ग्रह स्थिति एवं व्यापार

ग्रह स्थिति एवं व्यापार  

गोचर ग्रह परिवर्तन: इस मासं ग्रहों का राशि परिवर्तन इस प्रकार होगा। सूर्य 16 नवंबर को शाम के 4 बजकर 45 मिनट पर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा। मंगल 27 नवंबर को शाम 7 बजकर 45 मिनट पर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा। बुध 1 नवंबर को रात्रि 10 बजकर 43 मिनट पर तुला राशि में प्रवेश करेगा तथा 3 नवंबर को प्रातः 00 बजकर 23 मिनट पर अस्त होगा, 15 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 45 मिनट पर उदय होगा और 18 नवंबर को प्रातः 5 बजकर 52 मिनट पर मार्गी गति में आएगा। गुरु 7 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 51 मिनट पर अस्त होगा। शुक्र ग्रह 12 नवंबर को शाम के 5 बजकर 55 मिनट पर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा तथा 28 नवंबर को दोपहर 11 बजकर 20 मिनट पर उदय होगा। शनि ग्रह 1 नवंबर को प्रातः 7 बजकर 12 मिनट पर सिंह राशि में प्रवेश कर जाएगा। शेष ग्रह राहु, केतु, नेप्च्यून और यूरेनस की स्थिति पूर्वत रहेगी। गोचर फल विचार: मासारंभ वाले दिन अर्थात 1 नवंबर को बुधवार है और इस मास पांच बुधवार आएंगे। यह स्थिति जनमानस के लिए सुख समृद्धि सुभिक्ष तथा धन धान्य की वृद्धि का कारक है। यह योग बुद्धिजीवियों की प्रतिष्ठा को बढ़ावा और चल रहे बौद्धिक कार्यों में विशेष उन्नति के संकेत देता है। यह देश में नए-नए आविष्कारों और अनुसंधानों में सफलता का सूचक है। यह अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक स्थितियों तथा व्यापार मंडल में सुधार तथा वृद्धि के संकेत भी हैं। ‘‘बुधस्य पंचवाराश्चेऽयते च निरंतरम। प्रजानां सुखमत्यंतं सुभिक्षं च प्रजायते।’’ साथ ही इस मास पांच बृहस्पतिवारों का भी आना पश्चिमी राष्ट्रों के लिए नेष्ट फलदायक है। यह योग रोग एवं शोक से जनमानस को पीड़ित कर सकता है। जन साधारण को जटिल समस्याओं से जूझना पड़ेगा। ‘‘यत्र मासे पंचवाराः जायन्ते च बृहस्पतेः विग्रहः पश्चिमे देशे खड्ग युद्धं च जायते।’’ मासारंभ में ही शनि का 1 नवंबर को सिंह राशि में प्रवेश कर जाना और तुला राशि स्थित सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र को देखना अनेक प्रकार की विकट घटनाओं के संकेत देता है। यह योग पूर्व से चल रही दैनिक उपयोगी वस्तुओं की महंगाई को और बढ़ाएगा। राजनीतिक उथल-पुथल भी लाएगा। यह योग उपद्रवकारी घटनाओं में वृद्धि करेगा। यह खड़ी फसलों के लिए हानिकारक होगा। 7 नवंबर को गुरु का अस्त हो जाना अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न कर जनमानस को पीड़ा पहुंचाएगा। 12 नवंबर को वृश्चिक राशि में गुरु व शुक्र का राशि संबंध बनना सीमाओं पर युद्धमय वातावरण उत्पन्न कर सकता है। 16 नवंबर को सूर्य का भी वृश्चिक राशि में प्रवेश कर गुरु व शुक्र के साथ योग बनाना पूर्वाेŸार स्थित देशों और प्रदेशों की राजनीतिक समस्याओं में वृद्धि करेगा। यह योग इन देशों के शासकों के अग्नि परीक्षा से गुजरने के संकेत देता है। 18 नवंबर को बुध भी उदय हो जाएगा। इसका मंगल के साथ रहना जन मानस के लिए हानिकारक है। सोना चांदी: मासारंभ वाले दिन ही अर्थात 1 नवंबर को शनि का सिंह राशि में प्रवेश कर केतु के साथ राशि संबंध बनाना तथा मघा नक्षत्र में आकर भरणी को वेधना सोना व चांदी के बाजार में उतार-चढ़ाव का सूचक है। इसी दिन बुध का भी तुला राशि में प्रवेश होना बाजार की अस्थिरता को मंदे के माहौल में ले जाएगा। 