राहु के राशि परिवर्तन का विभिन्न राशियों में प्रभाव एवं उपाय

राहु के राशि परिवर्तन का विभिन्न राशियों में प्रभाव एवं उपाय  

राहु 14 जनवरी 2013 को सायंकाल 7:18 बजे तुला राशि में प्रवेश कर चुके हैं। दृष्टव्य है कि शनि पहले से ही तुला राशि में गोचर कर रहे हं। इस प्रकार राहु व शनि की युति ‘विषयोग’ का निर्माण कर रही है जिसके विभिन्न राशियों पर शुभाशुभ प्रभाव पड़ेंगे। राहु जन्मकालीन चंद्र से तृतीय, षष्टम, दशम एवं एकादश भाव में शुभ फल करता है। तुला राशि के राहु का विभिन्न राशियों में फल निम्नवत् रहेगा। मेष इस राशि के जातकों के लिए राहु सप्तम भाव से गोचर करेंगे तथा वे एकादश भाव, लग्न एवं तृतीय भाव पर दृष्टिपात करेंगे जिसके कारण जीवन साथी को कष्ट, पारिवारिक कलह, आय की अपेक्षा व्यय अधिक, स्वयं को शारीरिक कष्ट, सिरदर्द की समस्या तथा हाथ, पैर में दर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इन समस्याओं से बचने के लिए निम्न उपाय करना हितकर रहेगा: 1- प्रत्येक मंगलवार को हनुमान जी के दर्शन जरूर करें तथा नित्य हनुमान चालीसा का पाठ करें। 2- रात में सोते समय सिरहाने में बाजरा रखें तथा अगले दिन सुबह उन्हें पक्षियों को खिला दें। वृष वृष राशि के जातकों के लिए राहु षष्ठम् भाव में गोचर करेगा जिसके कारण रोग, ऋण व शत्रुओं से मुक्ति मिलेगी। षष्ठस्थ राहु की दृष्टि दशम भाव, द्वादश भाव एवं द्वितीय भाव पर रहेगी। अतः पिता को कष्ट, परंतु कर्म क्षेत्र में सफलता के योग बनेंगे। आय व व्यय का संतुलन रहेगा। आंखें प्रभावित हो सकती हैं परंतु कोई रोग दीर्घकालिक नहीं होगा। यदि राजनीति में रुचि है तो राजनैतिक करियर बनाने वालों के लिए राहु का यह गोचर शुभ फल प्रदान करने वाला होगा। वृष राशि वाले जातकों के लिए राहु से संबंधित निम्न उपाय लाभप्रद हो सकते हैं। 1- प्रत्येक गुरुवार को भगवती दुर्गा जी के मंदिर जाकर दर्शन लाभ प्राप्त करें एवं दुर्गा चालीसा का पाठ करें। 2- सफेद रंग का रुमाल सदैव अपने पास रखें। मिथुन मिथुन राशि के जातकां के लिए राहु पंचमस्थ होकर नवम, एकादश व लग्न पर दृष्टि डालेगा। राहु का इस प्रकार गोचर अनिष्टप्रद है। संतान को कष्ट या संतान से कष्ट, कार्यों का पूर्ण न होना, किसी भी कार्य में मन न लगना, आॅपरेशन आदि की संभावना, प्रमेह, अपेन्डिक्स, त्वचा रोग होने की संभावना, अचानक भारी नुकसान का होना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अस्तु मिथुन राशि वाले जातकों को विशेष सावधानी अपेक्षित है। इस दिशा में निम्न उपाय कल्याणकारी साबित होंगे: 1- बुधवार से प्रारंभ कर 21 दिन तक गणेश जी पर दुर्बा चढ़ाएं। 2- अपनी जन्मकुंडली के अनुसार लग्नेश का रत्न धारण करें। 3- भगवान शिव की आराधना करें तथा नित्य राहु के मंत्र का जप करें। 