ग्रह स्थिति एवं व्यापार

ग्रह स्थिति एवं व्यापार  

गोचर ग्रह स्थिति: मासारंभ में सूर्य मकर में, चंद्र कर्क में, मंगल धनु में, बुध कुंभ में, बृहस्पति वृश्चिक में, शुक्र कुंभ में, शनि कर्क में, राहु कुंभ में, केतु सिंह में, नेप्च्यून मकर में और यूरेनस कुंभ राशि में होंगे। गोचर ग्रह परिवर्तन: इस मास ग्रहों का राशि परिवर्तन इस प्रकार होगा। सूर्य 13 फरवरी को प्रातः 7 बजकर 5 मिनट पर कुंभ राशि में प्रवेश करेगा। मंगल 18 फरवरी को प्रातः 7 बजे मकर राशि में प्रवेश करेगा। बुध 14 फरवरी को प्रातः 10 बजकर 6 मिनट पर वक्री गति में आएगा और 16 फरवरी को प्रातः 6 बजकर 5 मिनट पर अस्त होगा। शुक्र 16 फरवरी को शाम 4 बजकर 20 मिनट पर मीन राशि में प्रवेश करेगा। यूरेनस 21 फरवरी को 4 बजकर 41 मिनट पर पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेगा। शेष ग्रहों बृहस्पति, शनि, राहु, केतु और नेप्च्यून की स्थिति पूर्ववत ही रहेगी। गोचर फल विचार: मासारंभ वाले दिन अर्थात 1 फरवरी को गुरुवार है और इस मास में चार गुरुवार के साथ-साथ सभी वार चार-चार ही आएंगे। फलस्वरूप फल श्रेष्ठ नजर नहीं आता। प्राकृतिक प्रकोपों और भू-स्खलन इत्यादि घटनाओं के कारण जनमानस के लिए यह मास पीड़ाकारक रहेगा। दैनिक उपयोग की वस्तुओं में महंगाई के अत्यधिक बढ़ने के आसार हैं। इस पर अंकुश लगाने के लिए शासकों को अनेक महत्वपूर्ण कदम भी उठाने पड़ सकते हैं। मासारंभ में ही शनि का वक्री गति में रहते हुए मंगल के साथ षडाष्टक योग में बने रहने के कारण पश्चिमी और मुस्लिम राष्ट्रों के लिए स्थिति भयानक रहेगी। रक्तमय क्रांति के कारण कहीं-कहीं अशांति का वातावरण पैदा हो सकता है। उत्तर-पूर्व प्रांतों में सत्ता परिवर्तन व राजनैतिक उथल पुथल भी आ सकती है। सूर्य व शनि के समसप्तक योग के कारण भारतीय सीमाओं पर अशांति का वातावरण पैदा होने की संभावना है। यह योग शासक वर्ग के लिए अग्नि परीक्षा और सूझ-बूझ से कार्य करने वाला होगा। 13 फरवरी को सूर्य का कुंभ राशि में आकर राहु के साथ राशि संबंध बनाने तथा शनि से षडाष्टक योग में आ जाने के कारण प्राकृतिक प्रकोप हो सकते हैं। धन-जन की हानि की संभावना है। यह योग सीमाओं पर पुनः युद्ध का वातावरण पैदा कर सकता है। फलस्वरूप पैदा कर सकता है। बृहस्पति के केंद्र में रहने के कारण वरिष्ठ व्यक्तियों के हस्तक्षेप से पुनः शांति का वातावरण बन सकता है। 16 फरवरी को शुक्र का मीन राशि में आकर शनि से नवपंचम योग बनाना भारत की आर्थिक स्थिति में सुधार लाएगा। 18 फरवरी को मंगल का मकर राशि में आकर शनि से समसप्तक योग बनाने से कहीं-कहीं वायु दुर्घटनाओं इत्यादि की भारी संभावना है, जिससे भारी हानि हो सकती है। यह योग अग्निकांड, भू-स्खलन और प्राकृतिक प्रकोपों से हानि का योग बनाएगा। इस योग में आतंकवाद को बढ़ावा मिल सकता है। सोना चांदी: मासारंभ में 2 फरवरी को बुध का शतभिषा नक्षत्र में आकर स्वाति नक्षत्र को वेधने लगना सोने व चांदी में मंदे का संकेत देता है। 