सुखमय जीवन के लिए वास्तु टिप्स

सुखमय जीवन के लिए वास्तु टिप्स  

धन के लिए टिप्स धन जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता है। अतः यदि आप धन प्राप्त करना चाहते हैं तो निम्नांकित वास्तु टिप्स का अनुसरण करके धन आकर्षित कर सकते हैं: - फिश एक्वेरियम धन आकर्षित करते हैं। अतः अपने घर के लिए एक एक्वेरियम खरीदें किंतु यह सुनिश्चित कर लें कि उनमें जीवंत, सुंदर, स्वस्थ मछलियां हों क्योंकि उनका निरंतर गतिमान रहना धन को भी गतिमान रखता है। साथ ही उसके पानी को भी साफ रखें। - खिड़कियों में क्रिस्टल लगाने से ऊर्जा उत्तेजित होती है। जब सूर्य का प्रकाश उनपर पड़ता है तो ये सुंदर इंद्रधनुष का निर्माण करते हैं जिससे घर में समृद्धि आती है। - घर में धन आकर्षित करने के लिए सामने के द्वार को साफ-सुथरा एवं सजाकर रखें। ऐसा आप इनको अगल-बगल की दीवारों के रंगों से अलग हटकर पेंट करके भी कर सकते हैं। - एक दर्पण लगाएं जिससे आपके लाॅकर अथवा कैश बाॅक्स प्रतिबिंबित हों। यह संकेतात्मक रूप से अवसरों एवं धन को द्विगुणित करता है। - अपने परिसर में एक बर्ड फीडर अथवा बर्ड बाथ रखें जिससे वन्य प्राणी आकर्षित हों। वन्य प्राणी अपने साथ सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं तथा घर की हर दिशा में समृद्धि आकर्षित करते हैं। - यदि धन आपके जीवन से गायब हो गया हो तो अपने घर अथवा अपने कमरे के दूर के बाएं कोने में कोई ठोस वस्तु रखें। दैनिक जीवन के टिप्स आपके ड्राईंग रूम का मुख हमेशा उत्तर दिशा की ओर होनी चाहिए। यहां का फर्नीचर दक्षिण एवं पश्चिम दीवार से लगा होना चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि आप उत्तर एवं पूर्व की ओर मुख करके बैठेंगे जो कि स्वस्थ मन के लिए काफी अच्छा है। किचन हमेशा दक्षिण-पूर्व कोने में होना चाहिए। यह कभी भी पूजा रूम, बेडरूम अथवा टाॅयलेट के ऊपर अथवा नीचे नहीं होना चाहिए। यह टाॅयलेट के सामने अथवा अगल-बगल भी नहीं होना चाहिए। पूजा रूम का मुख पूर्व अथवा उत्तर-पूर्व दिशा में होनी चाहिए। स्टडी रूम पूर्व, उत्तर, उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए। घर का बाथरूम पूर्वमुखी होना चाहिए। गर्भावस्था के लिए टिप्स गर्भावस्था एक ऐसा विषय है जिसमें विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। यद्यपि कि सभी किताबों एवं पत्रिकाओं आदि में इस विषय पर चर्चा होती है किंतु 9 माह का यह समय मां बनने वाली महिला के लिए काफी आश्चर्यजनक एवं सुखदायी होता है। वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि स्त्री रोग विशेषज्ञ से सहायता लेने के अतिरिक्त स्वस्थ बच्चे के जन्म के लिए कुछ वास्तु टिप्स का भी पालन करना चाहिए। सर्वश्रेष्ठ दिशा का चयन जो दम्पत्ति बच्चे की योजना बना रहे हैं उन्हें उत्तर-पश्चिम में स्थित कमरे का चयन गर्भ ठहरने तक करना चाहिए। गर्भ ठहरने के उपरांत इन्हें उत्तर-पूर्व में स्थित कमरे में आ जाना