4- वाहन धीरे चलाएं। शीतकाल में कंबल का प्रयोग न करें। कर्क कर्क राशि वाले जातकों के लिए चतुर्थ भावस्थ राहु अष्टम, दशम व एकादश भाव पर दृष्टिपात करेंगे। साथ ही इस राशि के जातक शनि की ढैया से भी प्रभावित रहेंगे। इस दृष्टि से राहु जातक के समस्त प्रकार के सुखों में कमी करने वाला होगा। मानसिक कष्ट, कारावास भय, मुकदमे में असफलता, भूमि, भवन, वाहन की हानि, माता को कष्ट, बड़े भाई को कष्ट या बड़े भाई से कष्ट, व्यवसाय में संघर्ष, गुप्त शत्रुओं में वृद्धि जैसी समस्याओं से सामना करना पड़ सकता है। अस्तु कर्क राशि वाले जातकों को निम्न उपाय करना चाहिए: 1- जन्मकालीन लग्न के स्वामी का रत्न अनिवार्य रूप से धारण करें। 2- शनिवार को शनि मंदिर जाकर शनिदेव के समक्ष तेल का दीपक अर्पित करें। 3- नीले कपड़े में नारियल बांधकर राहु मंत्र का 11 बार जप करते हुए जल में प्रवाहित करें। 4- भूमि, भवन एवं वाहन को क्रय करने से पहले अपनी जन्मकुंडली अनुभवी ज्योतिषाचार्य को दिखा लें अन्यथा हानि का सामना करना पड़ सकता है। 5- गहरे जल में स्नान कदापि न करें। सिंह सिंह राशि वाले जातकां के लिए राहु, तृतीय भावस्थ होकर शुभ फल प्रदान करेगा। राहु के प्रभाव से एवं शनि की अपनी उच्चस्थ राशि के प्रभाव से राहु एवं शनि का तृतीय भावस्थ होना अत्यंत कल्याणकारी होगा। पराक्रम में वृद्धि, आर्थिक लाभ, धन प्राप्ति के स्रोतों में वृद्धि, विदेश यात्रा का योग, सुख समृद्धि में वृद्धि के योग बनेंगे। परंतु तृतीय भाव में विष योग के बनने से छोटे भाई को कष्ट, पत्नी को कष्ट, बड़े भाई को कष्ट, अग्नि भय हो सकता है। वस्तुतः सिंह राशि वाले जातकों को निम्न उपाय करना चाहिए: 1- नियमित रूप से सूर्य भगवान को तांबे के पात्र में जल से अघ्र्य दें। 2- जन्म कुंडलीनुसार पंचमेश का रत्न धारण करें। 3- मंगलवार एवं शनिवार को घर में अग्निकारक वस्तुएं जैसे केरोसिन, गैस सिलेण्डर आदि कतई न लाएं। कन्या कन्या राशि वाले जातकां के लिए द्वितीय भावस्थ राहु अनेकों विघ्नों से सामना करायेगा। साथ ही इस स्थिति वाले व्यक्ति शनि की साढ़ेसाती से प्रभावित रहेंगे। अतः इस दिशा में शनिवत् राहु और अधिक कष्टकारी साबित हो सकता है। कुटुंब से वैर, धन का संचय न हो पाना, आर्थिक हानि, अधिक चिंता, आय की अपेक्षा खर्च अधिक, ननिहाल में किसी सदस्य को रोगों से कष्ट, ससुराल से अनबन, व्यापार में उतार-चढ़ाव जैसी समस्याओं से सामना करना पड़ सकता है। अस्तु उपाय अपेक्षित हैं: 1- शनिवार को पीपल के वृक्ष की जड़ में दीप अर्पित करें। 2- भगवान शंकर की उपासना करें तथा हनुमान जी के किसी मंत्र का नियमित जाप करें। 3- भोजन में कालीमिर्च व काले नमक का प्रयोग करें तथा जल में काले तिल डालकर स्नान करें। तुला तुला राशि वाले जातकों के लिए लग्नस्थ राहु व शनि की राशिगत साढ़ेसाती शारीरिक शक्ति का क्षय व मानसिक पीड़ा कराता है। आर्थिक हानि, भारी कर्ज व अप्रत्याशित खर्चों में वृद्धि हो सकती है, विष एवं अग्नि भय हो सकता है। सांसारिक मान-सम्मान में कमी आ सकती है। साला, साली, जीजा आदि से मतभेद हो सकते हैं, अस्तु तुला राशि के लिए राहु का अशुभ गोचर ही साबित होगा। वस्तुतः निम्न उपाय अपेक्षित हैं: 1- प्रत्येक मंगलवार को दक्षिणमुखी हनुमान जी के दर्शन करें तथा कष्ट मुक्ति का निवेदन करें। 