उत्तर दिशा में बैंक का होना व्यवसाय को चार चांद लगाता है

उत्तर दिशा में बैंक का होना व्यवसाय को चार चांद लगाता है  

वास्तुशास्त्र में धन रखने के लिए सबसे उपयुक्त और शुभ स्थान उत्तर दिशा को माना गया है क्योंकि इस दिशा के स्वामी कुबेर हैं। कुबेर समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी के खजांची हैं। इसलिए बैंक को उत्तर में रखने की सलाह दी जाती है ताकि धन एवं समृद्धि का प्रवाह बैंकों में निरंतर बना रहे। बैंक की बनावट इस तरह रखें कि उसका सामने वाला हिस्सा पूर्व या उत्तर की तरफ रहे। बैंक में मुख्य प्रवेश द्वार उत्तर, ईशान्य या पूर्व की तरफ से रखना लाभप्रद होता है। प्र.- बैंक में मुख्य शाखा प्रबंधक का स्थान कहां पर बनाना चाहिए? उत्तर: बैंक में मुख्य शाखा प्रबंधक के लिए दक्षिण-पश्चिम के क्षेत्र में कार्यालय बनाना चाहिए। कार्यालय के आंतरिक बनावट को वास्तु के नियमों को ध्यान में रखकर बनाना चाहिए। प्रबंधक को कमरे के दक्षिण-पश्चिम में द्वार से थोड़ी दूर उत्तर की तरफ चेहरा कर बैठना चाहिए। इससे उनकी कार्यक्षमता एवं कार्यकुशलता निरंतर बनी रहती है। प्रश्न- बैंक में स्वागत कक्ष किस स्थान पर रखना चाहिए ? उत्तर-बैंक में स्वागत कक्ष पूर्व या उत्तर-पूर्व की तरफ रखना चाहिए। स्वागत कक्ष के काउंटर पर बैठने वाले कर्मचारियों का चेहरा उत्तर या पूर्व की तरफ होना अनिवार्य है। अतिथियों के बैठने के लिए स्थान कक्ष के दक्षिण एवं पश्चिम में बनाना चाहिए। प्रश्न- बैंक में वित्तीय कार्य करने वाले खजांची के लिए उपयुक्त दिशा कौन सी होती है ? उत्तर- बैंक में वित्तीय कार्यों के लेन-देन के लिए उत्तर दिशा सबसे उपयुक्त दिशा है। इसी स्थान पर जमा एवं निकासी का काउंटर बनाना चाहिए। कैश काउंटर उत्तर में रखना चाहिए। कैशियर को सिर्फ उत्तर या पूर्व की तरफ चेहरा करके बैठना चाहिए। कैश बाॅक्स को दक्षिण की तरफ रखना चाहिए तथा उसे उत्तर की तरफ खुलना चाहिए। बैंक में कैश का मुख्य कमरा अर्थात स्ट्रांग रूम तथा लाॅकर के लिए दक्षिण की तरफ कमरे बनाना चाहिए। लाॅकर तथा कैश को कमरे के दक्षिण या पश्चिम की तरफ रखना चाहिए, ताकि खुलने पर उसका मुंह उत्तर या पूर्व की तरफ रहे। बैंक में दस्तावेज रखने के लिए सबसे उपयुक्त जगह दक्षिण-पश्चिम की दिशा है। प्र.- बैंक में मास्टर कम्प्यूटर किस स्थान पर रखना लाभप्रद होता है ? उत्तर: वर्तमान समय में बैंकिंग कार्य पूर्णतः कम्प्यूटर पद्ध ति पर आधारित है। फलस्वरूप इसका महत्व काफी बढा हुआ है। खासकर मास्टर कंप्यूटर अर्थात सर्वर जिसमें अन्य कंप्यूटर नेटवर्किंग के द्वारा जुड़े रहते हैं इसके लिए दक्षिण-पूर्व का स्थान निर्धारित करना चाहिए। साथ ही जेनरेटर कक्ष, इनर्वटर कक्ष एवं अन्य विद्युतीय संयंत्रों के लिए दक्षिण-पूर्व का क्षेत्र उपयुक्त होता है। वातानुकूलित प्लांटों के लिए दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पश्चिम का स्थान उपयुक्त होता है। प्रश्न: मुख्य स्ट्रांग रूम, लाॅकर किस स्थान पर रखना लाभप्रद होता है ? उत्तर: मेन स्ट्रांग रूम, लाॅकर या सेफ कक्ष उत्तर दिशा में स्थापित किए जा कर सकते हैं । इन्हें उत्तरी तहखाने में भी रखा जा सकता है। सभी लाॅकरों को दक्षिण की ओर इस तरह रखना चाहिए कि वे उत्तर की ओर खुलें। प्रश्न: नकद जमा या भुगतान काउन्टर किस स्थान पर रखना अच्छा होता है ? उत्तर: उत्तर दिशा कुबेर की दिशा है। फलस्वरूप नकद जमा काउन्टर उत्तरी मध्य में रखना लाभप्रद होता है। भुगतान काउन्टर उत्तर-पश्चिम या पश्चिम दिशा में रखा जा सकता है। ब्रह्मस्थान को खुला, हवादार और भारविहीन रखना चाहिए क्योंकि बैंकांे और वित्तीय संस्थाओं के ब्रह्मस्थान में कोई भी निर्माण कार्य नहीं किया जाना चाहिए। प्रश्न: ऋण वितरण करने वाला विभाग किस स्थान पर रखना लाभप्रद होगा ? उत्तर: ऋण वितरण करने वाला विभाग काफी महत्वपूण्र् ा होता है। ऋण वितरण करने वाले व्यक्ति उचित निर्णय लेकर कार्य कर सकें इस कारण इसे दक्षिण-पश्चिम क्षे़त्र में रखना लाभप्रद होता है ताकि बैंक को आर्थिक प्रगति की ओर ले जाया जा सके। प्रश्न: बैंक में अभिलेख और महत्वपूर्ण कागजात किस स्थान पर रखना लाभप्रद होता है ? उत्तर: बैंक में अभिलेखों और महत्वपूर्ण कागजातों को रखने के लिए अलमारियां दक्षिण और पश्चिम दिशा में रखना लाभप्रद होता है।


