भारतीय टीम की पाक यात्रा इरादे पक्के, सितारे बुलंद

भारतीय टीम की पाक यात्रा इरादे पक्के, सितारे बुलंद  

क्रिकेट का खेल न केवल क्रिकेट खिलाड़ियों, बल्कि शिक्षितों- अशिक्षितों, अमीरों, गरीबों व्यापारियों, नौकरी पेशा लोगों, घरेलू स्त्रियों के लिए भी एक रोचक खेल होता है। यह खेल विज्ञापन जगत के लिए व्यय, आय का महत्वपूर्ण स्रोत होता है। और इसमें अधिक उत्तेजना लाने वाला होता है भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला क्रिकेट खेल। दोनों देशों के बीच होने वाला हर मैच दोनों देशों की जनता में जोश और रोमांच भर देता है। पाकिस्तान और भारत की टीमें एक दूसरे से कम नहीं हंै। पाकिस्तान क राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का समय भी अनुकूल चल रहा है एवं भारत के प्रधान मंत्री श्री मनमोहन सिंह जी की कुंडली के अनुसार उनका समय भी अनुकूल ही है। भारत की जन्मपत्री में शुक्र की महादशा में बुध की अंतर्दशा भी अनुकूल है। इस खेल में कभी भारत पाकिस्तान पर हावी होगा तो कभी पाकिस्तान भारत पर। पाकिस्तान टीम के किसी खिलाड़ी की जन्मपत्री हमारे पास नहीं है, परंतु भारत के कप्तान राहुल द्रविड़ की जन्मपत्री में मंगल 6 फरवरी, 2006 के बाद उत्तम स्थिति में रहेगा और भारत को विजय दिलाने में समर्थ होगा, विशेषकर कप्तान राहुल द्रविड़ जन्म लग्न से पंचमेश चंद्र के लग्न स्थान में, भाग्येश के भाग्य स्थान में, मीन के पराक्रम स्थान में तथा वर्तमान समय में शुक्र की महादशा में मंगल की अंतर्दशा (21. 3.2006 तक) के कारण अच्छे खेल का प्रदर्शन करके भारत के नाम को ऊंचा करेंगे। वैसे 6 फरवरी के पश्चात मंगल गोचर में भी पराक्रम भाव में रहेगा। परंतु उससे पहले के समय में हार-जीत की स्थिति बनी रहेगी। ग्रेग चैपल का समय भी भारत के लिए अनुकूल रहेगा। भारत के अन्य खिलाड़ियों में वीरेंद्र सहवाग, अनिल कुंबले, सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह और लक्ष्मण का समय भी बुरा नहीं है। युवराज सिंह की जन्म कुंडली में वर्तमान समय में राहु की महादशा में गुरु की अंतर्दशा है और गुरु गोचर में लग्न को देख रहा है और पराक्रम भाव को भी बढ़ा रहा है। पराक्रम के स्वामी मंगल के कारण 6 फरवरी, 2006 तक खेल में अच्छा प्रदर्शन करेंगे और उनके भाग्य का लाभ भी भारत को प्राप्त होगा। वीरेंद्र सहवाग की कुंडली में वर्तमान समय में गुरु की महादशा में गुरु की अंतर्दशा है और वह गोचर में लग्न से दशम भाव में परिक्रमा कर रहा है। उसके चंद्रमा से छठे होने से भारत की विपक्षी टीम पर विजय की संभावना प्रबल है, क्योंकि उनकी कुंडली में गुरु सप्तम केंद्र में पंच महापुरुष योग बनाकर उच्चस्थ है। पंचम भाव में उच्च का चंद्र और दशम में शुक्र स्वगृही होकर मूल-त्रिकोण राशि में दशम केंद्र में मालव्य योग बना रहे हैं। अनिल कुंबले की कुंडली में राहु की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा मार्च, 2006 तक चलेगी। गोचर में लग्न से पंचम भाव में और चंद्र से एकादश भाव में राहु शुभ स्थिति में चलन कर रहा है। जन्म कुंडली में चतुर्थ भाव का राह गुरु की दृष्टि में है और राहु की दृष्टि दशम भावस्थ केतु को अधिक प्रभावित कर रही है। गोचर में इन्हीं दिनों में चंद्र लग्न से पराक्रम भाव में स्थित शनि सफलता दिलाएगा। यदि पाकिस्तान के खिलाड़ी उन्हें कमजोर समझेंगे तो गलती करंेगे क्योंकि समय सदा बलवान होता है और वर्तमान में उनका समय अच्छा चल रहा है। उनके खेल को समझना बहुत कठिन होगा। यदि उनका जादू चल गया तो विपक्ष के खिलाड़ी धराशायी होंगे। सचिन तेंदुलकर की कुंडली में नीच राशि का राहु, केतु, नीच का गुरु व बुध नीच भंग राज योग बना रहे हैं। उच्च पंचमस्थ मंगल गुरु के साथ खेल विद्या का कौशल और सप्तम केंद्र स्थान में कन्या लग्न का स्वामी बुध धैर्य, चतुरता, पराक्रम और गंभीरता के साथ सफलता दिलाता है। वर्तमान समय में शनि, गुरु एवं केतु का गोचर कभी चढ़ाएगा और कभी गिराएगा, और शरीर में चोट भी देगी। कभी-कभी अस्वस्थता और शारीरिक रूप से फिट न होने के कारण खेल से बाहर भी हो सकते हैं। वे कभी शतक बनाएंगे और कभी शून्य पर खेल से बाहर हो सकते हैं। अजित आगरकर का भाग्य प्रबल है। भाग्य स्थान में नीच का मंगल नीच भंग राज योग बना रहा है और भाग्येश चंद्रमा दशम केंद्र में सिंह राशि में स्थित है। पंचम विद्या स्थान में केतु के कारण किस समय कैसा खेल खेलेंगे, किसी को कुछ मालूम नहीं चल पाता है। खेल का कौशल इनके पास जैसा भी हो, इन्हें टीम में अवश्य रखा जाता है। खेल का प्रदर्शन करते समय कभी छक्का, तो कभी चैका मार कर, कभी अच्छा क्षेत्र रक्षण तो कभी अच्छी गेंदबाजी कर अच्छे आॅल राउंडर साबित हुए हैं। वर्तमान समय में मंगल की महादशा में गुरु की अंतर्दशा मई, 2006 तक रहने के कारण आगरकर अच्छा प्रदर्शन करेंगे। इनकी कुंडली में गुरु-बुध के परिवर्तन योग, उच्च स्थान को मंगल की दृष्टि, पराक्रम के स्वामी शनि के चंद्र के साथ होने के कारण वे अकस्मात खेल का पाशा पलट देते हैं। पाकिस्तान के साथ जनवरी और फरवरी में खेलते समय गोचर में मंगल भी चंद्रमा से भाग्य और कर्म स्थान में चलन करता रहेगा, इसलिए भारत को विजयी बनाने में इनका भी योगदान रहेगा। सौरभ गांगुली एक अच्छे कप्तान और एक अच्छे बल्लेबाज के रूप में काफी समय तक क्रिकेट जगत में छाए रहे। उनकी कुंडली में वर्तमान समय में गुरु की महादशा में गुरु की अंतर्दशा अशुभ है। अष्टम भाव में गुरु गोचर में लग्न से छठे भाव में गोचर कर रहा है। इसलिए उनके पतन का समय आरंभ हो चुका है। यदि भूले भटके टीम में शामिल हुए भी तो बाहर हो जाएंगे। इसी कारण भारत और पाकिस्तान के खेल में इनके भाग्य से टीम को हानि हो सकती है। भारत की जन्म कुंडली में पराक्रम भाव में सूर्य, बुध, शुक्र, शनि और चंद्र स्थित हैं, परंतु साढ़े साती का प्रभाव भी है। वर्तमान समय में शुक्र-बुध 3.2. 2006 तक विशेष शुभ नहीं है। तब तक भारत के पक्ष में खेल का प्रदर्शन भी अति उत्तम नहीं होगा। फरवरी महीने में भारत पाकिस्तान पर हावी रहेगा। भारत के पंचम भाव में कन्या राशि में गोचर में केतु भारत को विजयी बनाएगा। जन्म कुंडली में उच्च राशिस्थ सप्तम भाव में केतु के कारण खिलाड़ी एक-दूसरे के साथ तालमेल करके अच्छी भावना से खेलेंगे। उस समय भारत की शुक्र की महादशा, बुध की अंतर्दशा और केतु की प्रत्यंतर्दशा चलती रहेंगी। 13 से 2 फरवरी तक के समय में पाकिस्तान क्रिकेट टीम के भारत के ऊपर हावी होने की संभावना है। क्योंकि मेष राशि में मंगल शक्तिशाली होकर पाकिस्तान के पक्ष में प्रभावी रहेगा। परंतु 6 से 18 फरवरी के अंतिम मैचों में मंगल वृष लग्न में है जो भारत के पक्ष में रहेगा। परिणाम यह निकलेगा कि कुछ मैचों में पाकिस्तान की जीत होगी और कुछ मैचों में भारत की जीत होगी। कुल मिलाकर भारत एवं पाकिस्तान के मध्य घमासान युद्ध जैसा खेल होगा जिसमें भारत की विजय की संभावना प्रबल है।


