वास्तु कि नजर में कोणार्क का सूर्य मंदिर

वास्तु कि नजर में कोणार्क का सूर्य मंदिर  

व्यूस : 4812 | नवेम्बर 2007
वास्तु की नजर में कोणार्क का सूर्य मंदिर पं. दयानंद शास्त्राी भारत में अनेक धर्म एवं जातियां हैं तथा वे सभी किसी न किसी शक्ति की पूजा आराधना करते हैं। सबकी विधियां अलग हैं परंतु सभी एक ऐसे एकांत स्थान पर आराधना करते हैं, जहां पूर्ण रूप से ध्यान लगा सकें, मन एकाग्र हो पाए। इसीलिए मंदिर निर्माण में वास्तु का बहुत ध्यान रखा जाता है। यदि हम भारत के प्राचीन मंदिरों पर नजर डालें तो पता चलता है कि सभी का वास्तुशिल्प बहुत अधिक सुदृढ़ था। वहां भक्तों को आज भी आत्मिक शांति प्राप्त होती है। वैष्णों देवी मंदिर, ब्रदीविशाल जी का मंदिर, तिरुपति बालाजी का मंदिर, नाथद्व ारा स्थित श्रीनाथ जी का मंदिर व उज्जैन स्थित भगवान महाकाल का मंदिर कुछ ऐसे मंदिर हैं जिनकी ख्याति व मान्यता दूर दूर तक, यहां तक कि विदेशों में भी, है। ये सभी मंदिर वास्तु नियमानुसार बने हैं तथा प्राचीनकाल से वैसी ही स्थिति में खड़े हैं। सूर्य मंदिर कोणार्क: यह जगन्नाथ पुरी से 36 किलोमीटर दूर समुद्र के निकट बना हुआ है। कभी यह सूर्य उपासना का प्रधान पीठ हुआ करता था। इसका निर्माण सन् 1200 ई. में उत्कल नरेश लांगुला नरसिंह देव जी ने किया था। इसे 12 वर्ष में लगभग 1 हजार से अधिक शिल्पियों ने कड़ी मेहनत से तैयार किया था। इस मंदिर की नक्काशी, कारीगरी एवं खुदाई का कौशल देखकर प्रत्येक व्यक्ति दंग रह जाता है। इस मंदिर का निर्माण एक रथ आकृति में करवाया गया था। इसमें 24 पहिए हैं। प्रत्येक पहिए में 8 आरा हैं और इस पहिए का व्यास लगभग 10 फुट है। सभी पहियों का शिल्प उत्कृष्ट कला का नमूना है। सभी पहिए एक लाट से जुड़े हुए हैं। दोनों तरफ 12-12 पहिए हैं। यह मंदिर तीन मंडपों में बना हुआ है। दो मंडप ढह चुके हैं। आजादी से पूर्व एक अंग्रेज अधिकारी ने जहां प्रतिमा थी उस मुख्य मंडप को रेत व पत्थर भरवाकर चारों तरफ से बंद करवा दिया। सभी दरवाजों को भी चुनाई करवाकर स्थायी रूप से बंद करवा दिया ताकि यह मंदिर व मंडप सुरक्षित रह सकें। इस मंदिर में सूर्य भगवान की तीन प्रतिमाएं हैं- बाल्यावस्था - उदित सूर्य - इनकी ऊंचाई लगभग 8 फुट है। युवावस्था - मध्याह्न सूर्य - इनकी ऊंचाई लगभग साढ़े 9 फुट है। प्रौढ़ावस्था - अस्त सूर्य - इनकी ऊंचाई लगभग साढ़े 3 फुट है। इस मंदिर में मुख्य प्रवेश द्वार के दोनों तरफ दोनों हाथियों को ऐश्वर्य पूर्व शेर ने दबा रखा है। यह प्रतिमा एक ही पत्थर से बनी है। लगभग 28 टन वजनी इस प्रतिमा की लंबाई 8.4 फुट, चैड़ाई 4.9 फुट और ऊंचाई 9.2 फुट है। मंदिर के दक्षिण भाग में दो सुसज्जित एवं अलंकृत घोड़े बने हुए हैं। प्रत्येक घोड़ा 