वास्तु की महत्ता

वास्तु की महत्ता  

कुछ समय पहले पंडित जी को वास्तु संबंधी सुझावों के लिये एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी के प्रषासनिक कार्यालय मंे बुलाया गया, जिसे पूरा होने से पहले ही काॅरपोरेषन ने सील कर दिया था। बहुत समय उपरान्त दोबारा कार्य षुरू होने जा रहा था। षुरू करने से पहले कम्पनी के प्रबंधन संचालक ने देष के किसी प्रमुख सलाहकार द्वारा वास्तु सुझाव लेने का निर्णय लिया। पूर्वनिर्मित तथा आगे बनने वाले भाग के लिये वहाँ पर पंडित जी द्वारा दिये गए व्यावहारिक सुझावांे को यहाँ प्रबुद्ध पाठकांे के लाभार्थ प्रस्तुत किया जा रहा है: - यह भवन मुंबई के एक दक्षिण-पूर्वी मार्ग पर स्थित है जिसका मुख्य द्वार दक्षिण पूर्व में होने से यह बिल्डिंग प्रषासनिक कार्य के लिये बहुत षुभ है। यहां हर समय उत्साहपूर्वक कार्य हो सकता है। भूतल - स्वागत कक्ष में पूर्वी दीवार पर लकड़ी के फ्रेम वाली घड़ी लगाएं नाम बढ़ता रहेगा। - भवन के पिछले भाग के वायव्य कोण में, भूमिगत जल भंडारण के कारण सरकारी समस्यायें, व्यर्थ खर्चा व मानसिक अषांति बनी रहती है। - वाॅषरुम/षौचालय पिछले भाग में वायव्य कोण/पष्चिमी हिस्से में बनाये जा सकते हैं। उनके ऊपर ही छोटे ओवरहैड टैंक रखे जा सकते हैं। दक्षिणी हिस्से में पैन्ट्री बनायी जा सकती है। - ट ेर ेस/छत पर बड ़ े आ ेवरह ेड टैंक पष्चिमी हिस्से/कोण में रखना सर्वश्रेष्ठ है। - गार्ड रुम व जेनरेटर की स्थिति बिल्कुल ठीक है परन्तु बोरिंग दक्षिण में होना विभिन्न रुकावटें, वैचारिक मतभेद, धन हानि का कारण बनता ह ै। उस े अविलम्ब बन्द करक े दूसरी तरफ पूर्वी क्षेत्र में करवाना चाहिए। ्रथम तल - बिजली और अग्नि से संबंधित उपकरण जैसे वाटर कूलर, इन्वर्टर आदि सीढ़ियों के नीचे न रखें। सीढ़ियों के नीचे के स्थान को किसी सामान से न भरें, इससे धन और अन्य प्रकार के सुचारु कार्यों में रूकावट उत्पन्न होती है। यह क्षेत्र स्टेषनरी आदि रखने के लिए अच्छी है परन्तु यह फर्ष कम से कम तीन ईंच ऊंचे प्लेटफार्म पर रखी जानी चाहिए, जिससे हवा का आवागमन होता रहे और कम्पनी के कार्यक्षेत्र में तेजी से वृद्धि होती रहे। - जिस स्थान पर लिफ्ट के लिए गड्ढा किया गया था, वह दक्षिणी भाग में आता है, यहाँ गड्ढा होना कार्य में विलम्ब करता है। उसे जब तक लिफ्ट नहीं आती, रेते के बोरों से फर्ष लेवल तक भर देने का सुझाव दिया गया जिससे निर्माण कार्य तेजी से संपूर्ण हो सके। - सौहार्दपूर्ण संबंधों और लगातार प्रगति के लिए मुख्य हाॅल के ईषान कोण में गोल्डन टेम्पल या मैसूर के वृन्दावन गार्डन या नियाग्रा फाॅल का चित्र लगायें। द्वितीय तल - अपने एक्जिक्यूटिव के कक्षों में तथा आॅफिस में चैरस अथवा वर्गाकार टेबल रखने चाहिए, विभिन्न अनियमित आकार वाले टेबलों का प्रयोग न करें अन्यथा कार्यालय में सामंजस्य नहीं रहेगा। - काॅन्फ्रेंस कक्ष की पूर्वी दीवार में कम्पनी के लोगो (चिह्न्) के साथ सम्मिलित पानी वाले दृष्य का चित्र लगाएं। इससे आपसी सामंजस्य बना रहेगा। लकड़ी के फ्रेम में जड़ा हुआ वाल क्लाॅक उत्तर-पूर्व की दीवार में लगाएं, लाभदायक मीटिंग होती रहेंगी। संषय मुक्त निर्णयों के लिए नैर्ऋत्य कोण में लकड़ी के फ्रेम में बिना पानी के एक पर्वत का चित्र लगाएं। - उत्तर, उत्तर-पूर्व व पूर्व का क्षेत्र छोटे आधिकारी को दे सकते हैं। दक्षिण व दक्षिण-पष्चिम, पष्चिम में बड़े अधिकारी गण बैठने चाहिये। - बिक्री डिविजन के निदेषक के कमरे में अष्टकोणीय धातु की बनी वाल क्लाॅक उत्तर पष्चिम की दीवार में लगाएं, आष्चर्यजनक लाभ होगा। - अकाउंट्स डिविजन के निदेषक के कमरे की उत्तर-पष्चिमी दीवार पर धातु की घड़ी लगाने से बैंक से संबंधों में वृद्धि होगी। - बिना पानी के पहाड़ का चित्र ब्म्व् के कमरे में लकड़ी के फ्रेम में दक्षिण-पष्चिम कोण में सीट के पीछे लगाएं। यह कक्ष सबसे ऊपरी तल पर होना चाहिए। नोटः उपरोक्त सुझावों को ध्यान में रखते हुये ही समस्त ऊपरी तलों को बनाना व फर्निष करना उत्तम रहेगा। प्रष्न- इस फैक्टरी को बनते हुए काफी समय हो गया है। कोई न कोई समस्या आती रहती है और बिना किसी ठोस कारण के विलम्ब हो रहा है। कृप्या नक्षा देखकर बताएं, कि यह किसी वास्तु दोष के कारण तो नहीं है। निवेदन है कि सरल समाधान भी बताने का कष्ट करें। महेष जोषी, कुंडली उत्तर- महेष जी आपकी फैक्ट्री की रूपरेखा बहुत अच्छी है, एवं कुछ सरल बदलाव से यह अविलम्ब षुरू हो सकती है। आग्नेय मंे भूमिगत पानी को तुरन्त बन्द कर के नलकूप को आगे द्वार की तरफ बना लें क्योकि अग्निकोण में पानी का भंडारण सबसे खराब वास्तुदोष है। यह दीर्घ विलम्ब के अतिरिक्त दुर्घटना व सरकारी समस्याओं का कारण भी बन सकता है। चूँकि उत्तर की दिषा का भारी व बन्द होना धन के आगमन में रूकावटें उत्पन्न करता है, इसलिये सीमेन्ट स्टोर को तोड़ कर उत्तर दिषा बिल्कुल खाली करें। वहां एक फव्वारा या भूमिगत पानी का प्रबंध करें तथा सीमेन्ट स्टोर को पष्चिमी कोने में स्थानांतरित करें-बिना मुख्य बिल्डिंग से लगते हुये। तुरन्त, अवष्य लाभ होगा।

