त्रिशक्ति लाॅकेट

त्रिशक्ति लाॅकेट  

व्यूस : 2532 | फ़रवरी 2006

रत्नों का इतिहास बहुत प्राचीन है। हमारे वेद, पुराण, स्मृति आदि ग्रंथों में इनके बारे में विस्तृत वर्णन मिलता है। प्राचीन काल में राजे-महाराजे रत्नों के महत्व से भली-भांति परिचित थे तथा वे रत्नों को हमेशा पहने रहते थे। राजमहलों की दीवारों तथा सिंहासन आदि पर रत्न जड़े होते थे। आज भी इन प्राचीन स्मारकों पर रत्न जड़ित कला देखने को मिलती है। ज्योतिष शास्त्र में, खासकर फलित ज्योतिष में, रत्नों का घनिष्ठ संबंध है। ज्योतिष ग्रंथों में ग्रह जनित पीड़ा से बचने के लिए प्रत्येक ग्रह के अनुसार अलग-अलग रत्न धारण करने का विधान है। रत्नों को माला की तरह लाॅकेट में धारण करना विशेष शुभ फलदायक होता है।

कुछ खास समस्याओं के निराकरण के लिए पांच मुख्य त्रिशक्ति लाॅकेट कवच विकसित किए गए हैं। लक्ष्मीदायक त्रिशक्ति कवच लाॅकेट स्वास्थ्य वर्द्धक त्रिशक्ति कवच लाॅकेट विद्या प्रदायक त्रिशक्ति कवच लाॅकेट बाधा मुक्ति त्रिशक्ति कवच लाॅकेट काल सर्प रक्षा कवच लाॅकेट लक्ष्मीदायक त्रिशक्ति कवच लाॅकेट ‘सर्वेगुणाः कांचनमाश्रयन्ते’ शास्त्र वचन के अनुसार जो व्यक्ति धन-संपदा से संपन्न होता है वह समाज की दृष्टि में सर्वगुणसंपन्न माना जाता है। आज प्रत्येक व्यक्ति आर्थिक रूप से संपन्न होना चाहता है। ऐसी स्थिति में यह लक्ष्मीदायक लाॅकेट धारण करना लक्ष्मी त्रिशक्ति लाॅकेट आचार्य रमेश शास्त्री वृद्धि में विशेष लाभदायक होता है। यह लाॅकेट मूंगा, मोती और पीतांबरी इन तीन रत्नों को एक साथ जोड़कर बनाया गया है। मूंगा मंगल का रत्न है।

मंगल ग्रह शक्ति एवं साहस का प्रतीक है। मूंगा धारण करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, कार्यों में मन लगता है तथा परिश्रम का उत्तम फल प्राप्त होता है। मोती चंद्रमा का रत्न है। मोती रत्न का लक्ष्मी के साथ विशेष संबंध है, क्योंकि इन दोनों की उत्पत्ति समुद्र से ही हुई है। यह रत्न लक्ष्मी वृद्धि में विशेष सहायक है। मन के कारक ग्रह चंद्र का रत्न होने के कारण मोती मानसिक शांति प्रदान करता है। पीतांबरी रत्न बृहस्पति ग्रह का उपरत्न है। बृहस्पति धन का कारक ग्रह है। इस रत्न को धारण करने से सम्मान और धन की प्राप्ति होती है तथा आय के नवीन स्रोतों में वृद्धि होती है। इन तीनों रत्नों से बने लाॅकेट को गले में धारण करने से जीवन में आर्थिक सम्पन्नता बनी रहती है।

