घर में पौधे लगाएं, वास्तु दोष दूर भगाएं

घर में पौधे लगाएं, वास्तु दोष दूर भगाएं  

तुलसी - हिन्दू धर्म में तुलसी के पौधे को एक तरह से लक्ष्मी का रूप माना गया है। आपके घर में यदि किसी भी तरह की निगेटिव एनर्जी मौजूद है तो यह पौधा उसे नष्ट करने की ताकत रखता है। हां, ध्यान रखें कि तुलसी का पौधा घर के दक्षिणी भाग में नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि यह आपको फायदे के बदले काफी नुकसान पहुंचा सकता है। तुलसी को घर में ईशान या पूर्व दिशा में लगाना चाहिए। बेल का वृक्ष - भगवान शिवजी का परम प्रिय बेल का वृक्ष जिस घर में होता है वहां धन संपदा की देवी लक्ष्मी पीढ़ियों तक वास करती हैं। बेल वृक्ष को सींचने से पितर तृप्त होते हैं। माना जाता है कि बेल वृक्ष और सफेद आक को जोड़े से लगाने पर उस घर में माँ लक्ष्मी की स्थाई प से कृपा प्राप्त होती है। पीपल- पीपल वृक्ष पर शनि, नाग देवता, पीर, लक्ष्मी, भूत-प्रेत तथा पितृश्वर देवताओं का निवास माना जाता है। शनिवार तथा ‘अमावस्या’ को संतान की कामना तथा ‘ग्रहदोष’ एवं ‘अनिष्ट-निवारण’ के लिए पीपल की पूजा की जाती है। पीपल का पेड़ घर में नहीं लगाया जाता है। पुराणों में पीपल को विष्णु का रुप कहा गया है- मूले विष्णुः स्थितो नित्यं स्कंधे कोव एव च। नारायणस्तु शाखासु पत्रेषु भगवान् हरिः। फलेऽच्युतो न सन्देहः सर्वदेवैः समन्वितः। स एव विष्णुद्र्रुमः। -(स्कंद पुराण) वट- वट-वृक्ष भी पीपल के समान ही नारायण विष्णु का स्वरुप माना गया है। इसी वृक्ष के नीचे ‘सावित्री’ ने मृत्यु को जीतकर ‘सत्यवान’ का पुनर्जीवन प्राप्त किया था। पुराणों में शिव का आसन वट-वृक्ष के नीचे उल्लिखित है। वट, पीपल तथा गूलर विष्णु के स्वरुप हैं। रुद्राक्ष- एकमुखी ‘रुद्राक्ष’ को गौरी शंकर कहते हैं। रुद्राक्ष के दाने पर शिव की पूजा होती है। पुराणों में रुद्राक्ष की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है। रुद्राक्ष धारण करने से सौभाग्य प्राप्त होता है। दूब- दूब को देवी का रुप माना गया है तथा इसकी पूजा से सुख-सम्पत्ति-संतान की प्राप्ति होती है। दूब गणेश को प्रिय है तथा गणेशजी की पूजा में दूब का होना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। शमी का पौधा- शमी का पौधा घर में होना भी बहुत शुभ माना जाता है। ज्योतिष में इसका संबंध शनि से माना जाता है और शनि की कृपा पाने के लिए इस पौधे को लगाकर इसकी पूजा-उपासना की जाती है। इसका पौधा घर के मुख्य द्वार के बाईं ओर लगाना शुभ है। शमी वृक्ष के नीचे नियमित रूप से सरसों के तेल का दीपक जलाएं, इससे शनि का प्रकोप और पीड़ा कम होगी और आपका स्वास्थ्य बेहतर बना रहेगा। शमी का पौधा घर में बाहर की तरफ ऐसे स्थान पर लगाएं जिससे यह घर से निकलते समय दाहिनी ओर पड़े। आंवले- घर में आंवले का पेड़ लगायें और वह भी उत्तर दिशा और पूरब दिशा में हो तो यह अत्यंत लाभदायक है। आंवले के पौधे की पूजा करने से सभी मनौतियाँ पूरी होती हैं। इसकी नित्य पूजा-अर्चना करने से भी समस्त पापों का शमन हो जाता है। अशोक - हिन्दू धर्म में अशोक के वृक्ष को बहुत ही शुभ और लाभकारी माना गया है। अशोक अपने नाम के अनुसार ही शोक को दूर करने वाला और प्रसन्नता देने वाला वृक्ष है। इससे घर में रहने वालों के बीच आपसी प्रेम और सौहार्द बढ़ता है। घर में अशोक के वृक्ष होने से घर में सुख, शांति एवं धन समृद्धि का वास होता है एवं उस घर में किसी की भी अकाल मृत्यु नहीं होती। श्वेतार्क गणपति- श्वेतार्क गणपति का पौधा दूधवाला होता है। वास्तु सिद्धांत के अनुसार दूध से युक्त पौधों का घर की सीमा में होना अशुभ होता है। किंतु श्वेतार्क या आर्क इसका अपवाद है। ऐसी भी मान्यता है कि जिसके घर के समीप श्वेतार्क का पौधा फलता-फूलता है वहां सदैव बरकत बनी रहती है। गुड़हल- गुड़हल का पौधा ज्योतिष में सूर्य और मंगल से संबंध रखता है, गुड़हल का पौधा घर में कहीं भी लगा सकते हैं। गुड़हल का फूल जल में डालकर सूर्य को अघ्र्य देना आंखों, हड्डियों की समस्या और नाम एवं यश प्राप्ति में लाभकारी होता है। मंगल ग्रह की समस्या, संपत्ति की बाधा या कानून संबंधी समस्या हो, तो हनुमान जी को नित्य प्रातः गुड़हल का फूल अर्पित करना चाहिए। माँ दुर्गा को नित्य गुड़हल अर्पण करने वाले के जीवन से सारे संकट दूर रहते हैं। नारियल - नारियल का पेड़ भी शुभ माना गया है । कहते हैं, जिनके घर में नारियल के पेड़ लगे हों, उनके मान-सम्मान में खूब वृद्धि होती है। नीम- घर के वायव्य कोण में नीम के वृक्ष का होना अति शुभ होता है। शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति नीम के सात पेड़ लगाता है उसे मृत्योपरांत शिवलोक की प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति नीम के तीन पेड़ लगाता है वह सैकड़ों वर्षों तक सूर्य लोक में सुखों का भोग करता है। केले का पौधा- यह पौधा धार्मिक कारणों से भी काफी महत्वपूर्ण माना गया है। गुरुवार को इसकी पूजा की जाती है और अक्सर पूजा-पाठ के समय केले के पत्ते का ही इस्तेमाल किया जाता है। इसे भवन के ईशान कोण में लगाना चाहिए, क्योंकि यह बृहस्पति ग्रह का प्रतिनिधि वृक्ष है। इसे ईशान कोण में लगाने से घर में धन बढ़ता है। बांस का पौधा- बांस का पौधा घर में लगाना अच्छा माना जाता है। यह समृद्धि और आपकी सफलता को ऊपर ले जाने की क्षमता रखता है। अगर आपकी तमाम कोशिशों के बाद भी आपको अपने कार्यक्षेत्र में मनचाही सफलता नहीं मिल रही है तो आपको अपने भवन/कार्यालय में बांस का पौधा लगाना चाहिए। बांस संसार का अकेला ऐसा पौधा है जो हर वातावरण में हर मुश्किलों के बाद भी तेजी से बढ़ता है। इसीलिए इसे उन्नति, दीर्घ आयु और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। भारतीय वास्तु शास्त्र में भी बांस को बहुत शुभ माना गया है। भगवान श्री कृष्ण भी हमेशा अपने पास बांस की बनी हुई बांसुरी रखते थे। सभी शुभ अवसरों जैसे मुण्डन, जनेऊ और शादी आदि में बांस का अवश्य ही उपयोग किया जाता है। मनीप्लांट- ऐसी मान्यता है कि घर में मनीप्लांट लगाने पर सुख-समृद्धि का वास होता है। घर में मनीप्लांट के पौधे को लगाने के लिए आग्नेय दिशा सबसे उचित दिशा है। आग्नेय दिशा में यह पौधा लगाने से सर्वाधिक लाभ मिलता है क्योंकि इस दिशा के देवता गणेशजी और प्रतिनिधि शुक्र हैं। भगवान गणेशजी विघ्न दूर करते हैं जबकि शुक्र देव धन, सुख-समृद्धि के प्रतीक हैं। लेकिन मनीप्लांट को कभी भी उत्तर-पूर्व दिशा अर्थात ईशान कोण में नहीं लगाना चाहिए। अनार- धन, सुख-समृद्धि और घर में वंश वृद्धि की कामना रखने वाले घर के आग्नेय कोण (पूरब दक्षिण) में अनार का पेड़ जरूर लगाएं। यह अति शुभ परिणाम देता है। वैसे अनार का पौधा घर के सामने लगाना सर्वोत्तम माना गया है। घर के बीचोंबीच पौधा न लगाएं। अनार के फूल को शहद में डुबाकर नित्यप्रति या फिर हर सोमवार भगवान शिव को अगर अर्पित किया जाए, तो भारी से भारी कष्ट भी दूर हो जाते हैं और व्यक्ति तमाम समस्याओं से मुक्त हो जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में कैक्टस का पेड़ न लगायें वास्तु शास्त्र के अनुसार घर, दुकान, फैक्ट्री या व्यावसायिक परिसरों में कैक्टस का पेड़ लगाने से मना किया जाता है। कैक्टस में कांटे होते हैं और कांटे वाले कोई भी पौधे घर के आस-पास नहीं होना चाहिए। जिस घर में कांटे होंगे वहाँ पर रहने वाले लोग एक-दूसरे को चूभने वाली बात कहते रहेंगे। कैक्टस मूलतः रेगिस्तान में होता है। इसका अर्थ है कैक्टस ऐसे स्थान पर होता है जहाँ पर कुछ भी नहीं होता। इसलिए कैक्टस के पौधे को घर में लगाने से घर उजाड़ हो जायेगा, घर को रेगिस्तान में बदलते देर नहीं लगेगी। कैक्टस के पौधे से दूध जैसा सफेद द्रव्य निकलता है और वास्तु शास्त्र में दूध वाले पौधे को लगाने से दोष होता है। दिशा अनुसार पौधों का चयन- उतर दिशा - पलाश, पीले फूल, छोटे पौधे, अमरुद, पाकड़ तथा कमल के फूल। पूर्व दिशा - वट, कटहल ,आम। पश्चिम दिशा - पीपल, अशोक, नीलगिरी। दक्षिण दिशा - नीम, नारियल, अशोक, गुलाब। ईशान दिशा (उत्तर-पूर्व )- केले का पौधा. यह सर्वविदित है कि वृक्ष-वनस्पति हमारे जीवन के विशेष अंग हैं। कुछ वृक्षों को देवता स्वरूप माना गया है। इन वृक्षों के दर्शन-पूजन से विशेष सुख की प्राप्ति होती है। यह मान्यता है कि केला के मूल में विष्णु का निवास है। यदि शमी वृक्ष पर पीपल उग आए तो वह नर-नारायण का रुप है। नीम पर भैरव का निवास है। आक पर कामदेव का निवास है। गूलर, बाँस, बेरिया, पीपल प्रेत के निवास-स्थान माने जाते हैं। तुलसी, पीपल, वट, दूब, अशोक, गूलर, छोंकर, आँवला, अंडी, आक, केला, नीम, कदंब, बेल, कमल को देव समान पूजा जाता है।