चाहिए। गर्मी एवं गर्भावस्था गर्भवती महिला का कमरा कभी भी दक्षिण-पूर्व दिशा में नहीं होना चाहिए। यह साबित हो चुका है कि गर्मी गर्भावस्था को नुकसान पहुंचा सकता है। वैसी कोई भी चीज जो गर्भवती महिला के शरीर का तापक्रम बढ़ा दे वह बच्चे के लिए नुकसानदायक साबित होता है। सामान्यतः गर्भावस्था के दौरान शरीर का तापक्रम वैसे भी अधिक रहता है। अतः यह आवश्यक है कि ऐसी अवधि में ये इलेक्ट्राॅनिक उपकरणों जैसे टेलीविजन, माइक्रोवेव आदि अन्य इलेक्ट्रो मैग्नेटिक ऊर्जा उत्पन्न करने वाली वस्तुओं से दूर रहें। इस तरह से ये अपने शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ने से खुद को बचा सकती हैं। कम से कम पहले तीन महीने तक गर्भवती महिला को घर के दक्षिण-पूर्व हिस्से में रहने से बचना चाहिए। सूर्य की ऊष्मा सूर्य की अत्यधिक ऊष्मा भी गर्भावस्था को प्रभावित करती है। अध्ययन में यह पाया गया है कि सूर्य की ऊष्मा पृथ्वी पर पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ती है। अतः गर्भवती महिलाओं को पूर्व की ओर सिर करके नहीं सोना चाहिए। इन्हें अपना सिर दक्षिण दिशा की ओर करके सोना चाहिए। रंग एवं गर्भावस्था आसमानी रंग का गुण शीतल होता है अतः रात में एक ऐसा मद्धिम बल्ब लगाकर सोना चाहिए जिससे नीला प्रकाश उत्पन्न होता हो। बैंगनी एवं नीले रंग का प्रभाव भी शीतल होता है। बैंगनी रंग सोडियम एवं पोटाशियम के बीच संतुलन बनाता है तथा शरीर में हड्डियों के विकास में सहायता करता है। जो गर्भवती महिलाएं नियमित रूप से साधना करती हैं उन्हें बैंगनी प्रकाश में साध् ाना करनी चाहिए क्योंकि यह प्रेरक एवं आध्यात्मिक रंग है। यदि किसी प्रकार का दर्द हो तो इसमें नीला रंग सहायक होता है। आपके डाॅक्टर ने ये सभी बातें आपको नहीं बताई होंगी क्योंकि विज्ञान इन छोटी-मोटी बातों पर ध्यान नहीं देता, पर इनका भी अस्तित्व है तथा ये महत्वपूर्ण हैं। वास्तु दोष को दूर करने में कमरों में चीजों को इधर-उधर व्यवस्थित करके तथा कुछ ऊर्जावान वस्तुओं को वहां स्थापित करने से सहायता मिलती है। याद रखें कि हर दोष का उपाय है। नंगी दीवारें घर की नंगी दीवारों पर गणेश जी की एक तस्वीर अथवा मूर्ति लगा दें। विशेष तौर पर यदि आप घर में प्रवेश करते हैं और वह नंगी दीवार आपको सामने दिखती हो। खाली दीवारें एकाकीपन को प्रदर्शित करती हैं तथा इसका सबसे उपयुक्त समाधान यही है कि इस पर भगवान गणेश की तस्वीर लगा दी जाय। ऊर्जा स्तर में वृद्धि किसी घर अथवा आॅफिस के ऊर्जावृत्त को स्वस्तिक यंत्र के प्रयोग से बढ़ाया जा सकता है। किंतु ध्यान रखें कि इसमें सावधानी की आवश्यकता होती है तथा इसे किसी विशेषज्ञ के मार्ग निर्देशन में ही करना चाहिए। मकान के समीप नदी अथवा नाला यदि आपके मकान अथवा आॅफिस के समीप कोई नदी अथवा नाला हो जो घड़ी की विपरीत दिशा में उत्तर-पूर्व के अतिरिक्त किसी अन्य दिशा में बह रही हो तो नृत्य करते हुए गणेश जी की तस्वीर मकान अथवा