ग्रह स्थिति एवं व्यापार

ग्रह स्थिति एवं व्यापार  

गोचर ग्रह परिवर्तन: इस मास ग्रहों का राशि परिवर्तन इस प्रकार होगा। सूर्य 17 अक्तूबर को शाम 4 बज कर 58 मिनट पर तुला राशि में प्रवेश करेगा। मंगल 14 अक्तूबर को रात 9 बजकर 49 मिनट पर तुला राशि में प्रवेश करेगा। बुध 24 अक्तूबर को शाम 5 बजकर 43 मिनट पर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा तथा 29 अक्तूबर को प्रातः 00 बजकर 48 मिनट पर वक्री गति में आएगा। गुरु ग्रह 27 अक्तूबर को रात 10 बजकर 19 मिनट पर वृश्चिक राशि में प्रवेश कर जाएगा। शुक्र 5 अक्तूबर को प्रातः 10 बज कर 30 मिनट पर अस्त होगा तथा 19 अक्तूबर को शाम 7 बजकर 35 मिनट पर तुला राशि में प्रवेश करेगा। राहु 12 अक्तूबर को प्रातः 8 बजकर 05 मिनट पर कुंभ राशि में प्रवेश करेगा। केतु 12 अक्तूबर को प्रातः 8 बजकर 05 मिनट पर सिंह राशि में प्रवेश करेगा। शेष ग्रह शनि, नेप्च्यून और यूरेनस की स्थिति पूर्ववत ही रहेगी। गोचर फल विचार: मासारंभ वाले दिन अर्थात 1 अक्तूबर को रविवार है और इस मास में पांच रविवार आएंगे। यह अशांति का सूचक है। राजनीतिज्ञ परस्पर मतभेदों को और बढ़ावा देंगे। आपसी वैमनस्य तथा प्राकृतिक प्रकोपों इत्यादि से और कहीं अग्निकांड जैसी घटनाओं के कारण जनमानस में भय का वातावरण व्याप्त रहेगा। कहीं दुर्भिक्ष तथा कहीं सत्ता का परिवर्तन हो जाना संभव है। ‘‘यत्र मासे रविवारा जायते पंच संततम। दुर्भिक्ष छत्रभंगः स्यातदास्ते च मध्यभ्याम।’’ साथ ही इस मास में पांच सोमवार भी आएंगे जो ऊपर वर्णित फलों में कुछ न्यूनता लाकर सुख-शांति के प्रयासों में वृद्धि करेंगे। इसके फलस्वरूप शासक वर्ग तथा जनता में सहयोग बना रहेगा। यह स्थिति धन धान्य के लिए समृद्धिदायक है: ‘‘सोमस्य पंचवारास्तु यत्र मासे भवंतिहि। धन-धान्य समृद्धि स्यात सुखं भवति सर्वदा।।’’ साथ ही इस मास में पांच मंगलवार भी आएंगे। इनका फल अशुभता का प्रतीक है। इस स्थिति के फलस्वरूप प्राकृतिक प्रकोप, यान दुर्घटना, अग्निकांड इत्यादि घटनाओं में वृद्धि होने की संभावना है। सीमाओं पर पुनः युद्ध के काले बादल उमड़ सकते हैं। तनावपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए पूर्व से चल रही शांति वार्ताओं और प्रयासों को ठेस पहुंच सकती है। ‘‘यत्र मासे महीसूनो जायते पंच वासराः रक्तेन पूरिता पृथ्वी छत्रभंगस्तदा भवेत।’’ मासारंभ में ही राहु, सूर्य तथा मंगल का समसप्तक योग में बने रहना उपद्रवकारी घटनाओं में वृद्धिकारक है। 12 अक्तूबर को राहु का कुंभ राशि में प्रवेश कर सूर्य और मंगल से षडाष्टक योग में आना देश के विशिष्ट व्यक्तियों तथा राजनीतिज्ञों के लिए कष्टकारक है। साथ ही यह कहीं दुर्भिक्ष की स्थिति भी पैदा कर सकता है। वहीं देश की सरहदों पर पुनः युद्ध की स्थिति उत्पन्न कर सकता है। राहु पर गुरु की पंचम दृष्टि प्रधान नेताओं के हस्तक्षेप से बचाव का कार्य भी करेगी। 14 अक्तूबर को तुला राशि में मंगल ग्रह का प्रवेश पूर्व से चल रही शांति वार्ताओं को ठेस पहुंचा सकता है। 19 अक्तूबर को शुक्र का भी तुला राशि में आ जाना तथा इस राशि पर पंचग्रही योग बनना अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में वृद्धिदायक है। 21 अक्तूबर को इस वर्ष दीपावली का आना दैनिक उपयोग की वस्तुओं एवं धातुओं में तेजी का सूचक है। 