चारदीवारी के बाहर दक्षिण की ओर झील वास्तु अनुरूप बने बंगले पर भी भारी

चारदीवारी के बाहर दक्षिण की ओर झील वास्तु अनुरूप बने बंगले पर भी भारी  

नवंबर 2009 में दुबई के एक प्रतिष्ठित सिंधी व्यवसायी के बंगले का वास्तु निरीक्षण किया गया। व्यवसायी ने एमिरेट्स हिल्स में यह बना बनाया बंगला खरीदा था। जिनसे खरीदा था वह खुद बिल्डर हैं। काफी प्रयत्नों के पष्चात भी वह उस मकान में प्रवेश नहीं कर सके और मकान पूरा होने के बावजूद उसे बेचना पड़ा। नए खरीददार ने महसूस किया कि जब से उसे खरीदा है तब से पति-पत्नी में अनावश्यक तकरारें बढ़ गई हैं। ग्राहकों से तनाव तथा मनमुटाव दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है और व्यापार में अप्रत्याशित नुकसान होने शुरू हो गए हैं। वास्तु निरीक्षण करने पर निम्नलिखित दोष पाए गए। Û दक्षिण की ओर काफी बड़ी झील थी। इस दिशा में नीचाई एवं पानी होने से परिवार में गलतफहमी, आपसी मतभेद, कलह, क्लेश, आर्थिक एवं स्वास्थ्य समस्याएं आदि होने की संभावना रहती है। Û प्लाॅट का दक्षिणी हिस्सा बढ़ा हुआ था, जिससे दक्षिण-पश्चिम एवं दक्षिण-पूर्व कोण कट रहे थे जो एक गंभीर वास्तु दोष है। इससे घर में रहने वालों को सभी ओर से परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। Û तरणताल (स्विमिंग पूल) की दिशा तो सर्वोŸाम थी परंतु उसका कुछ हिस्सा विकर्ण रेखा के ऊपर आ रहा था जिसके फलस्वरूप उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर बहती सकारात्मक ऊर्जा में बाधा उत्पन्न हो रही थी। Û बिल्डिंग का दक्षिणी हिस्सा बढ़ा हुआ था जो अनचाहे खर्चों, स्वास्थ्य हानि एवं आपसी कलह का कारण होता है। सुझाव Û चूंकि सरकार द्वारा बाहर की दीवार से छेड़-छाड़ की अनुमति नहीं है, इसलिए प्लाॅट के बढ़े हुए हिस्से का प्रभाव कम करने के लिए 4 फुट ऊंची दीवार बनवाई गई और पीतल के 99 पिरामिड लगवाने की सलाह दी गई। Û झील का प्रभाव कम करने के लिए बढ़े हुए हिस्से में ऊंचे-ऊंचे पेड़ लगाने की सलाह दी गई एवं अंदर की चारदीवारी के बाहर की ओर से उस पर सफेद पेंट करके उस पर लाल रंग की खड़ी लाइनें (जेब्रा क्राॅसिंग की तरह) बनाने को कहा गया। Û बिल्डिंग के बढ़े हिस्से के दोनों तरफ (दक्षिण-पश्चिम एवं दक्षिण-पूर्व में) लकड़ी का परगोला बनाने के लिए कहा गया। Û तरणताल (स्विमिंग पूल) को विकर्ण रेखा से हटाने को कहा गया। 17-19 दिसंबर में आयोजित ‘दुबई इंडियन प्राॅपर्टी शो’’ में भाग लेने गए पंडितजी को बताया गया कि सिर्फ दीवार पूरी होने से ही हर दिशा में बहुत सुधार महसूस किया जा रहा है तथा अन्य सुधार कार्य प्रगति पर है।


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