विभिन्न लग्नों में रत्न चयन

विभिन्न लग्नों में रत्न चयन  

लग्न व्यक्तित्व का द्योतक है। मेषादि बारह लग्नों में अलग-अलग रत्न चयन या धारण करने का महत्व है। दशा-अंतर्दशा अथवा गोचर में कुछ समय के लिए रत्न धारण कर सकते हैं, लेकिन मुख्यतया लग्नेश, पंचमेश एवं भाग्येश के रत्न धारण करने से जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति मिल सकती है। विभिन्न लग्नों के संदर्भ में इसका विवरण नीचे दिया जा रहा है। मेष: मेष लग्न के लिए माणिक्य, मोती, मूंगा, पुखराज धारण करना शुभ रहेगा। शिक्षा में सफलता और संतान सुख के लिए माणिक्य धारण करना शुभ है। मेष लग्न में सूर्य पंचमेश भी है। मानसिक परेशानियों से मुक्ति एवं सुख के लिए चतुर्थेश चंद्रमा का रत्न मोती उपयुक्त रहेगा। व्यक्तित्व प्रभावशाली बनाने, मान-प्रतिष्ठा एवं स्वास्थ्य संबंधी अनुकूलता हेतु मेष लग्न वालों को मूंगा धारण करना चाहिए। उत्साह वर्धन व सक्रियता हेतु भी मूंगा उपयोगी है। मेष लग्न के जातकों के लिए उच्च स्तरीय सफलता एवं भाग्य वृद्धि हेतु भाग्येश गुरु का रत्न पुखराज पहनना श्रेयस्कर रहेगा। मेष लग्न वालों को पन्ना, हीरा एवं नीलम पहनने से बचना चाहिए, अर्थात इन रत्नों को आजीवन धारण नहीं करें। दशा-अंतर्दशा अथवा गोचर के अनुसार धारण कर सकते हैं। वृष: वृष लग्न वालों का लग्नेश एवं षष्ठेश शुक्र का रत्न हीरा पहनने से व्यक्तित्व प्रभावशाली होगा व स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। भूमि से जुड़े विवाद, पारिवारिक कष्ट आदि प्रतिकूल परिस्थितियों में जातक को माणिक्य धारण करना चाहिए। आर्थिक मामलों, विद्या, संतान, मानसिक एकाग्रता के लिए पंचमेश व धनेश बुध का रत्न पन्ना पहनना चाहिए। वृष लग्न के लिए शनि भाग्य व दशम का स्वामी होकर प्रबल योगकारक हो जाता है। अतः शनि का रत्न नीलम पहने से भाग्य की प्रबलता, राज्य की अनुकंपा बनी रहेगी तथा जीवन में उच्च स्तरीय सफलता मिलेगी। वृषभ लग्न वालों को मोती, मूंगा और पुखराज पहनने से बचना चाहिए। मिथुन: मिथुन लग्न के जातकों को लग्नेश बुध का रत्न पन्ना धारण करना श्रेयष्कर है बुध लग्नेश व चतुर्थेश भी है अतः पारिवारिक एवं स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, वाहन-भूमि आदि की प्राप्ति के लिए पन्ना धारण करना शुभ रहेगा। संतान सुख एवं विद्या में सफलता के लिए शुक्र का रत्न हीरा पहनना शुभ रहेगा। मिथुन लग्न वालों को मूंगा, पुखराज, नीलम नहीं पहनने चाहिए। आर्थिक सफलता के लिए मोती पहनना श्रेष्ठ रहेगा। कर्क: कर्क लग्न वालों को लग्नेश चंद्रमा का रत्न मोती आजीवन धारण करना चाहिए। माणिक्य पहनने से आर्थिक सफलता तो मिलेगी लेकिन वृद्ध व्यक्तियों को माणिक्य नहींे पहनना चाहिए क्योंकि सूर्य मारकेश भी होता है। कर्क लग्न के जातकों को मूंगा भी पहनना चाहिए क्योंकि मंगल पंचम व दशम भाव का स्वामी होकर प्रबल योगकारक ग्रह बन जाता है। मूंगा पहनने से शिक्षा, संतान, राज्य आदि से अनुकूलता प्राप्त होती है। कर्क लग्न वालों को हीरा, नीलम या पन्ना नहीं पहनना चाहिए। पुखराज कुछ समय के लिए पहना जा सकता है। सिंह: सिंह लग्न के जातकों को माणिक्य आजीवन पहनना चाहिए क्योंकि लग्नेश का रत्न पहनने से आरोग्य और आत्मबल में वृद्धि होती है एवं सफलता मिलती है। मूंगा पहनने से भूमि-संपत्ति मामलों, पारिवारिक मामलों एवं भाग्य में सफलता मिलेगी। पुखराज पहनने से संतान सुख और प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता प्राप्त होगी। सिंह लग्न के जातकों को नीलम, हीरा पन्ना नहीं पहनना चाहिए। कन्या: लग्नेश बुध का रत्न पन्ना पहनने से आरोग्य राज्य पक्ष से प्रतिष्ठा और व्यापारिक कार्यों में सफलता मिलती है। मोती पहनने से आय में वृद्धि होगी। हीरा पहनने से पैतृक धन-संपत्ति और भाग्य की अनुकूलता प्राप्त होती है। कन्या लग्न वालों को माणिक्य, मूंगा, पुखराज या नीलम नहीं पहनना चाहिए। तुला: लग्नेश शुक्र का रत्न हीरा आजीवन पहनना चाहिए। मोती पहनने से राज्य पक्ष से लाभ एवं ख्याति मिलती है। नीलम पहनने से वाहन, संपत्ति और संतान सुख से जुड़े विषयों में सफलता मिलेगी। पन्ना पहनने से भाग्य संबंधी बाधाएं दूर होंगी। तुला लग्न वालों को मूंगा या पुखराज नहीं पहनना चाहिए। माणिक्य दशा-अंतर्दशा में पहन सकते हैं। वृश्चिक: लग्नेश मंगल का रत्न मूंगा आजीवन पहन सकते हैं। भाग्येश चंद्र का रत्न मोती पहनना भाग्यवर्धक साबित होगा। माणिक्य पहनने से मान-प्रतिष्ठा, उच्चाधिकारियों से लाभ होगा। पुखराज पहनने से आर्थिक क्षेत्र, संतान सुख और अध्ययन क्षेत्र में क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। वृश्चिक लग्न वालों को पन्ना, हीरा व नीलम नहीं पहनना चाहिए। धनु: लग्नेश व चतुर्थेश गुरु का रत्न पुखराज आजीवन धारण कर सकते हैं। इससे जीवन में उत्साह, मान-प्रतिष्ठा और भूमि-संपत्ति के मामलों से लाभ मिलेगा। भाग्येश सूर्य का रत्न माणिक्य पहनने से भाग्य की प्रबलता रहेगी। पंचमेश मंगल का रत्न मूंगा पहनने से संतान सुख व अध्ययन में सफलता मिलेगी। धनु लग्न वालों को मोती, पन्ना, हीरा या नीलम नहीं पहनना चाहिए। मकर: लग्नेश व धनेश शनि का रत्न नीलम पहनने से व्यक्तित्व में निखार आएगा व आर्थिक क्षेत्र में सफलता मिलेगी। नीलम आजीवन धारण कर सकते हैं। उच्च शिक्षा व भाग्य की प्रबलता के लिए पन्ना धारण करना ठीक रहेगा। हीरा पहनने से संतान, अध्ययन व प्रेम प्रसंग में अनुकूलता प्राप्त होगी। मकर लग्न वालों को माणिक्य पुखराज धारण नहीं करना चाहिए। मोती व मूंगा दशा-अंतर्दशा में धारण कर सकते हैं। कुंभ: लग्नेश शनि का रत्न नीलम पहनने से जीवन में उच्चाधिकार, मान-प्रतिष्ठा व स्थिरता की प्राप्ति होती है। हीरा पहनने से संपत्ति, वाहन व भाग्य की प्रबलता बनी रहेगी। दशा-अंतर्दशा में पुखराज व मूंगा पहन सकते हैं, लेकिन माणिक्य व मोती कभी न पहनें। मीन: लग्नेश व राज्येश गुरु का रत्न पुखराज पहनने से आरोग्य और मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी। यह रत्न आजीवन पहनें। पंचमेश चंद्रमा का रत्न मोती शिक्षा, संतान और प्रेम-प्रसंग में उपयोगी होगा। धनेश व भाग्येश का रत्न मूंगा पहनने से आर्थिक क्षेत्र में सफलता मिलेगी व भाग्य भी साथ देगा। माणिक्य हीरा नहीं पहनना चाहिए। दशा, अंतर्दशा या गोचर में नीलम व पन्ना धारण कर सकते हैं।