3 नवंबर को बुध का अस्त हो जाना चांदी में कुछ तेजी का माहौल उत्पन्न कर सकता है। 4 नवंबर को शुक्र का विशाखा नक्षत्र में प्रवेश कर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना बाजार में मंदे का ही योग दर्शाता है। 6 नवंबर को सूर्य का भी विशाखा में बैठकर कृत्तिका, अनुराधा व घनिष्ठा नक्षत्रों को वेधना चांदी में कुछ तेजी का रुझान बनाएगा। 7 नवंबर को गुरु का अस्त हो जाना सोने व चांदी में मंदे की ही लहर बनाए रखेगा। 10 नवंबर को वक्री गति के बुध का स्वाति नक्षत्र में आकर शतभिषा नक्षत्र को वेधना बाजार में पूर्व से चल रही मंदे की लहर को और बढ़ा सकता है। 12 नवंबर को शुक्र का वृश्चिक राशि में प्रवेश कर गुरु के साथ संबंध बनाना मंदे का ही सूचक है। 13 नवंबर को मंगल भी विशाखा में आकर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधने लगेगा। यह योग कुछ तेजी का सूचक है। 15 नवंबर को शुक्र का अनुराधा नक्षत्र में प्रवेश होना तथा अश्लेषा नक्षत्र को वेधना बाजार में अधिक अस्थिरता के संकेत देता है। इसी दिन बुध का भी उदय होना उतार-चढ़ाव अधिक लाएगा। 16 नवंबर को सूर्य वृश्चिक राशि में आकर गुरु व शुक्र के साथ संबंध बनाएगा। यह योग बाजार में बदलाव अर्थात कुछ तेजी लाएगा। इसी दिन मार्गशीर्ष मास की संक्रांति 30 मुहूर्ती बन रही है। यह भी तेजी की सूचक है। 18 नवंबर को बुध का मार्गी होना चांदी में तेजी का सूचक है। 19 नवंबर को सूर्य का अनुराधा में आकर भरणी, विशाखा व अश्लेषा को वेधना बाजार में पुनः मंदे का रुझान बनाएगा। 25 नवंबर को शुक्र का ज्येष्ठा नक्षत्र में आकर पुष्य नक्षत्र को वेधने लगना पूर्व के मंदे को और बढ़ा सकता है। 26 नंवबर को बुध का विशाखा नक्षत्र में आकर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधने लगना सोने में मंदे का योग दर्शाता है। 27 नवंबर को मंगल वृश्चिक राशि में आकर सूर्य, बुध व शुक्र के साथ राशि संबंध बनाकर चर्तुग्रही योग बनाएगा। यह योग बाजार में थोड़ा बदलाव लाएगा अर्थात उसके पूर्व मंदे की लहर को तेजी की ओर ले जाएगा। 28 नवंबर को शुक्र का उदय होना भी बाजार में कुछ तेजी का वातावरण बनाए रखेगा। गुड़ व खांड: मासारंभ वाले दिन अर्थात 1 नवंबर को शनि का सिंह राशि में केतु के साथ युति करना तथा मघा नक्षत्र में आकर भरणी नक्षत्र को सर्वतोभद्रचक्र में वेधना गुड़ व खांड में तेजी का सूचक है। 3 नवंबर को बुध का अस्त होना भी बाजार में ठहराव पैदा करेगा। 4 नवंबर को शुक्र का विशाखा नक्षत्र में प्रवेश कर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधने लगना बाजारों में पुनः तेजी की लहर बनाएगा। 6 नवंबर को सूर्य का भी विशाखा नक्षत्र में प्रवेश कर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना बाजार की तेजी को और बढ़ा सकता है। 7 नवंबर को गुरु के अस्त होने से बाजारों में पुनः मंदे की लहर आएगी। 10 नवंबर को वक्री गति का बुध स्वाति नक्षत्र में प्रवेश कर शतभिषा नक्षत्र को वेधेगा। यह योग बाजार में उतार-चढ़ाव अधिक लाएगा। 11 नवंबर को गुरु का अनुराधा नक्षत्र में प्रवेश कर अश्लेषा नक्षत्र को वेधना भी बाजार में मंदे का ही माहौल उत्पन्न करेगा। 