अपने वास्तु विशेषज्ञ से जानिए

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प्रश्न: इस भूखंड के उपयोग के लिए वास्तु सुझाव दें। -नवल कुमार पटेल, मुजफ्फरपुर उत्तर: प्रिय पटेल जी, आपके प्लाॅट का उत्तर-पूर्व तथा उत्तर-पश्चिम हिस्सा कटा हुआ है। यदि दो हिस्से भी कर लिये जाएं तो दक्षिण-पश्चिम हिस्सा कटा हुआ माना जाएगा। इन वास्तु दोषों से अशांति, उन्नति में रुकावट, एक के बाद एक मुकदमे, बीमारी, भय तथा चारों तरफ अप्रसन्नता का वातावरण हो जाता है। अच्छा है इस प्लाॅट को बेच दिया जाए। प्रश्न: भाग्य में सुधार हेतु राह दिखाएं। -बाबूलाल वर्मा, सीहोर उत्तर: प्रिय बाबू लाल जी, कारोबार की जगह में उत्तर-पूर्व की सीढ़ियां एक भयंकर वास्तुदोष है। इससे धन और स्वास्थ्य की हानि, कर्जा तथा दीवालियापन तक हो जाता है। इस तुरंत तुड़वाकर दक्षिण-पूर्व में करें, आश्चर्यजनक रूप से हर समस्या से छुटकारा मिलेगा। घर के ईशान कोण (पूजा के पवित्र स्थान) पर शौचालय बने हुए हैं जिससे व्यवसाय की वित्तीय दृष्टि से बरबादी, मानसिक असंतुलन तथा झगड़े हो सकते हैं। शौचालय और स्नानघर को उत्तर की दीवार स न सटाते हुए, दोनों को खुला छोड़ते हुए बनाया जा सकता है। प्रश्न: हमारे रेलवे क्वार्टर के वास्तुदोष बताने की कृपा करें। - गोपाल सागर, सांगली उत्तर: प्रिय गोपाल सागर जी, आपके मकान में दक्षिण-पश्चिम का सैप्टिक टैंक आपके जीवन में प्रगति नहीं होने देता। इसके ढक्कन को ऊपर और नीचे लाल पेंट कीजिये, आराम अवश्य मिलेगा। घर के दक्षिण-पश्चिम में शौचालय शारीरिक, मानसिक और आर्थिक समस्याओं को जन्म देता है। इसमें समुद्री नमक रखना कुछ लाभ जरूर देगा। रसोईघर के दरवाजे की दहलीज पर लाल पेंट करना भी गृह कलह और खर्चे में कमी करने में सहायक होगा। हो सके तो पुराने रसोईघर के फर्श के नीचेपन को खत्म करें, यह भी घर की शांति तथा उन्नति में सहायक होगा। प्रश्न: क्या इस भूखंड में मकान ठीक रहेगा? -विनोद कुमार तिवारी, झांसी उत्तर: प्रिय तिवारी जी, आजकल अधिकतर शहरों में ज्यादातर प्लाॅट ऐसे ही बने हैं, इसलिए मुख्य दिशाएं कोनों में आ जाती हंै। अधिक चिंता न करें। अपने इसी मकान में पश्चिम के कटे कोने को परगोला या जाल या किसी प्रकार की शीट आदि द्वारा ठीक करके सुख, शांति और स्वास्थ्य प्राप्त कर सकते हैं।


घरेलू टोटके विशेषांक  जनवरी 2006

मनुष्य का जन्म स्वतन्त्र हुआ है किन्तु वह हर जगह शृंखला में आबद्ध है। मनुष्य अपने हर जन्म में अपने कर्मों के अनुरूप नकारात्मकता अथवा सकारात्मकता के कारण वर्तमान जीवन में अच्छे या बुरे दिन देखता है। पीड़ा की मात्रा इन्हीं कर्मों के संचय के आधार पर अलग-अलग होती है। इनका प्राकट्य जन्म के समय कुण्डली में होता है जब नौ ग्रह उसके कर्मों के अनुरूप अलग-अलग भावों में स्थान ग्रहण करते हैं। इसके अलावा दशाओं के क्रम भी भावी जीवन की आधारशिला रखते हैं। यदि दशाओं का क्रम अच्छा होता है तो जातक को जीवन में सुख एवं समृद्धि की प्राप्ति होती है अन्यथा वह दुख झेलने को बाध्य होता है। ज्योतिष में विभिन्न प्रकार की पीड़ा से मुक्ति हेतु अनेक उपायों की चर्चा की गई है। इन्हीं उपायों में से एक महत्वपूर्ण उपाय है टोटका। फ्यूचर समाचार के इस महत्वपूर्ण विशेषांक में विभिन्न प्रकार की समस्याओं से मुक्ति पाने हेतु सामान्य, सरल एवं घरेलू टोटकों से सम्बन्धित महत्वपूर्ण आलेख समाविष्ट हैं। इन महत्वपूर्ण टोटके के आलेखों में से धन लाभ एवं खुशहाली हेतु, कर्ज से मुक्ति और धन वापसी, मानसिक तनाव दूर करने के लिए, परीक्षा में सफल होने के लिए, शीघ्र विवाह के लिए, सन्तान प्राप्ति के लिए टोटके आदि लेख सम्मिलित हैं।

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