जसपाल भट्टी के जीवन में अंक ३ की पुनरावृति

जसपाल भट्टी के जीवन में अंक ३ की पुनरावृति  

देश के जाने माने हास्य कलाकार जसपाल भट्टी का 24 अक्तूबर की रात जालंधर के पास नकोदर क्षेत्र में शाहकोट के निकट एक सड़क हादसे में, सफेद होंडा एकाॅर्ड कार में आकस्मिक निधन हो गया। जसपाल भट्टी ने हास्य, व्यंग्य, कटाक्ष, रोड शो, टी. वी. शो और फिल्मों के क्षेत्र में अपनी मौलिकता के आधार पर सिक्का जमाया और इस दिशा में कई प्रयोग किए। आठवें दशक से एक व्यंग्य चित्रकार के रूप में अपना करियर आरंभ करने वाले जसपाल ने जालंधर दूरदर्शन हर हास्य कार्यक्रम ‘उल्टा-पुल्टा’ से प्रसिद्धि पाई। साथ-साथ वे अपने नाॅनसेंस कलब के माध्यम से आम व्यक्ति की समस्याओं को सड़क से सरकार तक पहुंचाया। ज्योतिषीय दृष्टि जसपाल भट्टी का जन्म 3 मार्च 1955 की रात्रि एक बजकर 30 मिनट पर अमृतसर में हुआ। कुंडली के अनुसार वृश्चिक लग्न का स्वामी मंगल छठे भाव अर्थात दुर्घटना भाव में अपनी ही राशि में स्थित है और 8वीं दृष्टि से लग्न को देखता है। बुध ग्रह जन्मपत्री में, 8वें अर्थात मृत्यु स्थान का स्वामी है और उसी की दशा चल रही थी। बुध में शुक्र की दशा का अंतर 1 मई 2012 से आरंभ हो गया। बुध यहां मृत्यु भाव का स्वामी है और शुक्र 12वें अर्थात मोक्ष का। दोनों ग्रह छोटी यात्राएं भी करवाते हैं। इन्हीं के कारण इनकी यात्राओं में तेजी आ गई। शुक्र यहां मारकेश के साथ-साथ 12वें स्थान का भी मालिक है। कुंडली में शनि, मंगल व राहु का परस्पर संबंध होने से भी मध्यम आयु योग बनता है। ज्योतिष के अनुसार जब लग्नेश छठे भाव में हो, मारकेश तथा छठे व 12 वें भावों की दशाएं एक साथ चल रही हों तो जीवन में ऐसी दुर्घटना जानलेवा साबित हो जाती है। यह संयोग है कि जसपाल भट्टी का जन्म गुरुवार की रात्रि डेढ़ बजे हुआ था और मृत्यु भी गुरुवार की रात्रि डेढ़ बजे ही हुई। यह प्रश्न अक्सर एक ज्योतिषी से किया जाता है कि क्या आपको मालूम था ऐसा होगा? एक अच्छे ज्योतिषी को अवश्य मालूम होता है परंतु क्या ऐसी बातें खोलकर बताई जा सकती हैं? हां इशारे से ही कहा जा सकता है कि वाहन चालन और सेहत इत्यादि में ध्यान रखें। यह पूर्व संकेत उनके जन्म दिन पर सुबह-सुबह बधाई देते हुए कहा गया था क्योंकि उनकी कुंडली में बुध में शुक्र की अंतर्दशा 1 मई 2012 से आरंभ हो रही थी जो उपरोक्त विश्लेषणानुसार घातक सिद्ध हो सकती है। फिर जीवन-मरण, यश-अपयश, लाभ-हानि सब प्रभु के ही हाथ हैं। जहां तक करियर का प्रश्न है, शनि की राशि में तृतीय स्थान पर बुध व शुक्र की युति, जसपाल भट्टी को हास्य, व्यंग्य, कटाक्ष, रोड शो, टी. वी. शो और फिल्मों के क्षेत्र में ले आई। सूर्य अपनी राशि के भाव जो कर्मक्षेत्र है, पूर्ण दृष्टि से देखता है, उन्हें कम आयु में प्रसिद्धि प्रदान करता है। लग्नेश मंगल छठे भाव में मूल त्रिकोण राशि में है जिसने जातक को एक इलैक्ट्रिकल इंजीनियर बनाया परंतु सूर्य की पूर्ण दृष्टि ने उन्हें नौकरी से अलग करवा दिया और उनका व्यवसाय एक इंजीनियर से कलाकार में परिवर्तित हो गया। यदि सातवें भाव को व्यवसाय की दृष्टि से देखें तो, सप्तमेश शुक्र बुध के साथ, फिल्मी दुनिया, ग्लैमर और हास्य व्यंग्य से जोड़ रहा है। क्या कहता है अंक शास्त्र? यह एक संयोग ही कहा जाएगा की तीन का अंक जसपाल भट्टी के जीवन में अजीबोगरीब रहा। 3 मार्च, 1955 को उनका जन्म हुआ। तारीख 3, महीना भी 3 और उस दिन वीरवार था। अंकशास्त्र में 3 अंक का संबंध गुरु से होता है। विवाह की डेट भी 24 मार्च 1985 है यानी विवाह का महीना भी 3 था। 24 अक्तूबर, सूर्योदय से पूर्व की कालरात्रि को यदि जोड़ें तो 24-10-2012 का टोटल भी तीन ही है। इनकी उम्र के 57 साल पूरे हुए थे। इसका योग भी 3 ही है। एक और संयोग देखिए 26 तारीख को जब उनकी ‘पावर कट’ रिलीज हुई, फिल्म के प्रीमियर पर उनकी पत्नी सविता भटटी जी ने उनके लिए पिकाडिली थियेटर में जो सीट खाली रखी, उसका नंबर भी 12 ही था अर्थात उस अंक का योग भी 3 ही बनता है। इसके अलावा उनकी जिंदगी में 3 का अंक कई बार रिपीट हुआ। और आखिरी संयोग यह भी कि उनकी आत्मिक शांति के लिए भोग की तिथि भी 3 नवंबर, 2012 को ही पड़ी। फिर वही अंक 3 आया। यही नहीं उनके उत्तराधिकारी पुत्र जसराज भट्टी का जन्म भी गुरुवार को ही हुआ।