रत्न विशेषांक  फ़रवरी 2006

हमारे ऋषि महर्षियों ने मुख्यतया तीन प्रकार के उपायों की अनुशंसा की है यथा तन्त्र, मन्त्र एवं यन्त्र। इन तीनों में से तीसरा उपाय सर्वाधिक उल्लेखनीय एवं करने में सहज है। इसी में से एक उपाय है रत्न धारण करना। ऐसा माना जाता है कि कोई न कोई रत्न हर ग्रह से सम्बन्धित है तथा यदि कोई व्यक्ति वह रत्न धारण करता है तो उस ग्रह के द्वारा सृजित अशुभत्व में काफी कमी आती है। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में अनेक महत्वपूर्ण आलेखों को समाविष्ट किया गया है जिसमें से प्रमुख हैं- चैरासी रत्न एवं उनका प्रभाव, विभिन्न लग्नों में रत्न चयन, ज्योतिष के छः महादोष एवं रत्न चयन, रोग भगाएं रत्न, रत्नों का शुद्धिकरण एवं प्राण-प्रतिष्ठा, कितने दिन में असर दिखाते हैं रत्न, लाजवर्त मणि-एक नाम अनेक काम इत्यादि। इसके अतिरिक्त स्थायी स्तम्भों के भी महत्वपूर्ण आलेख विद्यमान हैं।

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.