कितने दिन में असर दिखाते हैं रत्न

कितने दिन में असर दिखाते हैं रत्न  

व्यूस : 34507 | फ़रवरी 2006

रत्नों की कार्य पद्धति पर अनेक विचार प्रकट किए जाते हैं। हर रत्न का रंग एवं गुण दोनों एक दूसरे से बिल्कुल भिन्न होते हंै। ये कार्य भी अलग-अलग करते हैं। कुछ रत्न जल्दी असर दिखाना शुरू कर देते हैं तो कुछ धीरे-धीरे। रत्नों के परिणाम कितने दिन में दिखाई पड़ते हैं इसका विवरण इस प्रकार है।

मोती 3 दिन माणिक्य 30 दिन मूंगा 21 दिन पन्ना 7 दिन पुखराज 15 दिन नीलम 2 दिन हीरा 22 दिन गोमेद 30 दिन लहसुनिया 30 दिन ज्योतिष में रत्न को किन उंगलियों में धारण करना चाहिए इस पर भी विवरण मिलता है। हमारा शरीर निरंतर ऊर्जा ग्रहण और उसका ह्रास करता रहता है। हमारे पैरों के अंगूठे से सर्वाधिक ऊर्जा का ह्रास होता है। हमारी दो भौंहों के बीच का स्थान सर्वाधिक ग्रहणशील है। इसलिए पुराने जमाने में राजे महाराजे इसी स्थान पर अपने मुकुट में अपना शुभ रत्न जड़वा लेते थे। लेकिन अब समय बदल गया है।

इस स्थान पर रत्न नहीं पहन सकते। दूसरे स्थान हैं गर्दन, हृदय और हाथों की उंगलियां। हमारी उंगलियों से निरंतर ऊर्जा बहती रहती है। क्रिलियोन फोटोग्राफी द्वारा देखने पर तर्जनी से पीले, मध्यमा से बैंगनी, अनामिका से लाल, कनिष्ठिका से हरे और अंगूठे से नारंगी रंग की ऊर्जा निकलती हुई पाई गई। इसी आधार पर रत्न धारण करने पर रत्न का पूरा लाभ मिलता है। तर्जनी: तर्जनी पर गुरु का अधिकार है। पुखराज इसी उंगली में धारण करना चाहिए। मोती, टोपाज, चंद्रमणि भी धारण कर सकते हैं। मध्यमा: मध्यमा पर शनि का अधिकार है। इस उंगली में नीलम धारण करना चाहिए। हीरा, गोमेद और लहसुनिया भी इस उंगली में धारण कर सकते हैं। अनामिका: यह उंगली सूर्य की है। माणिक्य और मूंगा इस उंगली में धारण करने चाहिए। कनिष्ठिका: यह उंगली बुध की है।

पन्ना और जेड इस उंगली में धारण करने चाहिए। स्त्रियां रत्न बाएं हाथ मंे और पुरुष दाहिने हाथ में धारण करें। रत्न धारण करते समय दिन और मुहूर्त का ध्यान अवश्य रखना चाहिए। रत्नों के वजन और दिन के संबंध में निम्न तालिका का उपयोग कर सकते हैं। रत्न वजन(कैरेट) दिन माणिक्य 5-8 रविवार मोती 4-6 सोमवार मूंगा 6-8 मंगलवार पन्ना 3-5 बुधवार पुखराज 4-8 गुरुवार नीलम 4-8 शनिवार हीरा 1-2 शुक्रवार लहसुनिया 5-10 बुधवार गोमेद 5-10 शनिवार रत्न धारण संबंधित ग्रह के होरा में करें तो और भी उत्तम होता है।

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रत्न विशेषांक  फ़रवरी 2006

हमारे ऋषि महर्षियों ने मुख्यतया तीन प्रकार के उपायों की अनुशंसा की है यथा तन्त्र, मन्त्र एवं यन्त्र। इन तीनों में से तीसरा उपाय सर्वाधिक उल्लेखनीय एवं करने में सहज है। इसी में से एक उपाय है रत्न धारण करना। ऐसा माना जाता है कि कोई न कोई रत्न हर ग्रह से सम्बन्धित है तथा यदि कोई व्यक्ति वह रत्न धारण करता है तो उस ग्रह के द्वारा सृजित अशुभत्व में काफी कमी आती है। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में अनेक महत्वपूर्ण आलेखों को समाविष्ट किया गया है जिसमें से प्रमुख हैं- चैरासी रत्न एवं उनका प्रभाव, विभिन्न लग्नों में रत्न चयन, ज्योतिष के छः महादोष एवं रत्न चयन, रोग भगाएं रत्न, रत्नों का शुद्धिकरण एवं प्राण-प्रतिष्ठा, कितने दिन में असर दिखाते हैं रत्न, लाजवर्त मणि-एक नाम अनेक काम इत्यादि। इसके अतिरिक्त स्थायी स्तम्भों के भी महत्वपूर्ण आलेख विद्यमान हैं।

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