2- अपनी जन्मकुंडली के लग्नानुसार रत्न धारण करें। 3- शनिवार व मंगलवार को पीपल के वृक्ष की सात परिक्रमा कर दीप अर्पित करें। 4- नित्य हनुमान चालीसा का पाठ एवं मंगलवार या शनिवार को सुंदर कांड का पाठ करें। वृश्चिक वृश्चिक राशि वाले जातकों के लिए द्वादश भावगत राहु अच्छे परिणाम नहीं देता है। दुर्घटना, अग्निभय, प्रत्येक क्षेत्र में हानि, शैय्या सुख में कमी, अनिद्रा, अचानक किसी भारी नुकसान का सामना करना, मानसिक अशांति, वाहन चोरी का भय जैसी समस्याओं से सामना करना पड़ सकता है। साथ ही इस राशि वाले जातक शनि की चढ़ती साढ़ेसाती से भी प्रभावित रहेंगे। अस्तु ये उपाय नितांत आवश्यक है: 1- 7मुखी रुद्राक्ष धारण करें तथा ऊँ नमः शिवाय मंत्र का एक माला नित्य जप करें। 2- सफाईकर्मी को दान-दक्षिणा दें बदले में उससे कोई काम न लें। 3- घर में राहु यंत्र की स्थापना करें। धनु धनु राशि वाले जातकों के लिए एकादश भावस्थ राहु अपने गोचर में शुभ फल प्रदान करने वाला है। इस समय आकस्मिक धन प्राप्ति के योग बन सकते हैं। कोई ऐसी सकारात्मक घटना घटित हो सकती है जो सोच के बाहर हो। आय के स्रोत बनेंगे। विदेश यात्रा का भी योग बन सकता है। राजनैतिक सफलता मिल सकती है। साहस, पराक्रम में वृद्धि, बुद्धि का अच्छा प्रयोग कर सकते हैं परंतु कानों में दर्द की समस्या हो सकती है। धनु राशि वाले जातकों के लिए राहु से अच्छा लाभ लेने के लिए निम्न उपाय करना चाहिए: 1- भैरव जी की साधना करें तथा नित्य भैरव मंत्र का एक माला जप करें। 2- घर में राहु यंत्र स्थापित करें तथा जब भी घर से बाहर जाएं इस यंत्र के दर्शन अवश्य करें। 3- जन्मकुंडली को किसी अनुभवी ज्योतिषाचार्य को दिखाकर अनुकूल रत्न धारण करें। 4- सूर्य को नियमित रूप से जल का अघ्र्य दें तथा काले कु को रोटी खिलाएं तथा अपाहिजों की सहायता करें। मकर मकर राशि वाले जातकों के लिए दशम स्थान में राहु का गोचर निश्चित तौर पर मान-सम्मान में वृद्धि करता है। समस्त कार्यों में सफलता प्राप्त होगी। तीर्थ यात्रा के योग बनेंगे। पदोन्नति या व्यापार में सफलता प्राप्त होगी। जन्मकुंडली में यदि गुरु की स्थिति सही हो तो इच्छानुसार नौकरी करने वाले जातकों के लिए स्थानांतरण के योग बनेंगे। पूजा-पाठ में रुचि रहेगी तथा दान पुण्य जैसे कार्यक्रमों में भाग लेने के अवसर प्राप्त होंगे। इस राशि वाले जातकों के लिए राहु से शुभ लाभ लेने के लिए निम्न उपाय करने चाहिए: 1- भगवान शिव की आराधना करें तथा नित्य शिव गायत्री मंत्र की एक माला जप करें। 2- किसी गरीब व्यक्ति को काला या नीला कंबल दान करें। 3- भोजन रसोईघर में ही करें। 