कनिका आज बहुत थक गई थी पूरा दिन वह प्रसूति गृह में एक के बाद एक आॅप्रेशन कर बच्चों का जन्म करवा रही थी। दिन के अंत में जहां पूरा दिन काम करने के बाद थकान तो होती है पर उसके मन को बहुत सुकून मिलता है कि आखिर उसने अपना बरसांे से संजोया सपना पूरा कर ही लिया। बचपन से ही वह डाॅक्टर बनना चाहती थी और उसके मम्मी पापा ने भी उसके सपनांे को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उसे अच्छे स्कूल में पढ़ाया, अच्छे काॅलेज से उसने एम. बी. बी. एस. और एम. डी. किया और आज वह एक सीनियर गायनेकोलाॅजिस्ट के रूप में दिल्ली के विख्यात अस्पताल में कार्यरत है। उसकी बरसों की मेहनत रंग लाई थी। आज उसकी रात की ड्यूटी थी इसलिए वह अपने कक्ष में सुस्ता रही थी। तभी उसे सुबह पापा की कही बात याद आ गई कि अब वे उसकी मम्मी से कह रहे थे कि अब तुम लड़के की जात पात पर मत सोचो, बहुत समय बर्बाद कर लिया आजकल तो अंतर्जातीय विवाह खूब हो रहे हैं। इसलिए कनिका के लिए भी अंतर्जातीय विवाह में कोई फर्क नहीं पड़ता। कनिका यह सुनकर चैंक पड़ी थी और अब सोच रही थी कि ये वही माता पिता हैं जिन्होंने उसकी पसंद के कार्तिक को इसीलिए ठुकरा दिया था क्योंकि वह उनकी जात का नहीं था। कितना प्यार करती थी वह कार्तिक से और कितना गिड़गिड़ाई थी, रोई थी पर उसके मां-बाप नहीं माने और अब जब माने हैं तो बहुत देर हो चुकी है। कार्तिक से उसकी मुलाकात काॅलेज में हुई थी। दोनों साथ-साथ पढ़ते थे। वह बहुत होशियार था तथा कुछ बड़ा करने की ख्वाहिश रखता था। एम. डी करने के बाद मुंबई में उसकी एक बड़े अस्पताल में नौकरी लग गई थी और कनिका को भी उसी हाॅस्पीटल से आॅफर था। दोनों ने यही सोचा था कि दोनों पहले कुछ समय काम करेंगे और फिर अपना अस्पताल खोल लेंगे। इन्हीं सपनों को लिए वह अपने घर दिल्ली आई थी। उसके माता-पिता उसके लिए अपनी बिरादरी में लड़का ढूंढ़ रहे थे लेकिन जब उसने उन्हें कार्तिक के बारे में बताया तो उन्होंने जमीन आसमान एक कर दिया और उसे साफ मना कर दिया गया। कनिका के जिद करने पर उसके माता-पिता मार पीट तक पर उतर आए, उसका मोबाईल फोन छिन लिया गया। कंप्यूटर तक घर से हटा लिया गया और उसका घर से निकलना तक बंद कर दिया गया। दो महीनों तक वह अपने दोस्तों से और कार्तिक से बात नहीं कर पाई और उसके विद्रोह करने पर उसकी सख्ती से पिटाई भी की गई और उधर उन्होंने कार्तिक के घर पर उसके माता-पिता और स्वयं कार्तिक को भी धमकियां दे डाली कि अगर कनिका से मिलने की कोशिश भी की तो जान की खैर नहीं। दोनों बुरी तरह से टूट चुके थे। कनिका ने किसी तरह से एक बार कार्तिक को फोन किया और रो-रोकर अपनी आप-बीती बताई तो कार्तिक ने उसका पूरा साथ देने का वायदा किया और कहा कि वह उसका इंतजार कर रहा है और करता रहेगा पर इधर कनिका की घर में किसी ने एक न सुनी। प्यारी सी कनिका मुरझा कर एक दम सूख गई पर माता-पिता ने अपनी बेटी की कोई सुध नहीं ली। उसको अस्पताल खुद छोड़ने जाते और खुद ही लेने जाते। इसी तरह से करीब छह महीने बीत गये। धीरे-धीरे कार्तिक के फोन भी आने बंद हो गए। कनिका जो सिर्फ कार्तिक की आस पर जी रही थी वह बिल्कुल टूट गई और जब उसे कहीं से भी कोई प्यार का आसरा न रहा तो उसने आत्महत्या की कोशिश की और अपने हाथ की नस काट ली पर वह बच गई क्योंकि अभी उसे बहुत कुछ सहना था। ठीक होकर उसने कार्तिक से बात करनी चाही तो कार्तिक ने साफ कह दिया कि वह डर के साए में रहकर उससे शादी नहीं कर सकता और अब वह अपने माता-पिता के बताए रिश्ते से ही विवाह कर रहा है और इस तरह से उसका हमसफर कार्तिक उससे जुदा हो गया। कनिका ने खुद को अपने आप में समेट लिया और पूरी तरह से अपने आप को अस्पताल में झोंक दिया। अब वह सारी रात ड्यूटी करती ताकि घर कम से कम जाना पड़े। उसे अपने माता-पिता से नफरत सी हो गई थी जिनके कारण उसका प्यार उससे छिन गया और आज वही माता-पिता अंतर्जातीय शादी की बात कर रहे हैं जबकि आज वह अपने विवाह को लेकर तटस्थ सी हो गई है। उसके लिए उसके माता-पिता ने कितने ही लड़के देखे पर कहीं कोई बात नहीं बनी और जब भी कहीं से बात खत्म होती तो वह उसके मन में दुख के साथ-साथ अपने माता-पिता के लिए चुनौती भी होती कि अब ढंूढ़ो अपनी बिरादरी में अपनी पसंद का। मेरी पसंद को तो इतनी बेदर्दी से ठुकरा दिया। कनिका इसी सोच में डूबी थी कि नर्स ने आकर बताया कि एक आपातकालीन केस आ गया है और कनिका उठ पड़ी एक और बच्चे की डिलिवरी करवाने। कनिका की कुंडली का ज्योतिषीय विश्लेषण कनिका की जन्मकुंडली के अनुसार उसकी सम राशि तथा सम लग्न है जिसके कारण वह काफी सौम्य स्वभाव की है और भावुक भी है और अपने दिल से अधिक सोचती है। तृतीयेश चंद्रमा तृतीय भाव में स्वराशि के होने से वह अपने काम को बहुत निष्ठा से करती है तथा हर समय कुछ नया सीखने का प्रयास करती रहती है। अधिक सीखने की चाह में ही वह अपनी प्राइवेट अस्पताल की नौकरी छोड़कर दिल्ली के नामी प्रतिष्ठित सरकारी संस्थान में नौकरी कर रही है ताकि ज्यादा से ज्यादा केस कर सके और नई-नई जानकारी हासिल कर सके। पंचमेश बुध अपनी उच्च राशि में चतुर्थेश सूर्य तथा लग्नेश शुक्र के साथ होने से कनिका ने मेडिसिन के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त की तथा मंगल और शनि की परस्पर दृष्टि संबंध तथा पंचम कारक गुरु की मंगल पर दृष्टि होने के कारण एक सफल प्रसूति विशेषज्ञ बनी। दशमेश शनि केंद्र में स्थित है तथा नवमांश में भी अपने स्वनवांश में होने से कनिका को उच्च पद और प्रतिष्ठा प्राप्त हुई। कनिका के वैवाहिक स्थिति पर विचार करें तो सप्तम स्थान में शत्रु राशि में स्थित शनि एवं सप्तमेश मंगल की परस्पर दृष्टि संबंध के कारण उसके विवाह में अनेक बाधाएं आ रही हैं और अनावश्यक विलंब हो रहा है। प्रेम संबंध की दृष्टि से भी देखें तो पंचम स्थान में नीचस्थ शुक्र की सूर्य एवं केतु के साथ युति होने से तथा पंचम कारक गुरु की कमजोर स्थिति होने से कनिका का प्रेम संबंध बीच में ही टूट गया और कार्तिक उसका हमसफर नहीं बन पाया। कनिका की कुंडली में सूर्य तथा चंद्र दोनों ही शून्य अंश के होकर अत्यंत कमजोर हो गये हैं जिसके कारण माता-पिता का सपोर्ट नहीं मिला और कनिका को शारीरिक यातनाएं भी झेलनी पड़ीं। वर्तमान समय में बुध की महादशा चल रही है। बुध पंचमेश होकर पंचम स्थान में स्वराशि में होने से शुभ फल प्रदान कर रहे हैं इसीलिए कनिका को एक प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान में नौकरी मिली। बुध की दशा इसके प्रोफेशन की दृष्टि से बहुत अच्छी रहेगी और ऊंचे मुकाम तक पहुंचाएगी। आगे बुध में सूर्य आने पर फिर से कनिका के जीवन मे कोई दस्तक दे सकता है जिसे वह अपने जीवन का असली हमसफर बना सकेगी।


