हौसलों की ऊंची उड़ान

हौसलों की ऊंची उड़ान  

किस्मत किसको कब क्या देगी-फर्श से अर्श पर ले जाएगी या राजा से रंक बनाएगी ये कोई नहीं जानता। जीरो से हीरो बनने के सितारे विरले ही कुंडलियों में फलीभूत होते हैं और ऐसा ही चमत्कार हमें मोदी सरकार की मानव संसाधान विकास मंत्री की कुंडली में देखने को मिला। पंजाबी पिता और बंगाली असमी मां की बेटी स्मृति का जन्म दिल्ली के निम्न मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। स्मृति का बचपन दिल्ली में ही बीता। स्मृति तीन बहनों में सबसे बड़ी थी। दिल्ली होली चाइल्ड स्कूल से इन्होंने 12वीं की परीक्षा पास की। लेकिन 10 वीं के बाद से ही इन्होंने कमाना शुरू कर दिया था। एक ब्यूटी प्रोडक्ट के प्रचार के लिए इन्हें हर दिन 200/- मिला करते थे। 12वीं की परीक्षा के बाद इन्होंने बी. ए. में प्रवेश तो ले लिया पर परिवार को आर्थिक रूप से मदद करने के उद्देश्य से अपनी मंजिल तलाशने मुंबई पहुंच गईं। 1998 में स्मृति ने फेमिना मिस इंडिया सौंदर्य प्रतियोगिता में भाग लिया। ये फाइनल तक भी पहुंचीं पर किस्मत ने विजेता नहीं बनाया। स्मृति ने इस प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए अपने माता-पिता से पैसे मंगवाए थे और वे उसे लौटाना चाहती थीं इसलिए इन्होंने मुंबई में ही नौकरी ढूंढ़नी शुरू की। जेट एयर वेज में फ्लाइट अटेंडेंट पद के लिए अप्लाई किया पर सेलेक्शन नहीं हुआ और नौकरी मिली मैक्डोनाल्डस रेस्तरां में। वहां इन्होंने अकाउंट संभालने से लेकर फर्श साफ करने तक का काम किया। गौर करने की बात यह है कि ये अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटीं न ही घबराईं बल्कि परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाला और हर हाल में जिंदगी में आगे बढ़ती रहीं। मुंबई में स्मृति की तकदीर बदलनी शुरू हो गई। 2000 में अपनी आवाज की बदौलत ‘औ ला ला ला’ एपिसोड में एक्ट्रेस नीलम कोठारी को बेदखल करने में कामयाब रहीं और यहीं से ये एकता कपूर की नजरों में आईं और ‘सास भी कभी बहू थी’ धारावाहिक की तुलसी विरानी बन गईं। तुलसी विरानी के रूप में ये छोटे पर्दे की सबसे चहेती बहू बन गईं और यह सीरियल टीवी सीरियल के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ। इसके बाद स्मृति ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अब किस्मत उन पर मेहरबान हो रही थी। स्मृति सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए पांच भारतीय टेलीविजन एकादमी अवार्ड, चार इंडियन टेली अवार्ड और आठ स्टार परिवार पुरस्कार जीत चुकी हैं और इन्होंने अन्य सीरियलों में भी बतौर एक्ट्रेस व सह निदेशक की तरह काम किया। 2001 में स्मृति ने शादीशुदा जुबिन ईरानी (पारसी) से विवाह कर लिया और ये तीन बच्चों की मां हैं। स्मृति का राजनैतिक जीवन 2003 में तब शुरू हुआ जब इन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की और दिल्ली के चांदनी चैक लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा हालांकि ये कांग्रेस के उम्मीदवार कपिल सिब्बल से हार गईं लेकिन 2004 में इन्हें महाराष्ट्र यूथ विंग का उपाध्यक्ष बनाया गया। इन्हें पार्टी द्वारा पांच बार केंद्रीय समिति के कार्यकारी सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया और 2010 में इन्हें भाजपा महिला मोर्चा की कमान सौंपी गई और 2011 में ये गुजरात से राज्यसभा की सांसद बन गईं। इसी वर्ष इनको हिमाचल प्रदेश में महिला मोर्चा की कमान भी सौंप दी गई और भारत के आम चुनाव 2014 में स्मृति ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी नेता कुमार विश्वास को कड़ी चुनौती देते हुए अमेठी संसदीय सीट से चुनाव लड़ा। यद्यपि ये चुनाव हार गईं परंतु राज्य सभा का सदस्य होने के नाते भारत सरकार ने स्मृति को मानव संसाधन विकास मंत्री बना दिया। किस्मत ने इन्हें बुलन्दियों तक पहुंचा दिया। स्मृति वास्तव में अपनी किस्मत