6 फरवरी को सूर्य का धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश कर अश्लेषा, विशाखा व श्रवण नक्षत्रों को वेधने लगना बाजार में बदलाव लाकर तेजी के रुख में ले जाएगा। 8 फरवरी को शुक्र का पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र पर आकर चित्रा नक्षत्र को वेधने लगना सोने के बाजार को तो पूर्ववत रखेगा किंतु चांदी को तेजी की ओर ले जाएगा। 13 फरवरी को सूर्य का कुंभ राशि में आकर राहु, बुध और शुक्र के साथ राशि संबंध बना लेना भी बाजारों की तेजी को बरकरार रखेगा। इसी दिन मंगल का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में आकर मृगशिरा नक्षत्र को वेधने लगना सोने में चल रही तेजी पर अंकुश लगा सकता है। 14 फरवरी को बुध का वक्री गति में आना बाजार में मंदे के आसार पैदा करेगा। 15 फरवरी को बुध का अस्त होना बाजार के मंदे को और बढ़ा सकता है। 16 फरवरी को शुक्र का मीन राशि में प्रवेश तथा बृहस्पति की पंचम दृष्टि से पूर्ण दृष्टि होने से चांदी में मंदे की लहर और अधिक बढ़ेगी। 17 फरवरी को मंगल का मकर राशि में प्रवेश और शनि से समसप्तक योग में होने बाजारों में पुनः बदलाव आ सकता है अर्थात सोने व चांदी में मंदे की जगह तेजी आ सकती है। यह तेजी गुरु की शनि पर पूर्ण दृष्टि के कारण भी आ सकती है। 19 फरवरी सोमवार को चंद्र दर्शन बाजार में मंदा ही दर्शाता है। इसी दिन शुक्र का उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश कर हस्त नक्षत्र को वेधना चांदी में मंदी दर्शाता है तथा इसी दिन सूर्य का शतभिषा नक्षत्र में प्रवेश होना और पुष्य, स्वाति व अभिजित नक्षत्रों को वेधना सोने में तेजी का योग बनाए रखेगा। 23 फरवरी को वक्री गति के शनि का अश्लेषा नक्षत्र के तीसरे चरण में आना सोने में तेजी के संकेत देता है। 24 फरवरी को गुरु का ज्येष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण में आना सोने की तेजी को और बढ़ा सकता है। 26 फरवरी को बुध का वक्री गति की चाल चलते हुए धनिष्ठा नक्षत्र में आकर विशाखा नक्षत्र को वेधना बाजारों में मंदे की लहर बनाएगा। गुड़ व खांड: मासारंभ में 2 फरवरी को बुध का शतभिषा नक्षत्र में आकर स्वाति नक्षत्र को वेधने लगना गुड़ में तेजी का सूचक है। 6 फरवरी को सूर्य का धनिष्ठा नक्षत्र में आकर अश्लेषा, विशाखा व श्रवण नक्षत्रों को वेधना खांड के बाजार में बदलाव अर्थात मंदे का सूचक है। 13 फरवरी को सूर्य कुंभ राशि में आकर बुध, शुक्र व राहु के साथ अपना राशि संबंध बनाएगा। यह योग बाजारों में मंदे की लहर को और आगे बढ़ा सकता है। लेकिन इसी दिन मंगल का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में आकर मृगशिरा नक्षत्र को वेधना गुड़ में मंदा लाने के बाद फिर तेजी की तरफ ले जाएगा। 14 फरवरी को बुध का वक्री होना गुड़ की तेजी को और बढ़ा सकता है। इसी दिन राहु का भी पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम पाद में प्रवेश खांड में भी तेजी का वातावरण बनाएगा। 15 फरवरी को बुध का अस्त होना बाजारों में ठहराव की स्थिति बनाएगा। 16 फरवरी को शुक्र का मीन राशि में आकर गुरु की पंचम पूर्ण दृष्टि में आना गुड़ व खांड में पुनः मंदे का वातावरण पैदा करेगा। 