रत्न विशेषांक  फ़रवरी 2006

हमारे ऋषि महर्षियों ने मुख्यतया तीन प्रकार के उपायों की अनुशंसा की है यथा तन्त्र, मन्त्र एवं यन्त्र। इन तीनों में से तीसरा उपाय सर्वाधिक उल्लेखनीय एवं करने में सहज है। इसी में से एक उपाय है रत्न धारण करना। ऐसा माना जाता है कि कोई न कोई रत्न हर ग्रह से सम्बन्धित है तथा यदि कोई व्यक्ति वह रत्न धारण करता है तो उस ग्रह के द्वारा सृजित अशुभत्व में काफी कमी आती है। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में अनेक महत्वपूर्ण आलेखों को समाविष्ट किया गया है जिसमें से प्रमुख हैं- चैरासी रत्न एवं उनका प्रभाव, विभिन्न लग्नों में रत्न चयन, ज्योतिष के छः महादोष एवं रत्न चयन, रोग भगाएं रत्न, रत्नों का शुद्धिकरण एवं प्राण-प्रतिष्ठा, कितने दिन में असर दिखाते हैं रत्न, लाजवर्त मणि-एक नाम अनेक काम इत्यादि। इसके अतिरिक्त स्थायी स्तम्भों के भी महत्वपूर्ण आलेख विद्यमान हैं।

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