10 फुट लंबा एवं 7 फुट चैड़ा है। इन्हें उड़ीसा सरकार ने अपनी राजकीय मोहर के रूप में स्वीकार किया है। मंदिर परिसर में नृत्यशाला, मायादेवी मंदिर और छाया देवी मदिर एवं आग्नेय क्षेत्र में विशाल कुआं हंै। आठ सौ वर्ष पुराना यह मंदिर बिना किस सीमेंट या मसाले के पत्थर व लोहे से बनाया गया था। यह मंदिर अपने वास्तु दोषों के कारण समय से पूर्व ही कान्तिविहीन हो गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि जहां कहीं भी वास्तु दोष होगा, वहां वह अपना प्रभाव अवश्य दिखाएगा। चाहे वह कोई देवालय हो अथवा आम व्यक्ति का निवास स्थान। वास्तु नियमों के विरुद्ध बना होने से विश्व की प्राचीनतम इमारतों में से एक यह सूर्य मंदिर, जो ऋग्वेद काल एवं पाषाण कलाकृति का अनुपम व बेजोड़ उदाहरण है , समय से पूर्व ही धाराशायी हो गया। यह मंदिर अपना वास्तविक रूप खो चुका है। वर्तमान में यह विश्व सांस्कृतिक विरासत के रूप में संरक्षित है। इससे थोड़ी दूर पर समुद्र है जो चंद्रभागा के नाम से प्रसिद्ध है। यह स्थान भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र की दंतकथा के कारण भी प्रसिद्ध है। कोणार्क सूर्य मंदिर के मुख्य वास्तु दोष दक्षिण-पश्चिम कोण में छाया देवी मंदिर की नींव प्रधानालय की अपेक्षा काफी कम ऊंचाई में है। उसके र्नैत्य भाग में मायादेवी का मंदिर और नीचे भाग में है। पूर्व से देखने पर पता लगता है कि ईशान, आग्नेय को काटकर वायव्य, र्नैत्य की ओर बढ़ा हुआ है। प्रधान मंदिर के पूर्वी द्वार के सामने नृत्यशाला है जिससे पूर्व द्वार अनुपयोगी सिद्ध हुआ। मंदिर का निर्माण रथ की आकृति में होने के कारण पूर्व, ईशान व आग्नेय दिशाएं खंडित हो गई हैं। आग्नेय क्षेत्र में विशाल कुआं स्थित है। मायादेवी और छाया देवी के मंदिर प्रधान मंदिर से कम ऊंचाई पर र्नैत्य क्षेत्र में हैं। दक्षिण व पूर्व दिशा में विशाल द्वार हैं जिसके कारण मंदिर का वैभव व ख्याति क्षीण हो गई है।

Ask a Question?

Some problems are too personal to share via a written consultation! No matter what kind of predicament it is that you face, the Talk to an Astrologer service at Future Point aims to get you out of all your misery at once.

SHARE YOUR PROBLEM, GET SOLUTIONS

  • Health

  • Family

  • Marriage

  • Career

  • Finance

  • Business

तंत्र, मंत्र एवं महालक्ष्मी विशेषांक   नवेम्बर 2007

तंत्र मंत्र का आपसी सम्बन्ध, महालक्ष्मी जी की उपासना एवं दीपावली पूजन, तंत्र मंत्र द्वारा धन प्राप्ति, श्री प्राप्ति में सहायक श्री यंत्र, दीपावली पर की जाने वाली तांत्रिक सिद्धियां, श्री सूक्त, लक्ष्मी सूक्त आदि मन्त्रों का महत्व

सब्सक्राइब


.