और पुरूषार्थ के बल पर इस मुकाम पर पहुंची हैं। एक निर्धन परिवार में जन्म लेने के बाद भी अपने सपनों को साकार करने के लिए कभी पीछे नहीं हटीं और पूरी मेहनत से छोटे बड़े सभी काम किए तभी यह मुकाम हासिल हुआ। आजकल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता स्मृति की शिक्षा को लेकर कई विवाद उठा रहे हैं पर स्मृति ने ठीक ही कहा कि मुझे काम के आधार पर परखना चाहिए। भारत की राजनीति में कितने ही नेता अशिक्षित से लेकर केवल दसवीं या बारहवीं पास मिलंेगे जिन्होंने बड़े महत्वपूर्ण पदों पर बखूबी कार्य किया। इसी तरह स्मृति भी चाहे ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं हैं पर पिछले दस वर्षों की राजनीति की परख और उनकी मेहनत के बल पर इन्हें आंकना चाहिए। आइये करें इनकी जन्मपत्री में बैठे ग्रहों का आकलन जिन्होंने इन्हें फर्श से अर्श तक पहुंचाया। स्मृति का बिल्कुल सही समय न मिल पाने के कारण हम चंद्र कुंडली से कुंडली की व्याख्या करेंगे, लेकिन उनके जीवन में घटी घटनाओं के आधार पर चंद्र लग्न ही सार्थक लगता है। वैसे भी जातक ग्रंथों में कहा ही गया है कि जन्म लग्न व चंद्र लग्न में से जो बली हो उसी से फलादेश करना चाहिए। ग्रह योगों के आधार पर स्मृति की चंद्र कुंडली विशेष बलवान है। आइये देखें- स्मृति की कुंडली के अनुसार चंद्र धनु राशि में स्थित होने के कारण इनका व्यक्तित्व आकर्षक है। चंद्र लग्नेश व सूर्य लग्नेश गुरु होने से तथा चंद्र लग्न एवं नवम भाव पर चंद्रमा से पंचमस्थ गुरु की दृष्टि होने से स्मृति सभ्य, शालीन व श्रेष्ठ गुणों से युक्त विनयशील तथा आशावादी महिला हैं। चंद्र लग्न, पंचंम व नवम पर गुरु का प्रभाव होने के अतिरिक्त चंद्र लग्नेश व सूर्य लग्नेश भी गुरु ही है। इनके जीवन पर गुरु ग्रह का प्रभाव विशेष होने से ये अधिक शिक्षित न होने के बावजूद भी धाराप्रवाह भाषण कला संपन्न हैं साथ ही अपनी बात को प्रभावशाली तरीके से रखने में सक्षम, सबकी उन्नति चाहने वाली, दयावान प्रवृत्ति की तथा दूरदर्शी हैं। तृतीय पराक्रम भाव में लाभेश शुक्र और कर्मेश बुध की युति है तथा दोनों ग्रहों की भाग्य भाव पर पूर्ण दृष्टि पड़ने से इन्हें अभिनय तथा कला के क्षेत्र में बड़ी सफलता मिली और उसी सफलता के बल पर आज ये राजनीति के क्षेत्र में भी विजयी हुई हैं। चतुर्थ भाव में उच्चाभिलाषी भाग्येश सूर्य की स्थिति स्वदेश में भाग्योदय तथा उच्च पद प्राप्ति के लिए व राज विद्या के लिए श्रेष्ठ है क्योंकि त्रिकोणेश का केंद्रस्थ होना शुभ फलदायी होता है। पंचम स्थान में बृहस्पति और केतु की युति बन रही है। पंचम भाव के गुरु पर ‘कारक भाव नाशाय’ की युक्ति चरितार्थ होती है। इसीलिए स्मृति ने सामान्य शिक्षा तो ग्रहण की पर पंचम भाव पर गुरु की स्थिति तथा उस पर दो-दो पाप ग्रह राहु एवं शनि की दृष्टि ने इन्हें आगे पढ़ने में सहयोग नहीं दिया और स्मृति अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाने की बजाए अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने में जुट गईं। सप्तम भाव में मंगल की स्थिति एवं अष्टम भाव पर शनि की स्थिति तथा राहु की पूर्ण दृष्टि होने से इनका विवाह पहले से विवाहित पुरूष से हुआ और इन्हें अपने वैवाहिक जीवन में समझौता करना पड़ा। राजनीति के कारक राहु की एकादश भाव में स्थिति तथा केंद्र भाव (अर्थात चतुर्थ एवं सप्तम) में दो योग कारक ग्रहों की स्थिति से कुंडली अत्यंत बलशाली हो गई है इसीलिए राजनीति के क्षेत्र में इन्हें ऊंचा पद प्राप्त हुआ। धनु राशि होने से स्मृति गंभीर व्यक्तित्व की मल्लिका हैं तथा अपने काम के प्रति पूरी कर्Ÿाव्यनिष्ठ हैं और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ये पूरी तन्मयता और लग्न से लग जाती हंै इसीलिए इन्होंने अपने पिता को रूपये लौटाने के लिए मैकडोनाल्ड में अटेंडेंट का काम करने से भी परहेज नहीं किया और यही इनकी सफलता का राज है। लग्नेश गुरु की पंचम