मूलांक, रोग ओर उपाय

मूलांक, रोग ओर उपाय  

व्यूस : 6081 | अप्रैल 2006
मूलांक, रोेग औैर उपाय कुमार गणेश मूलांक व्यक्ति के जीवन को बहुत प्रभावित करते हैं। आइए, जानें कि विभिन्न मूलांक वालों को किन रोगों के आक्रमण हो सकते हैं तथा उनसे बचाव के क्या उपाय हैं । मूलांक-1 रोग: हृदयाघात, हृदय रोग, सिरदर्द, दांत संबंधी रोग, नेत्र रोग, बुढ़ापे में कम सुनाई देना। क्या करें: उगते सूर्य को जल चढ़ाएं। रविवार को व्रत करें बिना नमक का भोजन करें। रंग: पीला, सुनहरा, हल्का भूरा, नारंगी, लाल। उससे काले रंग से बचें। रत्न: ढाई रत्ती या उससे अधिक का माणिक्य सोने या तांबे में रविवार को धारण करें। माणिक्य के स्थान पर सूर्यमणि भी धारण की जा सकती है। मूलांक-2 रोग: मंदाग्नि, मानसिक दुर्बलता, अनिद्रा, फेफड़ों संबंधी रोग आदि। क्या करें: शिव की नित्य उपासना। रंग: हल्का हरा, अंगूरी, दूधिया सफेद, क्रीमी। रत्न: 4 रत्ती या उससे अधिक वजन का मोती सोमवार को धारण करें। मोती के स्थान पर चंद्रकांत मणि भी धारण की जा सकती है। मूलांक-3 रोग: हड्डियों का दर्द, गले का रोग, शुगर, गैस, घुटनों एवं पीठ का दर्द, आदि। क्या करें: विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। पूर्णिमा और गुरुवार का व्रत करें। रंग: पीला, गुलाबी, हल्का, जामुनी, सफेद। रत्न: साढ़े 5 रत्ती का पुखराज गुरुवार को पहनें। मूलांक-4 रोग: खून की कमी, सिरदर्द, पीठदर्द, नेत्र रोग, टांग में चोट, अपच आदि। क्या करें: गणेश जी की आराधना करें। गणेश चतुर्थी का व्रत करें। रंग: नीला, भूरा, धूप-छांव। यदि अंक 4 अशुभ है तो नीले वस्त्र न पहनें। रत्न: साढ़े 6 रत्ती का गोमेद पंचधातु की अंगूठी में बुधवार को धारण करें। मूलांक-5 रोग: जुकाम-नजला, याददाश्त बिगड़ना, नेत्र रोग, अपच, हाथों में दर्द, कंधों में दर्द, सिर दर्द, लकवा। क्या करें: गणेश जी की उपासना करें। रंग: हल्का भूरा, हल्का हरा, सफेद। गहरे रंगों से बचें। रत्न: 3 रत्ती से अधिक का पन्ना बुधवार को धारण करें। मूलांक-6 रोग: फेफड़ों के रोग, मूत्र-विकार, गला और नाक के रोग, शुगर, पथरी, गुप्त रोग, गुर्दे संबंधी रोग। क्या करें: शुक्रवार का व्रत करें। रंग: हल्का नीला, गुलाबी, सफेद। गहरे बैंगनी और काले रंग से बचें। रत्न: ढाई रत्ती का हीरा चांदी या प्लेटिनम में शुक्रवार को धारण करें। हीरे के उपरत्न भी धारण किया जा सकता है। मूलांक 7 रोग: चर्म रोग, मानसिक रोग, थकावट, अपच, नेत्र-रोग, उल्टी-दस्त, रक्तचाप विकार, सिरदर्द, फेफड़ों संबंधी रोग। क्या करें: हनुमान की उपासना करें। रंग: सफेद, गुलाबी, हल्का हरा। काले रंग से बचें। रत्न: सवा 6 रत्ती का लहसुनिया पंचधातु या चांदी में मंगलवार को धारण करें। मोती भी पहन सकते हैं। मूलांक 8 रोग: लीवर संबंधी रोग, मानसिक रोग, दुर्घटनाएं, आंतरिक चोटें, जोड़ों का दर्द, अपच, रक्त-विकार आदि। क्या करें: शनि की उपासना। रंग: काला, नीला, गहरा भूरा, बैंगनी। रत्न: सवा 4 रत्ती का नीलम सोने में शनिवार को धारण करें। पंचधातु या काले घोड़े की नाल की अंगूठी भी पहनी जा सकती है। मूलांक 9 रोग: मांसपेशियों के रोग, दुर्घटनाएं, रक्तविकार, सिरदर्द, दांतदर्द, गुप्त रोग, मूत्र रोग, मस्सा (पाइल्स)। क्या करें: हनुमान जी की उपासना। रंग: लाल (रक्त जैसा), गहरा गुलाबी। लाल रूमाल रखें। रत्न: 5 रत्ती का मूंगा सोने में मंगलवार को पहनें। इसके अभाव में उपरत्न लाल अकीक चांदी में पहनें।

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पराविद्याओं को समर्पित सर्वश्रेष्ठ मासिक ज्योतिष पत्रिका  अप्रैल 2006

सभ्यता के आरम्भिक काल से ही फलकथन की विभिन्न पद्धतियां विश्व के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित रही हैं। इन पद्धतियों में से अंक ज्योतिष का अपना अलग महत्व रहा है यहां तक कि अंक ज्योतिष भी विश्व के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग रूपों में प्रचलित है तथा इन सब में आपस में ही विभिन्नता देखने को मिलती है। हालांकि सभी प्रकार के अंक ज्योतिष के उद्देश्य वही हैं तथा इनका मूल उद्देश्य मनुष्य को मार्गदर्शन देकर उनका भविष्य बेहतर करना तथा वर्तमान दशा को सुधारना है। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में अंक ज्योतिष के आधार पर फलकथन को वरीयता दी गयी है। इसमें मुख्यतः कीरो की पद्धति का अनुशरण किया गया है। इसके अन्तर्गत समाविष्ट महत्वपूर्ण आलेखों में- अंक ज्योतिष का परिचय एवं महत्व, अंक फलित के त्रिकोण प्रेम, बुद्धि एवं धन, मूलांक से जानिए भाग्योदय का समय, नाम बदलकर भाग्य बदलिए, हिन्दी के नामाक्षरों द्वारा व्यवसाय का चयन, अंक ज्योतिष का महत्वपूर्ण पहलू स्तूप, अंक एवं आॅपरेशन दुर्योधन, मूलांक, रोग और उपाय, अंक विद्या द्वारा जन्मकुण्डली का विश्लेषण आदि। इन आलेखों के अतिरिक्त दूसरे भी अनेक महत्वपूर्ण आलेख अन्य विषयों से सम्बन्धित हैं। इसके अतिरिक्त पूर्व की भांति स्थायी स्तम्भ भी संलग्न हैं।

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