वास्तु-सम्मत ईशान - सुख-समृद्धि की खान

वास्तु-सम्मत ईशान - सुख-समृद्धि की खान  

जून के प्रथम सप्ताह में पं0 जी मेरठ रोड औद्योगिक क्षेत्र में एक दाल मिल का निरीक्षण करने गये। दाल मिल के मालिक श्री बंसल जी का कहना था कि उन्होंने यह मिल कुछ पुस्तक पढ़कर वास्तुनुरुप बनाई है। उत्तर में बोरिंग है। उत्तर-पूर्व बढ़ा हुआ है। उत्तर में अधिक खुला स्थान है। दक्षिण में दफ्तर है, कच्चे माल का स्टोर है। फैक्ट्री में गौशाला भी बनाई हुई है। दफ्तर में उत्तर मुखी बैठते हैं। उत्तर-पूर्व से माल आता है। उत्तर पश्चिम से माल जाता है। फैक्ट्री बिल्डिंग के दक्षिण/ दक्षिण-पश्चिम में भारी मशीनें लगी हैं तथा दक्षिण-दक्षिण पूर्व में फरनेस है। हाॅल के उत्तर-पश्चिमी भाग में पैकिंग करके तैयार माल को उत्तर-पश्चिम के दरवाजे से ही बाहर निकाला जाता है। प्लाॅट के पूर्व/दक्षिण-पूर्व में घास व छोटे फूल, पौधे लगे हैं। फिर भी फैक्ट्री सुचारु रुप से चल नहीं पा रही है। थक हार कर उन्होंने पं0 जी को बुलाने का निर्णय लिया था। परीक्षण के दौरान पाया गया दोष - उत्तर प ूर्व म े ं सीढिया ं तथा वह हिस्सा कटा होना बहुत ही गंभीर वास्तु दोष था एवं समस्त तकलीफों का कारण था। इससे बृहस्पति (गुरु) महाराज का आशीर्वाद खत्म हो जाता है, विकास में अड़चनें आती हैं एवं धन का आवागमन रुक सा जाता है। मजदूरों की समस्या बनी रहती है। इस क्षेत्र में ऊँचापन (ममटी) होने से पेमेंट रुक-रुक कर एवं टूट-टूट कर आती है। कई बार रकम डूब भी जाती है। किसी न किसी कारण मानसिक तनाव बना ही रहता है एवं जीवन में सुख-शांति का पूर्णतया अभाव हो जाता है। सुझाव - पं0 जी ने समझाया कि सेठ जी, जैसे किताबें पढ़कर आप सर्दी, बुखार, जुकाम, खाँसी, सिरदर्द, बदन दर्द आदि छोटी-छोटी बीमारियों का तो इलाज कर सकते हैं परन्तु कैंसर का आॅपरेशन केवल किताबें पढ़कर नहीं हो सकता। इसी तरह किसी भी बड़े व्यवसाय को शुरु करने से पहले किसी अनुभवी व शिक्षित वास्तु विशेषज्ञ की सलाह लेना अति आवश्यक है। उन्होंने बताया कि जैसे एक बूंद जहर सारे खाने को विष बना सकता है उसी तरह एक बड़ा वास्तु दोष, फैक्ट्री की समस्त अच्छाइयों पर भारी पड़ सकता है। उन्होंने सुझाया कि तुरंत इस क्षेत्र से सीढ़ियाँ व कमरा तोड़कर हाॅल में मिला लें तथा सीढियाँ बाहर पश्चिम/दक्षिण-पश्चिम में बना दें। शीघ्र ही अप्रत्याशित लाभ होगा तथा सभी समस्याओं का निवारण होने लगेगा।


राहु विशेषांक  जुलाई 2014

फ्यूचर समाचार पत्रिका के राहु विशेषांक में शिव भक्त राहु के प्राकट्य की कथा, राहु का गोचर फल, अशुभ फलदायी स्थिति, द्वादश भावों में राहु का फलित, राहु के विभिन्न ग्रहों के साथ युति तथा राहु द्वारा निर्मित योग, हाथों की रेखाओं में राजनीति एवं षडयंत्र कारक राहु के अध्ययन जैसे रोचक व ज्ञानवर्धक लेख सम्मिलित किये गये हैं इसके अलावा सत्यकथा फलित विचार, ग्रह सज्जा एवं वास्तु फेंगशुई, हाथ की महत्वपूर्ण रेखाएं, अध्यात्म/शाबर मंत्र, जात कर्म संस्कार, भागवत कथा, ग्रहों एवं दिशाओं से सम्बन्धित व्यवसाय, पिरामिड वास्तु और हैल्थ कैप्सूल, वास्तु परामर्श आदि लेख भी पत्रिका की शोभा बढ़ाते हैं।

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