मूलांक से जानी भाग्योद्य का समय

मूलांक से जानी भाग्योद्य का समय  

‘पूत के पांव पालने में ही नजर आते हैं’ यह कहावत भले ही पुरानी हो लेकिन आज भी शाश्वत है। भाग्यवान व्यक्ति को एक के बाद एक सफलता ऐसे मिलती चली जाती है जैसे पूर्व निर्धारित होगी। यदि व्यक्ति को अपने भाग्योदय का समय ज्ञात हो जाए तो वह भी प्रतिदिन हाथ लगने वाली निराशा से हताश न हो, कैसे आइए जानें

माटे तौर पर भाग्योदय का संबंध आजीविका से है। यह प्रश्न वह भी करता है, जो करोड़पति है और वह भी, जो निर्धन है, नौकरी नहीं लगी है तो कब लगेगी, लग चुकी है तो पदोन्नति कब होगी वांछित स्थानांतरण कब होगा, व्यवसाय कब आरंभ हो सकेगा, व्यवसाय चल रहा है तो उसमें उन्नति कब होगी, कौन सा व्यवसाय किया जाए कि धन कमाने में सफल हो सकें इत्यादि कई प्रश्न हैं। जो लोगों के मन में घुमड़ते रहते हैं और वे इनके उत्तर जानने को उत्सुक रहते हैं।

अंक ज्योतिष के अनुसार व्यक्ति अपने मूलांक के आधार पर अपने भाग्योदय का वर्ष जान सकता है। हमारे देश में अधिकतर लोग ग्रामीण अथवा अशिक्षित हैं, जहां अंग्रेजी जन्म तारीख तो छोड़िए, देशी जन्म तिथि (विक्रम संवत् आदि की) भी लोगों को पता नहीं है। ऐसे लोगों को चाहिए कि वे अपने नाम की अंग्रेजी वर्तनी लिख लें तथा उसे हिब्रू अंक प्रदान करें।

मान लीजिए किसी व्यक्ति का नाम है- राजकमल शर्मा। इनके अंग्रेजी नाम की वर्तनी बनेगी – RAJKAMAL SHARMA इस वर्तनी के हिब्रू अंक बनेंगे – 2+1+1+2+1+4+1+3+3+5+1+2+4+1 = 31 = 4 । अतः राजकमल शर्मा के नाम का मूलांक हुआ 4। इसे इनका नामांक भी कह सकते हैं। अब राजकमल शर्मा को यदि अपना जन्म दिनांक ज्ञात नहीं है तो वे मूलांक 4 के भाग्योदय के समय को अपना जन्म दिनांक मान सकते हैं। चूंकि यह मूलांक नाम का है, जन्म का नहीं; अतः इसके फल में थोड़ा बहुत परिवर्तन संभव है।

आइए, अब जानते हैं विभिन्न मूलांक वालों के भाग्योदय के बारे में।

मूलांक-1: सन् 2008 तथा 2017 इनके लिए भाग्य के श्रेष्ठ उपहार लिए इनकी प्रतीक्षा कर रहे हैं। ये वर्ष इनके लिए ‘ड्रीम इयर’ सिद्ध होंगे। मूलांक 1 का सहयोगी अंक 4 है। अतः वर्ष 2011 तथा 2020 भी इनकी उन्नति के लिए अनुकूल वर्ष हैं। किसी भी कैलेंडर वर्ष का जनवरी, अप्रैल, अक्तूबर महीना भी इनके लिए उपयुक्त है। ये इनके भाग्य का उज्ज्वल पक्ष सामने लाएंगे।