27 अक्तूबर को गुरु का वृश्चिक राशि में प्रवेश उपद्रवकारी व उग्रवादी घटनाओं में वृद्धि कर सकता है। सोना व चांदी: मासारंभ में 2 अक्तूबर को बुध का स्वाति नक्षत्र में प्रवेश कर शतभिषा नक्षत्र को सर्वतोभद्रचक्र द्वारा वेधना सोने व चांदी में तेजी का सूचक है। 3 अक्तूबर को शुक्र का हस्त नक्षत्र में प्रवेश कर उ. भा. नक्षत्र को वेधना चांदी में मंदे का योग बनाएगा। 4 अक्तूबर को मंगल का चित्रा नक्षत्र में प्रवेश कर पू. भा. नक्षत्र को वेधने लगना सोने की तेजी को और बढ़ा सकता है। 5 अक्तूबर को शुक्र का अस्त होना भी बजार की तेजी को बनाए रखेगा। 10 अक्तूबर को सूर्य का चित्रा नक्षत्र में प्रवेश कर मृगशिरा, मूला और पू. भानक्षत्रों को वेधना बाजारों की पूर्व की तेजी को और बढ़ा सकता है। 12 अक्तूबर को राहु कुंभ राशि में प्रवेश करेगा और मंगल से षडाष्टक योग बनाएगा। यह योग बाजार की तेजी रोक कर मंदे की लहर उत्पन्न कर सकता है। 13 अक्तूबर को बुध का विशाखा नक्षत्र में प्रवेश करके धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना बाजार के पूर्व रुख को और आगे ले जाएगा। 14 अक्तूबर को शुक्र का चित्रा नक्षत्र में प्रवेश कर पू. भा. नक्षत्र को वेधना तथा मंगल का तुला राशि में प्रवेश कर बुध व गुरु से राशि संबंध बनाना बाजार में उतार-चढ़ाव अधिक करेगा। 17 अक्तूबर को सूर्य भी तुला राशि में प्रवेश कर मंगल, बुध व गुरु से राशि संबंध बनाएगा। इस योग में सोने व चांदी में कुछ तेजी का रुझान बनेगा। 19 अक्तूबर को शुक्र भी इसी राशि में प्रवेश कर मंगल, सूर्य, बुध और गुरु के साथ पंचग्रही योग बनाएगा। शुक्र के संबंध से बाजार में बदलाव आएगा अर्थात बाजार में मंदे की लहर उत्पन्न हो सकती है। 24 अक्तूबर को सूर्य का स्वाति नक्षत्र में प्रवेश तथा इससे पूर्व मंगल व शुक्र का भी इसी राशि में रहना तथा शतभिषा नक्षत्र को वेधना भी बाजार में मंदा ही दर्शाता है। इसी दिन बुध का वृश्चिक राशि में आना तथा चंद्र दर्शन होना भी मंदे का सूचक है। 27 अक्तूबर को गुरु का वृश्चिक राशि में प्रवेश कर बुध के साथ राशि संबंध बनाना बाजारों में मंदे का संकेत देता है। 29 अक्तूबर को बुध का वक्री होना बाजार में कुछ बदलाव लाकर तेजी का वातावरण बनाएगा। गुड़ व खांड: मासारंभ वाले दिन 2 अक्तूबर को बुध का स्वाति नक्षत्र में प्रवेश कर शतभिषा नक्षत्र को वेधना गुड़ व खांड में तेजी का ही सूचक है। 3 अक्तूबर को शुक्र का हस्त नक्षत्र में प्रवेश कर उत्तर भाद्रपद नक्षत्र को वेधना खांड के बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति उत्पन्न कर सकता है। 4 अक्तूबर को मंगल का चित्रा नक्षत्र में प्रवेश कर पूर्व भाद्रपद नक्षत्र को वेधना गुड़ में तेजी का सूचक है। 5 अक्तूबर को शुक्र के अस्त हो जाने से खांड में मंदे का रुख आ सकता है। 10 अक्तूबर को सूर्य का चित्रा नक्षत्र में आकर मृगशिरा, मूला व पूर्व भाद्रपद को वेधने लगना गुड़ व खांड के बाजार में तेजी की लहर उत्पन्न करेगा। 12 अक्तूबर को राहु का कुंभ राशि में प्रवेश कर मंगल के साथ षडाष्टक योग में आना भी तेजी का सूचक है। 13 अक्तूबर को बुध का विशाखा नक्षत्र में प्रवेश कर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना खांड के बाजार में पुनः मंदे की स्थिति उत्पन्न कर सकता है। 14 अक्तूबर को शुक्र का भी चित्रा नक्षत्र में प्रवेश कर पूर्व भाद्रपद नक्षत्र को वेधना तथा इसी दिन मंगल का तुला राशि में प्रवेश कर गुरु के साथ संबंध बनाना गुड़ व खांड में तेजी की लहर का सूचक है। 