4- सफाई कर्मी से बिल्कुल बहस न करें। यथासंभव उनकी मदद करते रहें। कुंभ कुंभ राशि वाले जातकों के लिए नवम भाव में राहु का गोचर धर्म से विमुख करता है। अनैतिक कर्म करा सकता है। मानसिक पीड़ा होती है तथा किसी भी कार्य में मन नहीं लगता। यदि जन्मकुंडली में राहु की स्थिति सही है तो उपर्युक्त परिणामों के न्यून फल प्राप्त होते हैं क्योंकि नवम भाव में राहु धार्मिक होकर अशुभ फलों में कमी करता है। अस्तु कुंभ राशि वाले जातकों को निम्न उपाय करना चाहिए: 1- 8 मुखी रुद्राक्ष धारण करें तथा भगवान शिव की आराधना करें। 2- नदी में तांबे का पैसा प्रवाहित करें। 3- काले कु को जलेबी खिलाया करें। मीन: मीन राशि वाले जातकों के लिए अष्टमस्थ राहु बहुत अशुभ फल प्रदान करने वाला होता है क्योंकि कहा गया है कि अष्टमस्थ राहु जितना भी कष्ट दे वह कम होता है। इसमें नौकरी छूटना अथवा रिश्वत लेते पकड़े जाना, मुकदमे में पराजय का होना, मृत्युतुल्य कष्ट, मानसिक उलझनें, पारिवारिक मतभेद, आत्महत्या की प्रवृ विकसित होना, विष भय, व्यवसाय में अचानक हानि होना जैसी समस्याओं से सामना करना पड़ता है। अतः तुला राशि में राहु का गोचर अत्यंत कष्टकारी है। इस हेतु मीन राशि वाले जातकों को निम्न उपाय करना चाहिए: 1- अपनी जन्मकुंडली के अनुसार लग्नेश का रत्न धारण करें साथ ही 8 मुखी रुद्राक्ष भी धारण करें। 2- चिकित्सक की अनुमति के बिना कोई दवा न लें। 3- घर में रुद्र पाठ का आयोजन कराएं। 4- कंबल का प्रयोग कतई न करं। अस्तु सिंह, वृष, मकर व धनु राशि वाले जातकों के लिए तुला राशि में राहु का गोचर शुभ फल प्रदान करने वाला तथा अन्य राशियों में अशुभ फल प्रदान करने वाला होगा। अतः इन राशि वाले जातकों को प्रतिदिन ‘‘ऊँ राहु राहवे नमः’’ मंत्र की एक माला जप व राहु से संबंधित वस्तुओं का दान अवश्य करना चाहिए। इसी प्रकार यदि आपकी जन्मकुंडली में राहु कुंभ राशि में है तो तुला राशि में राहु का गोचर मृत्यु तुल्य कष्ट प्रदान करने वाला होता है क्योंकि जन्मकालीन राहु से नवम भाव से राहु का गोचर अत्यंत कष्टकारी होता है। अतः जन्मकालीन राहु का पोजीशन अवश्य देख लें।


नक्षत्र विशेषांक  फ़रवरी 2013

फ्यूचर समाचार पत्रिका के नक्षत्र विशेषांक में नक्षत्र, नक्षत्र का ज्योतिषीय विवरण, नक्षत्र राशियां और ग्रहों का परस्पर संबंध, नक्षत्रों का महत्व, योगों में नक्षत्रों की भूमिका, नक्षत्र के द्वारा जन्मफल, नक्षत्रों से आजीविका चयन और बीमारी का अनुमान, गंडमूल संज्ञक नक्षत्र आदि ज्ञानवर्धक आलेख सम्मिलित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त हिंदू मान्यताओं का वैज्ञानिक आधार, वास्तु परामर्श, वास्तु प्रश्नोतरी, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, गुण जेनेटिक कोड की तरह है, दामिनी का भारत, तारापीठ, महाकुंभ का महात्म्य, लालकिताब के टोटके, लघु कथाएं, जसपाल भट्टी की जीवनकथा, बच्चों को सफल बनाने के सूत्र, अंक ज्योतिष के रहस्य, मन का कैंसर और उपचार व हस्तरेखा आदि विषयों पर गहन चर्चा की गई है। विचारगोष्ठी में वास्तु एवं ज्योतिष नामक विषय पर चर्चा अत्यंत रोचक है।

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.