पिछले सप्ताह पंडित जी देश के एक प्रसिद्ध बिल्डर के यहाँ ओखला औद्योगिक क्षेत्र में उनके एक कार्यालय/फैक्ट्री का वास्तु परीक्षण करने गए। उनसे मिलने पर उन्होंने बताया कि वे जबसे यहाँ आए हैं कोई न कोई कठिनाई आती रहती है और उन्हें कई बार भारी आर्थिक हानि का सामना करना पड़ा है। लम्बे समय की मुकदमेबाजी के बाद प्रथम तल एक बैंक से खाली करवाया गया था। द्वितीय तल फिलहाल किसी किरायदे ार के पास था और टैरेस एकदम खाली था। वह चाहते थे कि यदि यह जगह कुछ सुझावों से वास्तु सम्मत् हो जाये तो वो अपना कार्पोरेट आफिस वहाँ शिफ्ट कर लेंगे। अभी लोअर बेसमेन्ट व अपर बेसमेन्ट में उनके कुछ विभाग चल रहे थे तथा ग्राउन्ड फ्लोर पर उनकी एक फैक्टरी चल रही थी, जिसके लिये उन्होंने तीनों तरफ के सैटबैक भी कवर कर रखे थे। वास्तु परीक्षण करने पर पाए गए वास्तु दोष तथा कुछ अहम सुझाव - प्लाट के दक्षिण-पूर्व में गेट था जो कि बंद रहता है और यह काने ऊपर स बदं था जिसस फैक्टरी म कम एक्टिविटी हो रही थी क्योंकि यह स्थान लो एनर्जी बन गया था। - उत्तर व पूर्व दोनों कोने भारी व बंद थे जिसकी वजह से वहाँ कोई आर्थिक विकास नहीं हुआ था। - बिजली का कंट्रोल पैनल उत्तर में बना था जो भारी खर्च व वैचारिक मतभेद का कारण होता है। - दक्षिण-पूर्व में सीढियाँ थीं तथा लिफ्ट की जगह छोडी हुई थी। सीढ़ियों की ममटी की वजह से दक्षिण-पूर्व दिशा/कोण दक्षिण तथा दक्षिण-पश्चिम से ऊँचा हो गया था, जिससे लड़ाई-झगड़ों, चोरी तथा अग्नि-दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। - पीछे के सैट-बैक में भूतल पर वायव्य दिशा में शौचालय ब्लाक के कारण बढ़ाव हो रहा था। इस वास्तु दोष से योजनाओं को कार्यान्वित करने में रुकावट आती है। - पीछे का हिस्सा जो अधिकांश वायव्य दिशा में था उसमें बेसमेन्ट बनी थी जिसके कारण धन हानि, शत्रुता तथा लम्बे समय तक मुकदमेबाजी चलती रहती है। सुझाव - वायव्य दिशा में शौचालय ब्लाक के बढ़ावे को खत्म करने के लिए उन्हें शौचालय के द्वार को अन्दर से बंद करके बाहर से खोलने को कहा गया। - वायव्य के बेसमेंट को ईंट, पत्थर, रेत, मिट्टी आदि से पूर्णतया बन्द करने को कहा गया। - तीनों तरफ उत्तर पूर्व, उत्तर-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व के सैट बैक खुलवाये गये। - दक्षिण-पूर्व के कोने को खुलवाया गया तथा गेट को इस्तेमाल करने की सलाह दी गई। - उत्तर तथा पूर्व के कोनों को हल्का/ खाली करने की सलाह दी गई। - इलैक्ट्रिक कन्ट्रोल पैनल को उत्तर-पश्चिम की ओर करने को कहा गया। - दक्षिण पूर्व में लिफ्ट बन सकती है परन्तु इसे लोअर बेसमेन्ट तक ले जाने को मना किया गया तथा ऊंचाई के दोष को कम करने के लिए छत पर दक्षिण पश्चिम में एक कमरा बनाने की सलाह दी गई। कुछ अन्य सुझाव - पहली मंजिल उच्च प्रबंधन के लिए उत्तम है। - एम0 डी0 के आफिस के लिए दक्षिण का कमरा उत्तम है जिसमें वह पूर्व में मुख करके बैठे। - रिसेप्शन पूर्व या दक्षिण-पूर्व में बनाया जा सकता है। - भूतल-वित्तीय, लेखा, तथा प्रशासकीय कार्यों के लिए ठीक है। - अपर बेसमेन्ट- मार्केटिंग, सेल्स तथा इंजीनियरिंग के लिये अच्छा है। - लोअर बेसमेन्ट-इंजीनियरिंग डिपार्टमेन्ट तथा स्टेशनी स्टोर के लिए उत्तम है। - सभी स्टाफ दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम की तरफ मुंह करके न बैठें। उन्होंने कहा कि पंडित जी के बताए सुझावों को कार्यान्वित करने के पश्चात ही वह अपने कार्यालय को शिफ्ट करेंगे जिससे आगे वहां कोई कठिनाई न आए तथा भविष्य में वे खूब उन्नति कर सकें।

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नक्षत्र विशेषांक  फ़रवरी 2013

फ्यूचर समाचार पत्रिका के नक्षत्र विशेषांक में नक्षत्र, नक्षत्र का ज्योतिषीय विवरण, नक्षत्र राशियां और ग्रहों का परस्पर संबंध, नक्षत्रों का महत्व, योगों में नक्षत्रों की भूमिका, नक्षत्र के द्वारा जन्मफल, नक्षत्रों से आजीविका चयन और बीमारी का अनुमान, गंडमूल संज्ञक नक्षत्र आदि ज्ञानवर्धक आलेख सम्मिलित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त हिंदू मान्यताओं का वैज्ञानिक आधार, वास्तु परामर्श, वास्तु प्रश्नोतरी, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, गुण जेनेटिक कोड की तरह है, दामिनी का भारत, तारापीठ, महाकुंभ का महात्म्य, लालकिताब के टोटके, लघु कथाएं, जसपाल भट्टी की जीवनकथा, बच्चों को सफल बनाने के सूत्र, अंक ज्योतिष के रहस्य, मन का कैंसर और उपचार व हस्तरेखा आदि विषयों पर गहन चर्चा की गई है। विचारगोष्ठी में वास्तु एवं ज्योतिष नामक विषय पर चर्चा अत्यंत रोचक है।

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