वास्तु विशेषांक  दिसम्बर 2015

वास्तु संरचना का विज्ञान है जिसका उद्देश्य मनुुष्य की सुख समृद्धि है। हर संरचना चाहे वह घर हो अथवा दुकान अथवा फैक्ट्री अथवा कार्यालय, प्रत्येक संरचना के निर्माण में वास्तु नियमों का अनुपालन किया जाना आवश्यक है। यदि कोई भी संरचना वास्तु सम्मत नहीं हैं तो यह अनेक प्रकार की आर्थिक, स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं, दुःख, वैवाहिक जीवन में कठिनाई, पारिवारिक विवाद आदि को जन्म देता है। फ्यूचर समाचार के वास्तु सम्बन्धित इस विशेषांक में अनेक उल्लेखनीय आलेखों को समाविष्ट किया गया है जिसमें वास्तु के महत्वपूर्ण सिद्धान्तों का विश्लेषण सूक्ष्मता से किया गया है। इनमें से अति महत्वपूर्ण आलखों में शामिल हैं: नारद पुराण में वास्तुशास्त्र का सूक्ष्म वर्णन, वास्तु शास्त्र में पंच तत्व, भवन निर्माण में वास्तुशास्त्र का महत्व, वास्तु शास्त्र एक वैज्ञानिक पद्धति, वास्तु शास्त्र एवं धर्म, दिशा दोष दूर करने के वास्तु उपाय, फेंग शुई और वास्तु में अंतर और समानताएं, वास्तु एवं फेंग शुई के उपाय, मल्टीस्टोरी फ्लैट की वास्तुु की उपयोगिता एवं व्यवस्था, फ्लैट खरीदने में किन बातों का खयाल रखें आदि। इसके अतिरिक्त इस विशेषांक में सभी स्थाई स्तम्भों का समावेश भी पूर्व की भांति किया गया है जिसमें विविध आयामी आलेख सम्मिलित हैं।

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