नैर्ऋत्य के दुष्परिणाम

नैर्ऋत्य के दुष्परिणाम  

कुछ दिन पहले पंडित जी संगरूर के श्री श्याम गर्ग जी के घर का निरीक्षण करने गये। वहाँ पर श्री गर्ग जी ने उन्हें बताया कि इस घर को बनाने से पहले सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन जब से इसे बनाया है रोजाना कोई न कोई समस्या खड़ी रहती है। दो बार दुर्घटना में चोट लगते-लगते रह चुकी है। उन्होंने बताया कि एक वास्तुशास्त्री के सुझाव से हमने दक्षिण/दक्षिण-पश्चिमी भाग के फर्श को ऊँचा भी करवाया था परन्तु लगता है अब भी कुछ वास्तु सुधार आवश्यक है। पंडित जी द्वारा बताए गये सुझाव: पंडित जी ने निरीक्षण के पश्चात बताया कि घर का मुख्य द्वार दक्षिण-पश्चिम में था जिसके कारण घर का मालिक ज्यादातर घर से बाहर रहता है धन-हानि एवं अस्वस्थता होती है। रसोई में चूल्हा दक्षिण-पश्चिम में था जिसके कारण घर में रहने वाली स्त्रियों का स्वास्थ्य खराब होने की संभावना बनी रहती है। खुला पोर्च (इस स्थान पर छत न होना) होने से या तो यह माना जाएगा कि पश्चिम क्षेत्र कट गया है या दक्षिण में रसोई तथा दक्षिणी पश्चिमी क्षेत्र में ड्राईंग रूम का हिस्सा बढ़ गया है। इन दोषों से बीमारी, अनावश्यक खर्चे, आपसी मनमनुटाव हो जाते हैं। दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में आगे लाॅन में बोरिंग होना भी एक मुख्य वास्तु दोष था। इससे एक्सीडेंट, बीमारी व हर काम में रूकावट पैदा होती रहती है। पंडित जी ने मुख्य द्वार के दोष को कम करने के लिये रैम्प बनवाया तथा एक इंच वाले 9 पीले पिरामिड़ दहलीज के नीचे चाँदी की पत्ती के साथ दबवायें। रैम्प के ऊपरी फर्श का रंग भी पीले रंग का करवाया। रसोई के आगे बालकनी को बड़ा बनाकर उसे एक कोने से दक्षिणी दीवार व दूसरे कोने से पश्चिमी चारदीवारी पर पिलर/पाईप खड़े कर के मिलवा दिया। रसाईघर में चूल्हे की दिशा को बदलकर गृहिणी का मुख खाना पकाते समय पूर्व की तरफ करवाया गया। दक्षिण-पश्चिम से बोरिंग को हटाकर पीछे लाॅन में लगवाया गया। पूर्व में पीछे शौचालय बाहर निकला हुआ है परन्तु पूर्व में शौचालय भी हो सकता है तथा विस्तार भी स्वीकार्य है। पंडित जी ने विश्वास दिलाया कि इन सब सुझावों को क्रियान्वित करने से जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आश्चर्यजनक सुधार होगा। प्रष्न: पंडित जी हम आर्थिक समस्याओं से काफी परेशान हैं जिससे घर में मानसिक तनाव बना रहता है। कृपया नक्शा देखकर मार्गदर्शन करें। श्री मनीष गुप्ता, दिल्ली उत्तर: आपके घर के दक्षिण- पश्चिम में मुख्य द्वार है जिससे अनावश्यक खर्चे होते रहते हैं और घर के मालिक का घर में मन नहीं लगता अर्थात घर से दूर रहता है। इसके नकारात्मक दोष को कम करने के लिए मुख्य द्व ार पर दहलीज बनाएं और उसके नीचे चाँदी की पत्ती व नौ छोटे पिरामिड़ दबाएं। दहलीज लकड़ी या मारबल की बना सकते हैं। दहलीज पर पीला पेंट करना और भी लाभदायक होगा। घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक लगाएँ और द्वार के ऊपर बाहर की तरफ पाकुआ शीशा लगाएं। आपके घर में उत्तर-पूर्व के कोने में रखे पलंग को दीवार से कुछ आगे करें जिससे वह कोना बंद न हो। उत्तर पूर्व में सिर करके सोने से स्वास्थ्य खराब होता है मुख्यतः मानसिक परेशानियाँ बनी रहती हैं। सिर दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम की तरफ करके सोएं। शौचालय के बाहर दक्षिण-पश्चिम की दीवार पर वाॅश बेसिन पर लगे शीशे को हटाना भी लाभदायक होगा।

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शारीरिक हाव भाव एवं लक्षण विशेषांक  आगस्त 2014

सृष्टि के आरम्भ से ही प्रत्येक मनुष्य की ये उत्कट अभिलाषा रही है कि वह किसी प्रकार से अपना भूत, वर्तमान एवं भविष्य जान सके। भविष्य कथन विज्ञान की अनेक शाखाएं प्रचलित हैं जिनमें ज्योतिष, अंकषास्त्र, हस्त रेखा शास्त्र, शारीरिक हाव-भाव एवं लक्षण शास्त्र प्रमुख हैं। हाल के वर्षों में शारीरिक हाव-भाव एवं अंग लक्षणों से भविष्यवाणी करने का प्रचलन बढ़ा है। वर्तमान अंक में शारीरिक हाव-भाव एवं अंग लक्षणों से भविष्यवाणी कैसे की जाती है, इसका विस्तृत विवरण विभिन्न लेखों के माध्यम से समझाया गया है।

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