिखाई देगा, शासक प्रजाहित में नई घोषणाएं करेंगे। मध्य देशों में सुभिक्ष होगा परंतु प्रजा रोग-पीड़ा से दुःखी होगी। पश्चिम में घृत, धान्य आदि का उत्पादन बढ़ेगा, किंतु मंदी की स्थिति बनेगी। संवत् के प्रारंभ से 19 अप्रैल तक बुध और शुक्र दोनों पहले मीन में और फिर मेष राशि में रहेंगे। बुध 18 अप्रैल को वक्री होगा तथा 20 अप्रैल को दिन में 12 बजकर 36 मिनट पर वृष राशि में प्रवेश करेगा। उसकी यह स्थिति कहीं प्राकृतिक आपदा से हानि की स्थिति बनाएगा। इस वर्ष वैशाख अधिक मास है। वैशाख शुक्ल पक्ष (15 मई से 27 मई) मात्र 13 दिन का पक्ष होगा जो शास्त्रों के अनुसार जनता के लिए कष्टदायक होता है- ‘‘यदा च जायते पक्षस्त्रयोदश-दिनात्मकः। तदा कालो भवेद्घोरा मुण्डमालायुता मही।।’’ इस पक्ष के फलस्वरूप इस समय महंगाई बढ़ेगी, राजनीतिक पार्टियां एकदूसरे को दोषी ठहराएंगी। सीमा पर युद्ध का वातावरण बनने तथा भूकंप, तूफान आदि के कारण जन-धन की हानि हो सकती है। वहीं 13 दिन के इस पक्ष के कारण विशिष्ट व्यक्ति के निधन, किसी कारणवश शोक आदि की संभावना भी है। मिथुन के शुक्र (16 मई से 09 जून तक) तथा सिंह के मंगल (27 मई से 20 जुलाई) के कारण महंगाई बढ़ेगी जिससे जनता में भारी आक्रोश देखने को मिलेगा। 06 जुलाई को शुक्र सिंह राशि में आएगा और मंगल 27 मई से ही सिंह राशि में चल रहा होगा। 06 जुलाई को शुक्र अग्नि तत्व ग्रह मंगल के साथ होगा। इन योगों के फलस्वरूप वर्षा-पानी की कमी होगी जिससे फसलें सूख जाएंगी और कुछ प्रांतों में अकाल की स्थिति बनेगी। 21 जुलाई को शनि और मंगल का कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। 31 जुलाई को मंगल एवं शनि दोनों कन्या राशि पर समान अंशों (6 अंश) पर होंगे। एक राशि और समान अंश के कारण एक नक्षत्र संबंध बनेगा (शनि और मंगल की युति 21 जुलाई से 05 सितंबर तक)। इस अवधि में सीमाई प्रांतों में हथियारों, मादक द्रव्यों आदि की तस्करी बढ़ेगी, जिसके फलस्वरूप देश की आंतरिक स्थिति बिगड़ सकती है। हत्याकांड, आतंकी घटनाओं आदि की संभावना है, जिनके फलस्वरूप जन-धन की हानि हो सकती है। 23 जुलाई को 17 बजकर 33 मिनट पर गुरु वक्री होगा। 27 जुलाई से 24 अगस्त तक श्रावण मास रहेगा, जिसमें पांच मंगलवार आएंगे। अगस्त मास में शुक्र और शनि कन्या राशि में रहेंगे। फलस्वरूप एक तरफ जहां भूकंप, तूफान, प्राकृतिक प्रकोप, उग्रवादी घटनाओं की संभावना है वहीं दूसरी तरफ प्रतिष्ठित व्यक्ति या व्यक्तियों की हत्या या मृत्यु हो सकती है। 17 सितंबर को सूर्य कन्या राशि में प्रवेश कर शनि के साथ युति करेगा, जिसके फलस्वरूप प्रजा में शासकों के विरुद्ध रोष पैदा होगा, महंगाई चरम पर होगी। वर्षा की अधिक कमी होने से फसलंे बरबाद होंगी। इस साल भाद्रपद शुक्ला सप्तमी मंगलवार को 13 बजकर 41 मिनट तक अनुराधा नक्षत्र है। यह नक्षत्र पानी के लिए अशुभ है और इसके फलस्वरूप जलाशय बिना सूख जाते हैं। 