स्वास्थ्य वर्द्धक त्रिशक्ति कवच लाॅकेट प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में सभी प्रकार से स्वस्थ रहना चाहता है, लेकिन वर्तमान समय में अधिकांश लोग र शारीरिक या मानसिक रूप से रोगग्रस्त हैं। युवावस्था में ही लोग अनेक असाध्य रोगों से ग्रस्त हो जाते हैं। ऐसी परिस्थिति में इस त्रिशक्ति लाॅकेट को धारण करने से स्वास्थ्य ठीक रहता है। इस लाॅकेट में मोती, मूंगा और माणिक्य तीन रत्नों का समावेश किया गया है। मूंगा रत्न को धारण करने से शारीरिक शक्ति में वृद्धि होती है, हृदय एवं रक्त से संबंधित बीमारियों से रक्षा होती है एवं क्रोध पर नियंत्रण रहता है। मोती रत्न को धारण करने से मानसिक रोगों से रक्षा होती है जिससे शारीरिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।

इसके अतिरिक्त जुकाम, खांसी, दमा आदि रोगों से बचाव होता है। माणिक्य रत्न को धारण करने से शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है। यह आत्माकारक ग्रह सूर्य का रत्न होने के कारण दीर्घायु प्रदान करता है और आत्मबल में वृद्धि करता है जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इन तीन रत्नों के संयुक्त रूप से बने लाॅकेट को धारण करने से सभी शारीरिक तथा मानसिक रोगों से रक्षा होती है। विद्या प्रदायक त्रिशक्ति कवच लाॅकेट मानव जीवन में शिक्षा का विशेष महत्व है। कहा भी गया है ‘विद्या धनं सर्व धनं प्रधानम्’ अर्थात विद्या रूपी धन सभी धनों में प्रधान है, जिससे व्यक्ति के जीवन में ज्ञान रूपी ज्योति का उदय होता है।

विद्यावान व्यक्ति अपने साथ-साथ दूसरे लोगों का भी कल्याण करता है। आज शिक्षित व्यक्ति का सभी क्षेत्रों में विशेष महत्व है। वह कृषि क्षेत्र ही क्यों न हो वहां भी शिक्षित व्यक्ति अधिक उन्नति कर सकता है। अपने नाम के अनुरूप यह लाॅकेट विद्यार्थियों के लिए लाभदायक है। यह विद्या प्रदायक लाॅकेट पन्ना, पीतांबरी एवं मोती इन तीन रत्नों को एक साथ जोड़ कर बनाया गया है। पन्ना बुध का रत्न है और बुध बुद्धि का कारक ग्रह है। अतः इस रत्न को धारण करने से बुद्धि तीव्र होती है और व्यक्ति किसी भी कठिन विषय को सहजता से ही आत्मसात कर लेता है।

पीतांबरी रत्न को धारण करने से व्यक्ति अपनी पढ़ाई के प्रति गंभीर बनता है एवं समर्पित होकर विद्या अध्ययन करता है। बृहस्पति ग्रह का ज्ञानार्जन से सीधा संबंध है। अतः इस रत्न को पहनने से अध्ययन क्षमता में वृद्धि होती है और किसी भी विषय को लंबे समय तक स्मरण रखने में सहायता मिलती है। मोती चंद्रमा का रत्न है। चंद्रमा मन का कारक ग्रह है अतः मोती धारण करने से मन में स्थिरता बनी रहती है जिससे विद्या अध्ययन के क्षेत्र में मनोवांछित सफलता प्राप्त होती है। बाधामुक्ति त्रिशक्ति कवच लाॅकेट: मनुष्य के जीवन में नाना प्रकार की बाधाएं उत्पन्न होती रहती हैं। इस लाॅकेट को धारण करने से सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है और कोर्ट-कचहरी के मामलों में लाभ होता है। इसके अतिरिक्त भूत-पे्रतादि बाधाओं से मुक्ति के लिए यह लाॅकेट कवच की तरह कार्य करता है और बुरी नजर, जादू-टोने, तांत्रिक प्रभावों आदि से भी रक्षा करता है।