मूलांक-2: सन् 2009 तथा 2018 इनके लिए विशेष भाग्योदयकारी हैं। ये वर्ष इनके जीवन में उन्नति के अद्भुत द्वारा खोलेंगे। इनका कैरियर इस काल में नवीन ऊंचाइयों को छूएगा। मूलांक 2 के सहयोगी अंक हैं 3 तथा 7। इस कारण इनके लिए वर्ष 2005, 2010, 2014 तथा 2019 भी लाभकारी रहेंगे। हां, इतना अवश्य है कि नए काम रुकावटों के साथ आरंभ होंगे। यह भी हो सकता है कि आरंभ में कुछ समय तक इन्हें असफलताएं मिलें, किंतु डटे रहें तथा चिंता न करें। शुरुआती असफलताओं के बाद सफलता अवश्य मिलेगी। यदि इनका कार्य क्षेत्र अंक 2 अर्थात् चंद्रमा के क्षेत्र का, जैसे लेखन, प्रकाशन, वस्त्र-व्यवसाय, कला-जगत आदि है तो उक्त वर्षों में इन्हें विशेष सफलता मिलेगी। किसी भी कैलेंडर वर्ष का फरवरी, मार्च, जुलाई या दिसंबर महीना भी इनके अनुकूल है। ये योजना बद्ध ढंग से इनका लाभ भी उठा सकते हैं।

मूलांक-3: वर्ष 2010 तथा 2019 इनके लिए उत्कृष्ट फलदायी हैं। इन वर्षों में इन पर सरकारी पक्ष की कृपा दृष्टि विशेष रूप से होगी। इनके रुके काम अनायास अथवा कम परिश्रम से ही हो जाएंगे। यदि ये कोमल तथा सजावटी वस्तुओं, प्रकाशन अथवा गुरु से संबंधित अन्य वस्तुओं का व्यवसाय कर रहे हैं तो इन्हें उक्त वर्षों में विशेष लाभ होगा। मूलांक 3 के सहयोगी अंक हैं 6 तथा 9 । अतः इनके लिए वर्ष 2004, 2007, 2013 तथा 20016 भी उत्तम सिद्ध होंगे। किसी भी कैलेंडर वर्ष का मार्च, जून अथवा दिसंबर महीना इनके लिए उत्तम है।

मूलांक-4: वर्ष 2011 तथा 2020 इनके लिए विशेष भाग्योदयकारी हैं। मूलांक 4 के सहयोगी अंक हैं 1 तथा 8 । अतः इनके लिए वर्ष 2006, 2008, 2015 तथा 2017 भी अच्छे रहेंगे। हां, इतना अवश्य है कि इनके काम में कुछ शुरुआती रुकावटें आएं, लेकिन घबराएं नहीं, सफलता को इनके चरण चूमने होंगे। यदि ये तांबे, चमड़े, बीज आदि के व्यवसाय में हैं अथवा सरकारी कार्यों के ठेके लेते हैं तो उक्त वर्ष इन पर अधिक कृपालु होंगे। इनके लिए कैलेंडर वर्ष का जनवरी, अप्रैल, अगस्त या अक्तूबर का महीना भी शुभ है।

मूलांक-5: वर्ष 2012 तथा 2021 इनके लिए भाग्यवर्द्धक हैं। मूलांक 5 के सहयोगी अंक हैं 1, 3 तथा 7 । अतः वर्ष 2005, 2008 तथा 2014 भी इनके लिए अच्छे रहेंगे। ये यदि कांसे, किराने, मूंगफली, रबड़ अथवा स्टेशनरी के व्यवसाय में हैं तो उक्त वर्ष इन पर मेहरबान रहेंगे। इनके लिए कैलेंडर वर्ष का जनवरी, मार्च, मई, जुलाई, अक्तूबर या दिसंबर महीना भी अनुकूल है।

मूलांक-6: वर्ष 2004, 2013 तथा 2022 इनके लिए भाग्योदयकारी हैं। मूलांक 6 के सहयोगी अंक हैं 3 तथा 9। अतः इनके लिए 2007, 2010, 2016 तथा 2019 के वर्ष भी श्रेष्ठ रहेंगे। यदि ये हीरे, सुगंधित द्रव्य, सौंदर्य प्रसाधन या चांदी के व्यवसाय में हैं तो उक्त वर्ष इनके लिए विशेष शुभ फलदायी सिद्ध होंगे। इनके लिए कैलेंडर वर्ष का मार्च, जून, सितंबर या दिसंबर महीना भी शुभ है।