हस्तरेखा विशेषांक  मार्च 2015

फ्यूचर समाचार के हस्तरेखा विषेषांक में हस्तरेखा विज्ञान के रहस्यों को उद्घाटित करने वाले ज्ञानवर्धक और रोचक लेखों के समावेष से यह अंक पाठकों में अत्यन्त लोकप्रिय हुआ। इस अंक के सम्पादकीय लेख में हस्त संचरचना के वैज्ञानिक पक्ष का वर्णन किया गया है। हस्तरेखा शास्त्र का इतिहास एवं परिचय, हस्तरेखा शास्त्र के सिद्धान्त, हस्तरेखा शास्त्र- एक सिंहावलोकन, हस्तरेखाओं से स्वास्थ्य की जानकारी, हस्तरेखा एवं नवग्रहों का सम्बन्ध, हस्तरेखाएं एवं बोलने की कला, विवाह रेखा, हस्तरेखा द्वारा विवाह मिलाप, हस्तरेखा द्वारा विदेष यात्रा का विचार आदि लेखों को सम्मिलित किया गया है। इसके अतिरिक्त गोल्प खिलाड़ी चिक्कारंगप्पा की जीवनी, पंचपक्षी के रहस्य, लाल किताब, फलित विचार, टैरो कार्ड, वास्तु, भागवत कथा, संस्कार, हैल्थ कैप्सूल, विचार गोष्ठी, वास्तु परामर्ष, ज्योतिष और महिलाएं, व्रत पर्व, क्या आप जानते हैं? आदि लेखों व स्तम्भों के अन्तर्गत बेहतर जानकारी को साझा किया गया है।

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