यह बाधामुक्ति त्रिशक्ति कवच लाॅकेट जरकन, गोमेद, नीली इन तीन रत्नों को जोड़कर बनाया गया है। जरकन शुक्र ग्रह का उपरत्न माना जाता है। शुक्र ग्रह भौतिक सुख संसाधनों का कारक है। अतः इसे धारण करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है जिससे जीवन में सरसता बनी रहती है। गोमेद राहु का मुख्य रत्न है। राहु व्यक्ति के जीवन में आकस्मिक घटनाओं को घटित करता है। यह रत्न अचानक आने वाली बाधाओं से रक्षा करता है। इसके अतिरिक्त इसे धारण करने से परिश्रम का पूर्ण फल मिलता है तथा शत्रुओं की ओर से उत्पन्न होने वाली बाधाओं से मुक्ति मिलती है। नीली रत्न शनि ग्रह का उपरत्न माना जाता है। इस ग्रह का प्रभाव हमारे जीवन की सुख-शांति पर विशेष रूप से पड़ता है।

इस रत्न को धारण करने से जीवन में बुरी शक्तियों से रक्षा होती है। कालसर्प रक्षा कवच लाॅकेट: जन्म कुंडली में जब सारे ग्रह राहु-केतु के मध्य स्थित होते हैं तो कालसर्प नामक योग बनता है। जिस जातक की कुंडली में यह योग बनता है उसके जीवन में अस्थिरता बनी रहती है। व्यक्ति जितना परिश्रम करता है उतना लाभ नहीं मिलता और जीवन संघर्षमय बन जाता है। व्यक्ति को धन और वैभव की प्राप्ति हो भी जाए तो भी संतुष्टि नहीं मिलती है। ऐसी स्थिति में इस महादोष कारक योग की शांति के लिए यह कालसर्प रक्षा कवच लाॅकेट पहनना लाभदायक होता है। नीली रत्न शनि का उपरत्न है। शनि दुख एवं विघ्न-बाधाओं का कारक ग्रह है। इस रत्न को धारण करने से दुख, क्लेश एवं विघ्न-बाधाओं से मुक्ति मिलती है तथा व्यक्ति धीरे-धीरे उन्नति की ओर अग्रसर होता है।

गोमेद राहु का मुख्य रत्न है। अशुभ राहु के कारण जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में असफलता प्राप्त होती है। ऐसे में गोमेद रत्न को धारण करने से प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त होती है। विरोधियों की पराजय होती है। लहसुनिया केतु का मुख्य रत्न है। केतु के अशुभ प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में निराशा, दुख, भय, व्याधि, शोक छाए रहते हंै। इनसे बचने के लिए लहसुनिया धारण करना लाभदायक होता है। फ्यूचर पाॅइंट ने ज्योतिर्विदों के विशेष अनुसंधान के आधार पर ऊपर वर्णित लाॅकेटों का निर्माण किया है।

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रत्न विशेषांक  फ़रवरी 2006

हमारे ऋषि महर्षियों ने मुख्यतया तीन प्रकार के उपायों की अनुशंसा की है यथा तन्त्र, मन्त्र एवं यन्त्र। इन तीनों में से तीसरा उपाय सर्वाधिक उल्लेखनीय एवं करने में सहज है। इसी में से एक उपाय है रत्न धारण करना। ऐसा माना जाता है कि कोई न कोई रत्न हर ग्रह से सम्बन्धित है तथा यदि कोई व्यक्ति वह रत्न धारण करता है तो उस ग्रह के द्वारा सृजित अशुभत्व में काफी कमी आती है। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में अनेक महत्वपूर्ण आलेखों को समाविष्ट किया गया है जिसमें से प्रमुख हैं- चैरासी रत्न एवं उनका प्रभाव, विभिन्न लग्नों में रत्न चयन, ज्योतिष के छः महादोष एवं रत्न चयन, रोग भगाएं रत्न, रत्नों का शुद्धिकरण एवं प्राण-प्रतिष्ठा, कितने दिन में असर दिखाते हैं रत्न, लाजवर्त मणि-एक नाम अनेक काम इत्यादि। इसके अतिरिक्त स्थायी स्तम्भों के भी महत्वपूर्ण आलेख विद्यमान हैं।

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