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हस्तरेखा विशेषांक  मार्च 2015

फ्यूचर समाचार के हस्तरेखा विषेषांक में हस्तरेखा विज्ञान के रहस्यों को उद्घाटित करने वाले ज्ञानवर्धक और रोचक लेखों के समावेष से यह अंक पाठकों में अत्यन्त लोकप्रिय हुआ। इस अंक के सम्पादकीय लेख में हस्त संचरचना के वैज्ञानिक पक्ष का वर्णन किया गया है। हस्तरेखा शास्त्र का इतिहास एवं परिचय, हस्तरेखा शास्त्र के सिद्धान्त, हस्तरेखा शास्त्र- एक सिंहावलोकन, हस्तरेखाओं से स्वास्थ्य की जानकारी, हस्तरेखा एवं नवग्रहों का सम्बन्ध, हस्तरेखाएं एवं बोलने की कला, विवाह रेखा, हस्तरेखा द्वारा विवाह मिलाप, हस्तरेखा द्वारा विदेष यात्रा का विचार आदि लेखों को सम्मिलित किया गया है। इसके अतिरिक्त गोल्प खिलाड़ी चिक्कारंगप्पा की जीवनी, पंचपक्षी के रहस्य, लाल किताब, फलित विचार, टैरो कार्ड, वास्तु, भागवत कथा, संस्कार, हैल्थ कैप्सूल, विचार गोष्ठी, वास्तु परामर्ष, ज्योतिष और महिलाएं, व्रत पर्व, क्या आप जानते हैं? आदि लेखों व स्तम्भों के अन्तर्गत बेहतर जानकारी को साझा किया गया है।

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