ईशान कोण का कटना, घर से सुख एवं समृद्धि का हटना

ईशान कोण का कटना, घर से सुख एवं समृद्धि का हटना  

ईशान कोण का कटना, घर से सुख एवं समृद्धि का हटना पं. गोपाल शर्मा (बी.ई.) कुछ दिन पूर्व पंडित जी एक सरकारी अफसर के घर वास्तु परीक्षण के लिये गये जो कि रेलवे ऑफिस में एक वरिष्ठ पद पर कार्य करते हैं। उनके कोई औलाद नहीं थी और उन्होंने अपने भाई की बेटी को गोद ले रखा था। उन्होंने बताया कि पत्नी का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है और उनके पेट का दो बार ऑप्रेशन भी हो चुका है। वह स्वयं भूतल पर रहते हैं तथा उनका भाई ऊपर की मंजिल पर रहता है। उसके एक बेटा व एक बेटी है। परन्तु उसका बेटा काफी बीमार रहता है और बीमारी पर काफी खर्चा होता रहता है। वास्तु परीक्षण करने पर पाए गए वास्तु दोष : उनके घर का उत्तर पूर्व कोना कटा हुआ था जो कि एक गंभीर वास्तु दोष है जो कि घर की सुख समृद्धि एवं घर के बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तथा परिवार की वंशवृद्धि में बाधक होता है। दक्षिण-पश्चिम में शौचालय बना था जिससे घर के मालिक के अनचाहे खर्चे होते रहते हैं और उन्हें मानसिक तनाव रहता है। घर के उत्तर में सीढियां बनी थीं जो कि ब्रह्मस्थान तक आ रही थीं जिससे आर्थिक हानि होती है तथा केन्द्र में सीढ़ी आने से पेट संबंधी परेशानियां आती हैं। उत्तर में रसोईघर बना था जिससे घर में रह रहे सदस्यों में वैचारिक मतभेद रहता है तथा खर्चा अधिक होता है। सीढियों के नीचे स्टोर बना था जो कि विकास में बाधक होता है। सीढियों का नीचे से बंद होना घर की लड़कियों (बुआ, बहन बेटी) के लिए अति हानिकारक होता है। दक्षिण में मुखय द्वार के सामने वीथिशूल बन रहा था जो कि घर के सदस्यों के स्वास्थ्य एवं विकास के लिए अशुभ होता है। सुझाव : उत्तर-पूर्व के कोने को ठीक करने की सलाह दी गई। तात्कालिक लाभ के लिये उन्हें कहा गया कि उत्तर तथा पूर्व की दीवार पर शीशा लगा दें ताकि इस दोष का प्रभाव कुछ कम हो। दक्षिण-पश्चिम में बने शौचालय को कोने से हटा कर दक्षिण में बनाने को कहा गया तथा शौचालय की जगह स्टोर बनाने की सलाह दी गई। सीढियों को उत्तर-पश्चिम या पश्चिम में बनाने को कहा गया। सीढियों के नीचे के हिस्से को तुरंत खोलने को कहा गया। रसोईघर को दक्षिण-पूर्व में बनाने को कहा गया जिससे घर में सभी सदस्यों का स्वास्थ्य ठीक रहे। घर के मुखय द्वार पर कन्वैक्स मिरर (पाकुआ) लगाने के कहा गया। दरवाजे पर मैहरुन कलर करने की सलाह दी गई तथा उस पर स्वास्तिक चिन्ह लगाया गया। जिससे घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश न कर सके। द्वार के आस-पास बड़े-बड़े पौधे रखने की भी सलाह दी गई तथा दरवाजे के नीचे दहलीज बनवाई गई। विगत दो दशकों के अनुभव के आधार पर पंडित जी ने उन्हें विश्वास दिलाया कि सभी सुझावों को कार्यान्वित करने के पश्चात उनकी समस्याएं काफी हद तक अवश्य कम हो जाएंगी।

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