17 अक्तूबर को सूर्य ग्रह तुला राशि में प्रवेश कर मंगल व गुरु के साथ राशि संबंध बनाएगा। यह योग भी बाजार में तेजी के और ऊपर जाने का संकेत देता है। तुला की संक्रांति का मंगलवार को 30 मुहर्ती होना भी बजारों में तेजी का ही योग दर्शाता है। 19 अक्तूबर को शुक्र का तुला राशि में प्रवेश कर सूर्य, मंगल, बुध व गुरु के साथ मिलकर पंचग्रही योग बनाना गुड़ व खांड़ में तेजी का वातावरण बनाए रखेगा। 24 अक्तूबर को सूर्य ग्रह स्वाति नक्षत्र में प्रवेश कर रोहिणी, ज्येष्ठा व शतभिषा नक्षत्रों को वेधने लगेगा। यह योग बाजार में उतार-चढ़ाव तो लाएगा लेकिन इसी दिन बुध का वृश्चिक राशि में प्रवेश तथा मंगलवार को चंद्र दर्शन होना बाजार में तेजी का सूचक है। 27 अक्तूबर को गुरु का वृश्चिक राशि में प्रवेश कर बुध के साथ राशि संबंध बनाना बाजार में बदलाव ला सकता है। 29 अक्तूबर को बुध का वक्री होना गुड़ व खांड के बाजार में तेजी का सूचक है। अनाज व दालवान: मासारंभ में 2 अक्तूबर को बुध का स्वाति नक्षत्र में प्रवेश कर शतभिषा नक्षत्र को वेध में लेना गेहूं, ज्वार, चना इत्यादि अनाजवान के बाजार में तेजी का कारक है। 3 अक्तूबर को शुक्र का हस्त नक्षत्र में प्रवेश कर उत्तर भादपद्र नक्षत्र को वेधना मूंग, मोठ इत्यादि दालवान में अस्थिरता अर्थात उतार-चढ़ाव अधिक करेगा। 4 अक्तूबर को मंगल का चित्रा नक्षत्र में प्रवेश कर पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र को वेध में लेना गेहूं, चना, ज्वार इत्यादि अनाजों में तेजी की सूचना दे रहा है। 5 अक्तूबर को शुक्र अस्त हो जाएगा। इससे मूंग, मोठ, उड़द, अरहर इत्यादि दालों में मंदे का ही योग बना रह सकता है। किंतु अनाजों का बाजार पूर्ववत ही रहेगा। 10 अक्तूबर को सूर्य ग्रह चित्रा नक्षत्र में प्रवेश कर मृगशिरा, मूला और पूर्वा भाद्रपद नक्षत्रों को वेधने लगेगा। यह योग गेहूं इत्यादि अनाजों में पूर्व से चल रही तेजी के बने रहने का संकेत देता है। 12 अक्तूबर को राहु का कुंभ राशि में प्रवेश कर मंगल से षडाष्टक योग में आना दालवानों में तो तेजी का ही सूचक है। यह योग अनाजों के बाजार में भी तेजी का संकेत देता है। 13 अक्तूबर को बुध का विशाखा नक्षत्र में आकर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधने लगना अनाजों के बाजार में बदलाव लाएगा अर्थात उसे मंदे की तरफ ले जाएगा। 14 अक्तूबर को शुक्र का चित्रा नक्षत्र में प्रवेश कर पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र को वेधने लगना तथा इसी दिन मंगल का भी तुला राशि में प्रवेश करना अनाजों तथा दालवान के बाजार में तेजी का ही संकेत देता है। 17 अक्तूबर को सूर्य का भी तुला राशि में प्रवेश कर मंगल व गुरु के साथ राशि संबंध बनाना तथा इसी दिन कार्तिक की संक्रांति का 30 मुहूर्ती होना गेहूं, जौ इत्यादि अनाजों में तथा मूंग, मोठ, इत्यादि दालवान में तेजी का ही सूचक है। 19 अक्तूबर को शुक्र का तुला राशि में प्रवेश कर सूर्य, मंगल, बुध व गुरु के साथ मिलकर पंचग्रही योग बनाना पूर्व से चल रही तेजी के और आगे जाने का संकेत देता है। 21 अक्तूबर शनिवार को दीपावली का आना भी तेजी ही दर्शाता है। 