भाव में स्थिति निश्चित रूप से इनकी लक्ष्य प्राप्ति में मदद करती है। स्मृति की कुंडली में केमद्रुम योग भी बन रहा है। परंतु गुरु की दृष्टि से भंग भी हो रहा है इसीलिए इनका निर्धन परिवार में जन्म तो हुआ परंतु आगे चलकर इन्हें धन, मान-सम्मान सभी की प्राप्ति हो रही है। कुटुंब स्थान का स्वामी शनि अष्टम भाव में स्थित है जिसके कारण परिवार से बहुत सहयोग नहीं मिल पाया और पराक्रम भाव में शुक्र बुध की स्थिति व एकादश में राहु के प्रभाव से अपने बलबूते पर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ीं। मंगल त्रिकोण का स्वामी होकर केंद्र में स्थित है तथा शुभ ग्रह चंद्र की दृष्टि से युक्त है जिसके कारण इन्हें लोक सभा चुनाव का टिकट भी प्राप्त हुआ और इन्होंने कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय नेता तथा प्रधानमंत्री पद के दावेदार राहुल गांधी को कड़ी टक्कर देने का साहस किया और बहुत बड़ी संख्या में वोट बटोरे। राहुल के खिलाफ इनकी हार इनके लिए कोई मायने नहीं रखती क्योंकि इन्होंने इस चुनाव में अपनी योग्यता, वाणी तथा बुद्धिमत्ता के झंडे गाड़ दिये। आजकल इनकी शिक्षा को लेकर काफी कुछ बोला जा रहा है परंतु राजनीति में योग्यता सिर्फ उच्च शिक्षा से नहीं आंकी जाती । कार्य के प्रति लगन, ईमानादी व सीखने का जज्बा व्यक्ति को फर्श से अर्श तक पहुंचा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है। व्यक्ति के हौसले बुलंद हों तो वह कुछ भी पाने में सक्षम होता है। स्मृति के कर्म स्थान पर भाग्येश सूर्य, पंचमेश मंगल और पराक्रमेश व धनेश शनि की पूर्ण दृष्टि है और कर्म स्थान के स्वामी बुध स्वयं लाभेश शुक्र के साथ पराक्रम भाव में बैठकर भाग्य भाव को देख रहे हैं। चंद्र व मंगल के परस्पर दृष्टि योग एवं एकादशस्थ राहु व पंचमस्थ गुरु के आशीर्वाद से स्मृति अवश्य ही पिछली पारी की तरह इस बार भी अपने कार्मिक क्षेत्र में अवश्य ही नाम कमाएंगी और जनता के बीच लोकप्रियता हासिल करेंगी और अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक क्षमताएं सिद्ध करेंगी। वर्ष 2002 व 2003 में गुरु की कर्क राशि में स्थिति के समय स्मृति ईरानी का नाम भारत के राजनैतिक पटल पर उभरा था। इस बार जब फिर से गुरु का कर्क राशि में प्रवेश होने वाला है तो इन्हें दोबारा राजनीतिक क्षेत्र में बुलंदियां प्राप्त हुई हैं और केन्द्रीय मंत्री का पद प्राप्त हुआ है। ज्योतिष में राहु आकस्मिक व आश्चर्यजनक परिणाम देने के लिए विख्यात है। राहु राजनीति का विशेष कारक होता है। इनका राहु एकादशस्थ तो है ही तथा गोचरीय राहु, गुरु व शनि इन तीनों का प्रभाव भी इस पर आ जाने के कारण श्रेष्ठ पद प्राप्त करने के लिए वर्ष 2014 लाभप्रद सिद्ध हुआ। आगे भविष्य में ये अपनी जिम्मेदारियों का दक्षता से निर्वहन करेंगी। इनका कर्क राशिस्थ शनि वर्गोत्तमी है जिसके ऊपर से ऊच्च राशिस्थ गुरु का गोचर होने वाला है तथा नवंबर से शनि की साढ़ेसाती भी आरंभ होने वाली है। यह योगायोग इनके राजनीतिक जीवन में आकस्मिक लाभ व श्रेष्ठस्तरीय सफलता का सूचक है। ईश्वर इनके नेक इरादों व बुलंद हौसलों को नई उड़ान दें।


राहु विशेषांक  जुलाई 2014

फ्यूचर समाचार पत्रिका के राहु विशेषांक में शिव भक्त राहु के प्राकट्य की कथा, राहु का गोचर फल, अशुभ फलदायी स्थिति, द्वादश भावों में राहु का फलित, राहु के विभिन्न ग्रहों के साथ युति तथा राहु द्वारा निर्मित योग, हाथों की रेखाओं में राजनीति एवं षडयंत्र कारक राहु के अध्ययन जैसे रोचक व ज्ञानवर्धक लेख सम्मिलित किये गये हैं इसके अलावा सत्यकथा फलित विचार, ग्रह सज्जा एवं वास्तु फेंगशुई, हाथ की महत्वपूर्ण रेखाएं, अध्यात्म/शाबर मंत्र, जात कर्म संस्कार, भागवत कथा, ग्रहों एवं दिशाओं से सम्बन्धित व्यवसाय, पिरामिड वास्तु और हैल्थ कैप्सूल, वास्तु परामर्श आदि लेख भी पत्रिका की शोभा बढ़ाते हैं।

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