20 अक्तूबर को मंगल वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा। शनि अपनी तृतीय दृष्टि से मंगल को देखगा और उसका यह दृष्टिसंबध 30 नवंबर तक रहेगा। 01 दिसंबर को मंगल धनु राशि में प्रवेश करेगा। 18 अक्तूबर को 14 बजकर 10 पर शनि का उदय और 22 अक्तूबर को 04 बजकर 40 मिनट पर शुक्र का पश्चिम में अस्त होगा - आश्विन माह शुक्ल पक्ष। कहा गया है- शुक्ल पक्षे यदा शुक्रः समुदेत्यस्तमेति वा राजपुत्र सहस्राणां मही पिवति शोणितम्।। शुक्ल पक्ष में शुक्र का अस्त होना युद्ध का द्योतक है। उसकी इस स्थिति के फलस्वरूप किसी देश की सीमा पर युद्ध का वातावरण या आंतरिक अशांति की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इस तरह इस वर्ष 20 अक्तूबर से 30 नवंबर के बीच उग्रवादी घटनाओं से नुकसान, किसी व्यक्ति के पद खाली होने, दुर्भिक्ष, भूकंप, तूफान, प्राकृतिक प्रकोप, यान दुर्घटना आदि के योग बनते हैं जिनके फलस्व्रूप अशांति और जन-धन की हानि की संभावना है। 01 दिसंबर को मंगल धनु राशि में राहु के साथ अंगारक योग बनाएगा। दोनों ग्रहों का यह योग 08 जनवरी 2011 तक रहेगा, जिसके फलस्वरूप पड़ोसी राष्ट्रों में होने वाले जन आंदोलनों का प्रभाव भारतीय राजनीति पर भी पड़ेगा। 04 जनवरी 2011 को खंडग्रास सूर्य ग्रहण होगा। 15 जनवरी 2011 को सूर्य और मंगल की युति होगी जो 13 फरवरी 2011 तक रहेगी। 26 जनवरी 2011 से शनि वक्री होगा। 16 फरवरी को पुनः मंगल और सूर्य की कुंभ राशि में युति होगी। इसी समय सूर्य और शनि का षडाष्टक योग होगा जो 14 मार्च तक चलेगा। फलस्वरूप महंगाई और बेराजगारी चरम पर होगी जबकि सीमाई प्रांतों में हिंसा की स्थिति बनेगी। 26 मार्च 2011 को मंगल मीन राशि में प्रवेश करेगा और कन्या राशि के वक्री शनि की उस पर दृष्ट होगी। गुरु ग्रह भी इस समय मीन राशि में ही होगा। गुरु और मंगल के इस अतिचारी योग के कारण सरकार महंगाई रोकने में असफल रहेगी, जिसके फलस्वरूप जन आंदोलन होंगे। विपक्ष कमजोर होगा और राजनीतिज्ञों में मतभेद बढ़ेंगे। इस तरह, विक्रम संवत् 2067 की ऊपर वर्णित ग्रह स्थिति के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि भारत देश को इस संवत् में अनेक समस्याओं से जूझना पड़ेगा, परंतु 02 मई 2010 से 01 नवंबर 2010 तक और पुनः 07 दिसंबर 2010 से साल के अंत तक गुरु स्वगृही राशि मीन में भ्रमण करेगा और भारत की प्रभाव राशि शनि पर दृष्टि रखेगा, जिसके फलस्वरूप भारत समस्याओं के बावजूद हर क्षेत्र में उन्नति करेगा। देश अणुशक्ति संपन्न होगा और विश्व की महाशक्ति के रूप में इसका प्रभुत्व बढ़ेगा।


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