मूलांक- 7: वर्ष 2005 तथा 2014 इनके लिए प्रबल भाग्यवर्द्धक हैं। मूलांक 7 के सहयोगी अंक हैं 2 तथा 4 । अतः वर्ष 2009, 2011, 2018 तथा 2020 भी इनके भाग्य के अनुकूल हैं। यदि ये कांच, चावल, वस्त्र, शराब आदि के व्यवसाय में हैं तो उक्त वर्ष इनके व्यवसाय के प्रसार के लिए बहुत उपयुक्त हैं। इनके लिए कैलेंडर का फरवरी, अप्रैल, जुलाई या नवंबर महीना राहत प्रदान करने वाला है।

मूलांक-8: वर्ष 2006 तथा 2015 इनके लिए प्रबल भाग्यवर्द्धक हैं। ये वर्ष इनके जीवन के बहुत महत्वपूर्ण वर्ष सिद्ध होंगे। मूलांक 8 के सहयोगी अंक हैं 2 तथा 4 । अतः वर्ष 2009, 2011 तथा 2018 भी इनके लिए श्रेष्ठ रहेंगे। यदि ये लकड़ी, लोहे, कोयले, खनन, तेल या पुराकालीन चीजों के व्यवसाय से जुड़े हैं तो उक्त वर्ष इनके लिए अधिक अनुकूल सिद्ध होंगे। इनके लिए कैलेंडर वर्ष का फरवरी, अप्रैल, अगस्त, या नवंबर महीना भी राहत देने वाला होगा।

मूलांक-9: वर्ष 2007 तथा 2016 इनके लिए किराने भाग्यशाली सिद्ध होंगे। सरकारी पक्ष भी इन पर मेहरबानी करेगा। मूलांक 9 के सहयोगी अंक हैं 3 तथा 6 । अतः इनके लिए वर्ष 2004, 2010, 2013 तथा 2019 भी उत्थानकारी की भूमिका में रहेंगे। यदि ये भूमि शराब, भवन-निर्माण, चिकित्सकीय सामग्री, शस्त्र आदि के व्यवसाय में हैं तो उक्त वर्षों की इन पर विशेष कृपा दृष्टि रहेगी। इनके लिए कैलेंडर वर्ष का मार्च, जून, सितंबर या दिसंबर महीना भी शुभ है। जो भी करना है, इस दौरान कर लें।



पराविद्याओं को समर्पित सर्वश्रेष्ठ मासिक ज्योतिष पत्रिका  अप्रैल 2006

सभ्यता के आरम्भिक काल से ही फलकथन की विभिन्न पद्धतियां विश्व के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित रही हैं। इन पद्धतियों में से अंक ज्योतिष का अपना अलग महत्व रहा है यहां तक कि अंक ज्योतिष भी विश्व के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग रूपों में प्रचलित है तथा इन सब में आपस में ही विभिन्नता देखने को मिलती है। हालांकि सभी प्रकार के अंक ज्योतिष के उद्देश्य वही हैं तथा इनका मूल उद्देश्य मनुष्य को मार्गदर्शन देकर उनका भविष्य बेहतर करना तथा वर्तमान दशा को सुधारना है। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में अंक ज्योतिष के आधार पर फलकथन को वरीयता दी गयी है। इसमें मुख्यतः कीरो की पद्धति का अनुशरण किया गया है। इसके अन्तर्गत समाविष्ट महत्वपूर्ण आलेखों में- अंक ज्योतिष का परिचय एवं महत्व, अंक फलित के त्रिकोण प्रेम, बुद्धि एवं धन, मूलांक से जानिए भाग्योदय का समय, नाम बदलकर भाग्य बदलिए, हिन्दी के नामाक्षरों द्वारा व्यवसाय का चयन, अंक ज्योतिष का महत्वपूर्ण पहलू स्तूप, अंक एवं आॅपरेशन दुर्योधन, मूलांक, रोग और उपाय, अंक विद्या द्वारा जन्मकुण्डली का विश्लेषण आदि। इन आलेखों के अतिरिक्त दूसरे भी अनेक महत्वपूर्ण आलेख अन्य विषयों से सम्बन्धित हैं। इसके अतिरिक्त पूर्व की भांति स्थायी स्तम्भ भी संलग्न हैं।

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.