वास्तु विशेषांक  दिसम्बर 2015

वास्तु संरचना का विज्ञान है जिसका उद्देश्य मनुुष्य की सुख समृद्धि है। हर संरचना चाहे वह घर हो अथवा दुकान अथवा फैक्ट्री अथवा कार्यालय, प्रत्येक संरचना के निर्माण में वास्तु नियमों का अनुपालन किया जाना आवश्यक है। यदि कोई भी संरचना वास्तु सम्मत नहीं हैं तो यह अनेक प्रकार की आर्थिक, स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं, दुःख, वैवाहिक जीवन में कठिनाई, पारिवारिक विवाद आदि को जन्म देता है। फ्यूचर समाचार के वास्तु सम्बन्धित इस विशेषांक में अनेक उल्लेखनीय आलेखों को समाविष्ट किया गया है जिसमें वास्तु के महत्वपूर्ण सिद्धान्तों का विश्लेषण सूक्ष्मता से किया गया है। इनमें से अति महत्वपूर्ण आलखों में शामिल हैं: नारद पुराण में वास्तुशास्त्र का सूक्ष्म वर्णन, वास्तु शास्त्र में पंच तत्व, भवन निर्माण में वास्तुशास्त्र का महत्व, वास्तु शास्त्र एक वैज्ञानिक पद्धति, वास्तु शास्त्र एवं धर्म, दिशा दोष दूर करने के वास्तु उपाय, फेंग शुई और वास्तु में अंतर और समानताएं, वास्तु एवं फेंग शुई के उपाय, मल्टीस्टोरी फ्लैट की वास्तुु की उपयोगिता एवं व्यवस्था, फ्लैट खरीदने में किन बातों का खयाल रखें आदि। इसके अतिरिक्त इस विशेषांक में सभी स्थाई स्तम्भों का समावेश भी पूर्व की भांति किया गया है जिसमें विविध आयामी आलेख सम्मिलित हैं।

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