भाग्यवर्द्धक रत्न लाॅकेट

भाग्यवर्द्धक रत्न लाॅकेट  

व्यूस : 2033 | जनवरी 2010

माणिक: यह रत्न सूर्य ग्रह का रत्न माना जाता है। सूर्य ग्रह की अनुकूलता के लिए इसे धारण किया जाता है। इस रत्न को विषेष रूप से सिंह लग्न एवं सिंह राशि वाले व्यक्ति धारण कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त मा, मी, मू मे, मो, टा, टी, टू, टे नाम अक्षर वाले व्यक्ति भी पहन सकते हैं।

इसको धारण करने से भाग्योन्नति पराक्रम, यश, शारीरिक बल बुद्धि, राजकीय कार्यों में सफलता प्रदान करता है। इस रत्न को अनामिका उंगली में अथवा गले में लाॅकेट बनाकर धारण किया जा सकता है। रविवार के दिन सूर्य की होरा में इसे धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

मोती: यह रत्न चंद्र ग्रह का रत्न है। इसे चंद्र ग्रह की अनुकूलता के लिए धारण किया जाता है। इस रत्न को विशेष रूप से कर्क राशि, कर्क लग्न वाले व्यक्ति तथा इसके अतिरिक्त हि, हु, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो नाम अक्षर वाले व्यक्ति भी धारण करते हैं। इसे धारण करने से मानसिक शांति, स्मरण शक्ति, कल्पना शक्ति, प्रेम वृद्धि होती है। उसे कनिष्ठिका उंगली में अथवा गले में लाॅकेट बनाकर धारण कर सकते हैं। उसे सोमवार के दिन चंद्र की होरा में धारण करना चाहिए।

मूंगा: यह रत्न मंगल ग्रह का रत्न है। इसे मंगल ग्रह की शांति एवं अनुकूलता के लिए धारण किया जाता है। इसे विशेष रूप से मेष, राशि, मेष लग्न तथा वृश्चिक राशि, वृश्चिक लग्न वाले जातक तथा चू, चे, चो, ला, ली, लू ले, लो, अ, तो, ना, नी, नू, ने, नो, या यी, यू नाम अक्षर वाले व्यक्ति भी धारण कर सकते हैं। इसे धारण करने से साहस, भूमि, लाभ, हृदय रोग, पेट में कब्ज आदि में लाभ कारक होता है। इसे मंगलवार के दिन मंगल की होरा में अंगूठी या लाॅकेट में धारण करना चाहिए।

पन्ना: यह बहुमूल्य श्रेणी का रत्न होता है।इसे, बुध ग्रह की अधिक अनुकूलता के लिए धारण, किया जाता है। विशेष रूप से इसे, मिथुन राशि, मिथुन लग्न, कन्या राशि, कन्या लग्न वाले व्यक्तियों तथा का, की, कु, घ, ड., छ के, को ह, टो पा, पी, पू, ष, ण, रू, पे, पो नाम अक्षर वाले व्यक्ति भी इसे धारण कर सकते हैं। इसे धारण करने से तीव्र बुद्धि, स्मरण शक्ति में वृद्धि, व्यापार में लाभ, त्वचा संबंधित रोगों में विशेष लाभ होता है। इसे बुध के दिन, बुध की होरा में अंगूठी अथवा लाॅकेट में धारण करना चाहिए।

पुखराज: यह बहुमूल्य रत्न बृहस्पति ग्रह की बलवृद्धि, अनुकूलता के लिए धारण किया जाता है। इसको विशेष रूप से धनु राशि, धनु लग्न, मीन राशि, मीन लग्न वाले जातकों, तथा इसके अतिरिक्त ये, यो, भा, भी, भू, था, फ, ढ, भे, दी, दू, वाले व्यक्ति भी इसे धारण करके लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इसे धारण करने से विद्या, धन, स्वास्थ्य वैवाहिक सुख, पुत्र संतान सुख, आदि की प्राप्ति होती है। इस रत्न को अंगूठी अथवा लाॅकेट में वृहस्पतिवार की होरा में धारण, करना चाहिए।

हीरा: यह बहुमूल्य श्रेणी आकर्षक रत्न शुक्र ग्रह का रत्न है। इसे शुक्र ग्रह की अनुकूलता के लिए धारण किया जाता है। विशेष रूप से इसे वृष राशि, वृष लग्न तथा तुला राशि, तुला लग्न वाले व्यक्तियों और इसके अतिरिक्त ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो, रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तु, ते, नाम अक्षर वाले भी इसे धारण कर सकते हैं। इसे धारण करने से धन, लक्ष्मी, वाहन वंश वृद्धि, स्त्री सुख, प्रेम वृद्धि आदि में लाभदायक होता है। इसे अंगूठी में अथवा लाॅकेट में शुक्र की होरा में धारण करना चाहिए। नीलम: यह बहुमूल्य रत्न शनि ग्रह की अनुकूलता एवं बलबुद्धि के लिए धारण किया जाता है।

इसे विशेष रूप से मकर राशि, मकर लग्न, एवं कुंभ राशि, कुंभ लग्न वाले जातकों, इसके अतिरिक्त भो, जा, जी जू, जे, जो, खा, खी, खू, खे, खो, गा, गी, गू, गे, गो, सा, सी, सू से सो दा नाम अक्षर वाले भी किसी सुयोग्य ज्योतिषी के परामर्श के अनुसार धारण कर सकते हैं। इसे अंगूठी में अथवा लाॅकेट में शनिवार को शनि की होरा में धारण करना चाहिए।

इसे धारण करने से यश, कीर्ति, धन, सम्पत्ति, नौकरी, व्यवसाय में लाभ तथा आयु आरोग्यता के लिए धारण करना शुभ माना जाता है। गोमेद: यह रत्न राहु ग्रह का रत्न होता है। इसे विशेष रूप से राहु ग्रह की अनुकूलता के लिए धारण किया जाता है।

इसके अतिरिक्त इसे रोग, शांति, धन, सम्पत्ति सुख, राजनीति में सफलता, शत्रुनाश आदि के लिए धारण करना लाभदायक होता है। इस रत्न को सूर्य अस्त के बाद अंगूठी में अथवा लाॅकेट में धारण करना चाहिए।

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