17 फरवरी को मंगल का मकर राशि में आकर शनि से पूर्ण दृष्टित होना बाजार को पुनः तेजी की तरफ ले जा सकता है। शनि ग्रह बृहस्पति से दृष्टित है। अतः खांड में भी तेजी आएगी। 19 फरवरी को शुक्र का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में आकर हस्त नक्षत्र को वेधने लगना खांड में मंदे के संकेत देता है। इसी दिन सूर्य का शतभिषा नक्षत्र में आकर स्वाति को वेधना गुड़ में भी मंदे का ही वातावरण पैदा करेगा। 23 फरवरी को गुरु ग्रह का ज्येष्ठा नक्षत्र में तीसरे पाद पर आना बाजार में मंदे का ही सूचक है। 24 फरवरी को वक्री गति के शनि का अश्लेषा नक्षत्र के तीसरे चरण में आना बाजार में कुछ बदलाव ला सकता है। 26 फरवरी को धनिष्ठा नक्षत्र में बुध का प्रवेश कर विशाखा नक्षत्र को वेधना बाजारों में मंदे का रुझान बनाएगा। अनाज तथा दालवान: मासारंभ में 2 फरवरी को बुध का शतभिषा नक्षत्र में आकर स्वाति नक्षत्र का वेध करना अनाज व दालवान में तेजी का सूचक है। 6 फरवरी को सूर्य का धनिष्ठा नक्षत्र में आकर अश्लेषा, विशाखा व श्रवण नक्षत्रों को वेधना गेहूं, जौ, चना इत्यादि अनाजों में चल रही तेजी को और बढ़ा सकता है। दालवान में भी यह योग तेजी ही रखेगा। 8 फरवरी को शुक्र का पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में आकर चित्रा नक्षत्र को वेधने लगना गेहूं इत्यादि अनाजों में बदलाव ला सकता है अर्थात बाजार को मंदे की तरफ ले जाएगा। शुक्र का कुंभ राशि में बुध व राहु के साथ राशि संबंध मूंग, मौठ इत्यादि दालों में भी मंदा ही रखेगा। लेकिन उड़द एवं अरहर में तेजी के ही संकेत देता है। 13 फरवरी को सूर्य का कुंभ राशि में प्रवेश कर बुध, शुक्र और राहु के साथ राशि संबंध बनाना अनाजों में पुनः तेजी की लहर पैदा करेगा। इसी दिन मंगल का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में आकर मृगशिरा नक्षत्र को वेधने लगना गेहूं, चना, जौ इत्यादि अनाजों में तेजी का सूचक है। यह योग मूंग, मौठ, मसूर इत्यादि दालवान में भी तेजी लाएगा। 14 फरवरी को बुध का वक्री गति में आना अनाज व दालवान में चल रहे रुझान में बदलाव लाएगा। किंतु इसी दिन राहु का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में आकर चित्रा को वेध में लेने के कारण बाजार में तेजी बरकरार रहेगी। 15 फरवरी को बुध अस्त होगा। यह योग भी अनाजवान में तेजी ही रखेगा। 16 फरवरी को शुक्र का मीन राशि में आकर बृहस्पति से पूर्ण दृष्टित होना अनाजों में मंदे का कारक है। 17 फरवरी को मंगल का मकर राशि में आकर शनि के साथ समसप्तक योग बनाना भी अनाजों में मंदा ही रखेगा। 19 फरवरी को शुक्र का उत्तराभादपद नक्षत्र में आकर हस्त नक्षत्र को वेधना भी अनाजों में मंदे के ही संकेत देता है। इसी दिन सूर्य का भी शतभिषा नक्षत्र में प्रवेश कर स्वाति नक्षत्र को वेधना मूंग, मौठ, अरहर इत्यादि में मंदे का योग बनाएगा। 23 फरवरी को बृहस्पति का ज्येष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण में प्रवेश होना भी अनाजों के बाजार में मंदे का रुख बनाए रखेगा। 