12 नवंबर को शुक्र का वृश्चिक में आकर गुरु के साथ राशि संबंध बनाना गुड़ में मंदे का ही सूचक है। 13 नवंबर को मंगल विशाखा नक्षत्र में प्रवेश कर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधेगा। यह योग खांड में तेजी लाएगा। 15 नवंबर को बुध का उदय होना तथा इसी दिन शुक्र का अनुराधा में आकर अश्लेषा नक्षत्र को वेधने लगना बाजारों में मंदे के संकेत देता है। 16 नवंबर को सूर्य वृश्चिक राशि में आकर गुरु व शुक्र के साथ राशि संबंध बनाएगा। यह योग बाजार को पुनः तेजी की लहर में ले जाएगा। 19 नवंबर को सूर्य का अनुराधा नक्षत्र में आना तथा गुरु का मार्गी होना बाजार की पूर्व तेजी को बरकरार रखेगा। 25 नवंबर को शुक्र का ज्येष्ठा नक्षत्र में प्रवेश कर पुष्य नक्षत्र को वेधना खांड में पुनः मंदे का वातावरण उत्पन्न करेगा। 26 नवंबर को बुध का विशाखा नक्षत्र में आकर धनिष्ठा को वेधना भी बाजार में मंदे का सूचक है। 27 नवंबर को मंगल वृश्चिक राशि में आकर सूर्य, गुरु व शुक्र के साथ राशि संबंध बनाएगा। यह योग बाजार में कुछ बदलाव ला सकता है अर्थात इसमें तेजी आ सकती है। 28 नवंबर का शुक्र उदय हो रहा है। इसके प्रभाववश खांड में तेजी बनी रहेगी। अनाज तथा दालवान: मासारंभ में 1 नवंबर को शनि का सिंह राशि में प्रवेश कर केतु के साथ मिलाप करना तथा मघा नक्षत्र में आकर भरणी नक्षत्र को वेधने लगना गेहूं, जौ, चना इत्यादि अनाजों में तेजी का सूचक है। इसी दिन बुध का भी तुला राशि में आकर पुनः सूर्य, मंगल व शुक्र के साथ राशि संबंध बनाना मूंग, मौठ, उड़द इत्यादि दालवान में तेजी उत्पन्न करेगा। 3 नवंबर को बुध का अस्त होना भी दालवान में तेजी का सूचक है। 4 नवंबर को शुक्र का विशाखा नक्षत्र में प्रवेश कर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना गेहूं इत्यादि अनाजों को मंदे में ले जाएगा। 6 नवंबर को सूर्य विशाखा में प्रवेश कर कृत्तिका, धनिष्ठा व अनुराधा नक्षत्रों के वेधने लगेगा। यह योग अनाज व दालवान में तेजी के संकेत देता है। 7 नवंबर को गुरु का अस्त हो जाना बाजारों में पुनः बदलाव लाकर मंदे की ओर ले जाएगा। 10 नवंबर को बुध का स्वाति नक्षत्र में आकर शतभिषा नक्षत्र को पुनः वेधने लगना अनाजवान में मंदा ही बनाए रखेगा। 11 नवंबर को गुरु अनुराधा नक्षत्र में आकर अश्लेषा नक्षत्र को वेधने लगेगा। यह योग भी अनाजवान के बाजार में मंदे के संकेत देता है। 12 नवंबर को शुक्र व गुरु का आपस में संबंध बनाना अनाजों में कुछ तेजी की लहर चलाएगा किंतु दालवान को पूर्ववत मंदे में ही रखेगा। 13 नवंबर को मंगल का विशाखा नक्षत्र में आकर धनिष्ठा को वेधने लगना अनाजों में तेजी का सूचक है। लेकिन दालवान में मंदा बना रहेगा। 15 नवंबर को बुध का उदय होना तथा शुक्र का अनुराधा नक्षत्र में आकर अश्लेषा नक्षत्र को वेधने लगना गेहूं, जौ, चना इत्यादि में पूर्व से चल रही तेजी को और बढ़ाएगा। 16 नवंबर को सूर्य का वृश्चिक राशि में आकर गुरु व शुक्र के साथ राशि संबंध स्थापित करना अनाजों में तेजी का सूचक है। 18 नवंबर को बुध का मार्गी गति में आ जाना भी अनाजों में तेजी का सूचक है। 19 नवंबर को सूर्य का अनुराधा नक्षत्र में आकर भरणी, विशाखा व अश्लेषा नक्षत्रों को वेधने लगना दालवान में कुछ तेजी का माहौल बना सकता है। 