Ask a Question?

Some problems are too personal to share via a written consultation! No matter what kind of predicament it is that you face, the Talk to an Astrologer service at Future Point aims to get you out of all your misery at once.

SHARE YOUR PROBLEM, GET SOLUTIONS

  • Health

  • Family

  • Marriage

  • Career

  • Finance

  • Business

नक्षत्र विशेषांक  फ़रवरी 2013

फ्यूचर समाचार पत्रिका के नक्षत्र विशेषांक में नक्षत्र, नक्षत्र का ज्योतिषीय विवरण, नक्षत्र राशियां और ग्रहों का परस्पर संबंध, नक्षत्रों का महत्व, योगों में नक्षत्रों की भूमिका, नक्षत्र के द्वारा जन्मफल, नक्षत्रों से आजीविका चयन और बीमारी का अनुमान, गंडमूल संज्ञक नक्षत्र आदि ज्ञानवर्धक आलेख सम्मिलित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त हिंदू मान्यताओं का वैज्ञानिक आधार, वास्तु परामर्श, वास्तु प्रश्नोतरी, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, गुण जेनेटिक कोड की तरह है, दामिनी का भारत, तारापीठ, महाकुंभ का महात्म्य, लालकिताब के टोटके, लघु कथाएं, जसपाल भट्टी की जीवनकथा, बच्चों को सफल बनाने के सूत्र, अंक ज्योतिष के रहस्य, मन का कैंसर और उपचार व हस्तरेखा आदि विषयों पर गहन चर्चा की गई है। विचारगोष्ठी में वास्तु एवं ज्योतिष नामक विषय पर चर्चा अत्यंत रोचक है।

सब्सक्राइब

.