24 अक्तूबर को सूर्य का स्वाति नक्षत्र में आकर रोहिणी, ज्येष्ठा, व शतभिषा नक्षत्रों को वेधना अनाजों की पूर्व से चल रही लहर में बदलाव देकर मंदे की तरफ ले जाएगा। इसी दिन बुध का भी वृश्चिक राशि में आना दालवान में भी मंदे का संकेत देता है। 27 अक्तूबर को गुरु का वृश्चिक राशि में आकर बुध के साथ राशि संबंध बनाना अनाजवान व दालवान में मंदा ही दर्शाता है। 29 अक्तूबर को बुध का वक्री गति में आने से गेहूं, जौ इत्यादि अनाजों में मंदे की लहर बनी रह सकती है। इसी दिन नेप्च्यून ग्रह का मार्गी गति में आना भी दालवान में मंदे का ही वातावरण बनाएगा। घी व तेलवान: मासारंभ में 2 अक्तूबर को बुध का स्वाति नक्षत्र में प्रवेश कर शतभिषा नक्षत्र को वेधना घी के बाजार में तेजी का सूचक है। 3 अक्तूबर को शुक्र का हस्त नक्षत्र में प्रवेश कर उत्तर भाद्रपद नक्षत्र को वेधना तेलों के बाजार में अस्थिरता अर्थात उतार-चढ़ाव पैदा कर सकता है। 4 अक्तूबर को मंगल का चित्रा नक्षत्र में प्रवेश कर पूर्व भाद्रपद नक्षत्र को वेधना तेलों के बाजार में तेजी लाएगा। 5 अक्तूर को शुक्र का अस्त होना घी के बाजार में तेजी का संकेत देता है। 10 अक्तूबर को सूर्य का चित्रा नक्षत्र में प्रवेश कर मृगशिरा, मूला व पूर्व भाद्रपद नक्षत्रों को वेधना तेलों में तेजी का माहौल पुनः पैदा करेगा। 12 अक्तूबर को राहु का कुंभ राशि में प्रवेश भी तेजीदायक है। 14 अक्तूबर को शुक्र का चित्रा नक्षत्र में प्रवेश कर पूर्व भाद्रपद नक्षत्र को वेधना घी में तेजी का संकेत देता है। इसी दिन मंगल ग्रह तुला राशि में प्रवेश कर बुध व गुरु के साथ राशि संबंध बनाएगा। यह योग भी तेलों में तेजी के और आगे जाने का संकेत देता है। 17 अक्तूबर को सूर्य का तुला राशि में प्रवेश कर मंगल, बुध व गुरु के साथ राशि संबंध बनाना तथा इसी दिन तुला की संक्रांति का मंगलवार को 30 मुहूर्ती होना बाजार में तेजी की लहर को और बढ़ा सकता है। 19 अक्तूबर को शुक्र तुला राशि में प्रवेश कर सूर्य, मंगल, बुध व गुरु के साथ पंचग्रही योग बनाएगा जो बाजार की पूर्व से चल रही तेजी के और ऊपर जाने का सूचक है। 24 अक्तूबर को सूर्य का स्वाति नक्षत्र में प्रवेश कर शतभिषा नक्षत्र को वेधने लगना तथा इसी दिन मंगल का भी स्वाति नक्षत्र में आकर शतभिषा को वेधना और बुध का वृश्चिक राशि में प्रवेश करना ये सभी योग घी के बाजार में तो मंदे का माहौल उत्पन्न कर सकते हैं लेकिन तेलों के बाजार को पूर्ववत रखेंगे। 27 अक्तूबर को गुरु का वृश्चिक राशि में प्रवेश कर बुध के साथ राशि संबंध बनाना घी के बाजार में और मंदे का सूचक है। यह योग तेलों के बाजार में भी मंदे का वातावरण उत्पन्न करेगा। 29 अक्तूबर को बुध ग्रह वक्री होगा। यह योग घी के बाजार में कुछ तेजी ला सकता है। इसी दिन नेप्च्यून ग्रह का मार्गी होना तेलों में मंदे की सूचना दे रहा है। उपर्युक्त फलादेश पूरी तरह ग्रह स्थिति पर आधारित है। पाठकों का बेहतर मार्गदर्शन ही इसका मुख्य उद्देश्य है। कोई निर्णय लेने से पहले निवेशक को उन अन्य संभावित कारणों पर भी ध्यान देना चाहिए, जो बाजार को प्रभावित करते हैं। कृपया याद रखें कि व्यापारी की सट्टे की प्रवृत्ति और निर्णय लेने की शक्ति में कमी तथा भाग्यहीनता के कारण होने वाले नुकसान के लिए लेखक, संपादक एवं प्रकाशक जिम्मेवार नहीं हैं।


पराविद्याओं को समर्पित सर्वश्रेष्ठ मासिक ज्योतिष पत्रिका  अकतूबर 2006

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