24 फरवरी को शनि का अश्लेषा के तीसरे चरण में आना दालवान को तेजी के वातावरण में ले जाएगा। 26 फरवरी को बुध का धनिष्ठा नक्षत्र में आकर विशाखा नक्षत्र को वेधने लगना अनाजों व दालवान में पुनः तेजी का वातावरण पैदा करेगा। तेलवान व घी: मासारंभ में 2 फरवरी को बुध का शतभिषा नक्षत्र में आकर स्वाति नक्षत्र को वेधने लगना तेलों में तेजी का सूचक है। 6 फरवरी के सूर्य का धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश कर अश्लेषा, विशाखा व श्रवण नक्षत्रों को वेधने लगना तेलों में तेजी को और आगे ले जा सकता है। किंतु घी को मंदे के रुख में ही रखेगा। 8 फरवरी को शुक्र का पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में आकर चित्रा को वेधने लगना घी में बदलाव लाकर तेजी की तरफ ले जाएगा। शुक्र का कुंभ राशि में बुध व राहु के साथ संबंध बनाना तेलों को तेजी की तरफ ले जाएगा। 13 फरवरी को सूर्य का कुंभ राशि में प्रवेश कर बुध, शुक्र व राहु के साथ राशि संबंध बनाकर चर्तुग्रही योग बनाना तेलवान व घी के बाजार में चल रही तेजी को बरकरार रखेगा। इसी दिन मंगल का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में आकर मृगशिरा नक्षत्र को वेधने लगना घी की तेजी को और आगे ले जा सकता है। 14 फरवरी को बुध का वक्री होना भी घी के बाजार की तेजी को और बढ़ा सकता है। यह योग तेलवान के बाजार में भी तेजी ही दर्शा रहा है। 15 फरवरी को बुध का अस्त होना घी के बाजार में ठहराव पैदा करेगा। 16 फरवरी को शुक्र का मीन राशि में आकर बृहस्पति से पूर्ण दृष्टित होना घी में मंदे का वातावरण बनाएगा। बृहस्पति शनि को भी पूर्ण दृष्टि से देख रहा है जो तेलवान में भी मंदे के ही संकेत देता है। 17 फरवरी को मंगल का मकर राशि में प्रवेश कर शनि से समसप्तक योग में आ जाना बाजार में बदलाव लाएगा। अर्थात तेलवान व घी में तेजी का वातावरण पैदा करेगा। 19 फरवरी को शुक्र का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में आकर हस्त नक्षत्र को वेधने लगना घी में पुनः मंदे का वातावरण पैदा करेगा। इसी दिन सूर्य का भी शतभिषा नक्षत्र में आकर स्वाति नक्षत्र को वेधना तेलों में भी मंदे के संकेत देता है। 23 फरवरी को बृहस्पति का ज्येष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण में प्रवेश होना बाजार में उतार-चढ़ाव अधिक देता हुआ मंदे का वातावरण पैदा करेगा। 24 फरवरी को शनि का अश्लेषा नक्षत्र के तीसरे चरण में पुनः आ जाना तेलों में मंदे का सूचक है। 26 फरवरी को बुध का धनिष्ठा में प्रवेश कर विशाखा नक्षत्र को वेधना तेलों में तेजी लेकिन घी में मंदे का वातावरण उत्पन्न करेगा।


रुद्राक्ष एवं आध्यात्मिक वास्तु विशेषांक   फ़रवरी 2007

प्रकृति के कोष से हमें कई जिवानोपर्यांत वस्तुएं प्राप्त होती है. ऐसी ही वस्तुओं में एक है रुद्राक्ष. रुद्राक्ष का आध्यात्मिक और औषधीय महत्त्व बहुत है. शुद्ध रुद्राक्ष की पहचान कैसे की जाए? रुद्राक्ष का सम्बन्ध भगवान शिव से कैसे जुडा हुआ हैं? रुद्राक्ष धारण

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