ईशान का कटाव - धन व स्वास्थ्य का रिसाव

ईशान का कटाव - धन व स्वास्थ्य का रिसाव  

पिछले दिनों पंडित जी ग्रीन पार्क एक्सटेन्शन, दिल्ली में वास्तु निरीक्षण के लिये गये। वहाँ कोठी का पुनः निर्माण हो रहा था। वहाँ पहुँचने पर घर के मालिक ने बताया कि जब से इस इमारत का निर्माण शुरु किया है तब से ही पंैसे की तंगी होती जा रही है घर के सदस्यों के स्वास्थ्य पर अधिक खर्च हो रहा है। पंडित जी द्वारा बेसमेंट, स्टिलट व भू-तल के निरीक्षण के उपरान्त किया गया विश्लेषण, ज्योतिष जगत की दैदीप्यमान पत्रिका ’फ्यूचर समाचार’ के प्रबुद्ध पाठकों के लाभार्थ प्रस्तुत है। अवलोकन/उपायः- - भूतल, प्रथम व द्वितीय तल एक सा बना हुआ था। - दक्षिण पश्चिम में भारतीय पुरातन पद्धति का शौचालय था जिसके कारण वहाँ पानी व गड्ढा रहने से धन हानि होते रहने की संभावना रहती है। इस शौचालय को यहाँ से पश्चिम की ओर हटायें या डब्ल्यू सी वाल माउन्टेड लगायें अवश्य लाभ होगा। - दक्षिण- पश्चिम में नौकरों के लिये घुमावदार सीढियां (स्पाईरल) हैं जिसके कारण पेट से संबंधित समस्यायें जैसे आॅपरेशन, इन्न्फेक्शन, पेट दर्द आदि, बनी रहती हैं। कृप्या इसे चारदीवारी या मकान की पिछली दीवार से लगाकर खुला (बिना छत) बनायें। - दक्षिण-पश्चिम घर के मुखिया का स्थान होता है। वहाँ पर मेहमान कक्ष बनाने से मेहमान ज्यादा दिन तक घर में ही बना रहता है और घर के सदस्यों पर हावी रहता है। कृप्या यहाँ पर घर के मुख्य सदस्य का कक्ष स्थानांतरित करें। - पश्चिम में डायनिंग टेबल अच्छा है। - उत्तर-पश्चिम और उत्तर में लिविंग कक्ष अच्छा है परन्तु इस दिशा में हल्का फर्नीचर रखना चाहिए अन्यथा मानसिक तनाव रहता है। - उत्तर-पूर्व कटा हुआ है जो कि बिल्कुल अच्छा नहीं है जिसके कारण वंश वृद्धि में रुकावट होती है तथा धन से संबंधित समस्यायें रहती हैं। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए इस दिशा में परगोला या लकड़ी का जाल लगवायें, चहुंमुखी विकास होगा। - उत्तर-पूर्व में लिफ्ट है जो कि बहुत अच्छी है परन्तु इसी के साथ पूर्व में मुख्य सीढ़ियाँ हैं जिसके कारण अस्थमा या छाती से संबंधित रोग होने की संभावना रहती है। इसलिये इन सीढ़ियों को यहाँ से हटाना ही श्रेयस्कर रहेगा। अच्छा होगा हम इन्हें पीछे दक्षिण पूर्व/दक्षिण में ले जायें। - दक्षिण में रसोई हो सकती है परन्तु दक्षिण में गैस-स्टोव और दक्षिण-पूर्व में सिंक होने से पैसे के आवागमन में रुकावट एवं मानसिक तनाव बना रहता है। इसलिये गैस स्टोव को पूर्व में रखें और सिंक को पश्चिम में रखें। अच्छा होगा कि रसोई व सीढ़ियों को अदल-बदल दें। - दक्षिण-पूर्व का कोना कटा हुआ है जिसके कारण संतान को परेशानी रह सकती है और दाम्पत्य संबंधों में भी तनाव बना रह सकता है। इसका प्रभाव कम करने के लिये यहाँ पर परगोला या स्टील का जाल लगवायें। एक छोटा कमरा या पूजा स्थान भी बनाया जा सकता है। नोटः- उपरोक्त समस्याओं एवं सुझावों को ध्यान में रखते हुये सुझाया गया संशोधित नक्शा भी दिया जा रहा है। परन्तु इसमें लिफ्ट तहखाने में नहीं जायेगी क्योंकि आग्नेय कोण में हम गड्ढा नहीं रख सकते, यह स्त्रियों के स्वास्थ्य को खराब करता है तथा आकस्मिक दुर्घटना का कारण बन सकता है।


वास्तु विशेषांक  दिसम्बर 2015

वास्तु संरचना का विज्ञान है जिसका उद्देश्य मनुुष्य की सुख समृद्धि है। हर संरचना चाहे वह घर हो अथवा दुकान अथवा फैक्ट्री अथवा कार्यालय, प्रत्येक संरचना के निर्माण में वास्तु नियमों का अनुपालन किया जाना आवश्यक है। यदि कोई भी संरचना वास्तु सम्मत नहीं हैं तो यह अनेक प्रकार की आर्थिक, स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं, दुःख, वैवाहिक जीवन में कठिनाई, पारिवारिक विवाद आदि को जन्म देता है। फ्यूचर समाचार के वास्तु सम्बन्धित इस विशेषांक में अनेक उल्लेखनीय आलेखों को समाविष्ट किया गया है जिसमें वास्तु के महत्वपूर्ण सिद्धान्तों का विश्लेषण सूक्ष्मता से किया गया है। इनमें से अति महत्वपूर्ण आलखों में शामिल हैं: नारद पुराण में वास्तुशास्त्र का सूक्ष्म वर्णन, वास्तु शास्त्र में पंच तत्व, भवन निर्माण में वास्तुशास्त्र का महत्व, वास्तु शास्त्र एक वैज्ञानिक पद्धति, वास्तु शास्त्र एवं धर्म, दिशा दोष दूर करने के वास्तु उपाय, फेंग शुई और वास्तु में अंतर और समानताएं, वास्तु एवं फेंग शुई के उपाय, मल्टीस्टोरी फ्लैट की वास्तुु की उपयोगिता एवं व्यवस्था, फ्लैट खरीदने में किन बातों का खयाल रखें आदि। इसके अतिरिक्त इस विशेषांक में सभी स्थाई स्तम्भों का समावेश भी पूर्व की भांति किया गया है जिसमें विविध आयामी आलेख सम्मिलित हैं।

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