25 नवंबर को शुक्र का ज्येष्ठा नक्षत्र में आकर पुष्य नक्षत्र को वेधना अनाजों की तेजी को और बढ़ा सकता है। किंतु दालवान में मंदा बना रहेगा। 26 नवंबर को बुध विशाखा नक्षत्र में प्रवेश कर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधेगा। यह स्थिति बाजारों में बदलाव लाएगी अर्थात अनाजों की तेजी को मंदे के और दालवान के मंदे को तेजी के वातावरण में ले जाएगी। 27 नवंबर को मंगल का वृश्चिक राशि में प्रवेश कर सूर्य, गुरु व शुक्र के साथ राशि संबंध बनाना बाजार में तेजी का माहौल बनाए रखेगा। तेलवान व घी: मासारंभ में 1 नवंबर को शनि का सिंह राशि में प्रवेश कर केतु के साथ राशि संबंध बनाना तथा मघा नक्षत्र में प्रवेश कर भरणी नक्षत्र को वेधना तेल व तेलवानों में तेजी के संकेत देता है। इसी दिन बुध का भी तुला राशि में प्रवेश कर सूर्य, मंगल व शुक्र के साथ राशि संबंध बनाना घी में तेजी का सूचक है। 3 नवंबर को बुध अस्त होगा जिससे घी में मंदे का माहौल उत्पन्न हो सकता है। 4 नवंबर को शुक्र विशाखा नक्षत्र में आकर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधने लगेगा। यह योग तेलों में तेजी का सूचक है, लेकिन घी में मंदा बना रहेगा। 6 नवंबर को सूर्य का विशाखा नक्षत्र में प्रवेश कर कृत्तिका, अनुराधा व धनिष्ठा नक्षत्रों को वेधना घी में मंदे का सूचक है। 7 नवंबर को गुरु का अस्त होना भी घी में मंदे की लहर को और बढ़ाएगा। 10 नवंबर को बुध का स्वाति नक्षत्र में आकर शतभिषा नक्षत्र को वेधना तेल में भी मंदे की लहर उत्पन्न करेगा। 11 नवंबर को गुरु अनुराधा नक्षत्र में आकर अश्लेषा नक्षत्र को वेधने लगेगा। यह भी बाजार के पूर्व रुख को और आगे ले जाएगा। 12 नवंबर को शुक्र वृश्चिक राशि में प्रवेश कर गुरु के साथ राशि संबंध बनाएगा यह योग बाजार में कुछ बदलाव देगा अर्थात पूर्व से चल रही मंदे की लहर को तेजी के माहौल में ले जाएगा। 13 नवंबर को मंगल का विशाखा नक्षत्र में प्रवेश कर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना, 15 नवंबर को शुक्र का अनुराधा नक्षत्र में प्रवेश कर अश्लेषा नक्षत्र को वेधने लगना बाजार की तेजी को और बढ़ा सकता है। 18 नवंबर को बुध मार्गी गति में आ रहा है, जो तेलों में तेजी ही दर्शाता है। 19 नवंबर को सूर्य अनुराधा में आकर अश्लेषा नक्षत्र को वेधेगा। यह योग तेलों में पुनः मंदा लाएगा। 27 नवंबर को मंगल का वृश्चिक राशि में प्रवेश कर सूर्य, गुरु व शुक्र के साथ संबंध बनाना यह चतुर्ग्रही योग घी व तेल के बाजार में कुछ बदलाव ला सकता है। उपर्युक्त फलादेश पूरी तरह ग्रह स्थिति पर आधारित है। पाठकों का बेहतर मार्गदर्शन ही इसका मुख्य उद्देश्य है। कोई निर्णय लेने से पहले निवेशक को उन अन्य संभावित कारणों पर भी ध्यान देना चाहिए, जो बाजार को प्रभावित करते हैं। कृपया याद रखें कि व्यापारी की सट्टे की प्रवृत्ति और निर्णय लेने की शक्ति में कमी तथा भाग्यहीनता के कारण होने वाले नुकसान के लिए लेखक, संपादक एवं प्रकाशक जिम्मेवार नहीं हैं।


पराविद्याओं को समर्पित सर्वश्रेष्ठ मासिक ज्योतिष पत्रिका  नवेम्बर 2006

अध्यात्म प्रेरक शनि | पुंसवन व्रत | पवित्र पर्व : कार्तिक पूर्णिमा | विवाह विलम्ब का महत्वपूर्ण कारक शनि

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.