आॅफिस के उत्तर-पूर्वी कोने पर लगाएं। गलत निर्मित टाॅयलेट टाॅयलेट हमेशा उत्तर-पश्चिम अथवा पश्चिम दिशा में बनाएं। ध्यान रखें कि यदि टाॅयलेट पूर्वी कोने में बनाए जाएंगे तो यह बीमारियों को निमंत्रण देगा। गलत तरीके के बने बेड यदि आपको स्वास्थ्य समस्याएं हों तो यह सुनिश्चित करें कि आप चार पैर वाले बेड पर सोते हैं। बाॅक्स वाले बेड वायु संचार को अवरुद्ध करते हैं जिससे स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं। गलत बोरिंग यदि घर में बोरिंग गलत दिशा में बनी हो तो एक पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर इस प्रकार लगाएं कि ऐसा प्रतीत हो कि वे बोरिंग के दक्षिण-पश्चिम की ओर देख रहे हैं। अशुभ तस्वीरें वास्तु के अनुसार ऐसी तस्वीरें जिसमें युद्ध के दृश्य हों, रोती हुई औरतें, सेक्स प्रदर्शित करती तस्वीरें, ऐसी तस्वीरें जिसमें क्रोध का भाव हो तथा गिद्ध एवं उल्लू की तस्वीरें लगाना अशुभ माना जाता है। ऐसी तस्वीरों को तुरंत हटा दें। किचन सामग्री भारी सामान जैसे ग्राईंडर, आलमारी, फ्रीज आदि चीजें किचन के पश्चिम एवं दक्षिण दीवार की ओर लगाएं। दरवाजे एवं खिड़कियां वास्तु के अनुसार यदि आपके घर के दरवाजे एवं खिड़कियां बाहर की ओर खुलती हों तो इन्हें तुरंत बदल कर अंदर की ओर खुलने वाले दरवाजे एवं खिड़कियां लगाएं। कैक्टस घर में कैक्टस का पौधा लगाना वर्जित है। वास्तु उपाय गलत निर्माण एवं गलत व्यवस्था से उत्पन्न दोषों को ठीक कर सौहार्द्रता उत्पन्न करते हैं। यदि आप अच्छी तरह से शिक्षित एवं अनुभवी हैं किंतु फिर भी आपको अच्छी नौकरी नहीं मिल रही है अथवा आप किसी व्यवसाय को ठीक से संचालित नहीं कर पा रहे हैं तो वास्तु विशेषज्ञ से संपर्क करें। प्रेम में परेशानी, तनावग्रस्त संबंध, आर्थिक कष्ट ये सभी समस्याग्रस्त वातावरण के द्योतक हैं। वास्तु पूर्ण रूप से दिशा, भौगोलिक स्थिति, पर्यावरण एवं भौतिक विज्ञान का अध्ययन है। हम जितने ही आधुनिक होते जा रहे हैं उतने ही अपने वेदों एवं धार्मिक ग्रंथों से दूर हो रहे हैं जिसका परिणाम जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएं होती हैं। गलत योजना एवं असंगठित निर्माण पद्धति ने मूलभूत समस्याओं को जन्म दिया है। वास्तु मनुष्य एवं प्रकृति के बीच एक सेतु है। यदि अकारण आपके घर पर पत्नी से झगड़ा होता हो अथवा बच्चे आपकी बात नहीं सुनते हों तब भी आपको वास्तु परामर्श की आवश्यकता है। वास्तु कोई धर्म नहीं है बल्कि यह चीजों को सही तरीके से प्रयोग में लाने का विज्ञान है जो पंच तत्वों पृथ्वी, अग्नि, जल, आकाश एवं वायु के बीच संतुलन स्थापित करता है जिससे कि जीवन में अधिकतम प्राप्त हो सके। यदि आपके मकान अथवा आॅफिस में वास्तु के किसी सिद्धांत का अनुपालन नहीं हो रहा है तो निश्चित रूप से यह वास्तु दोष है और इससे समस्याएं उत्पन्न होंगी। वास्तु दोष को कमरे में परिवर्तन करके, घर के आंतरिक सज्जा में परिवर्तन करके, चीजों को इधर से उधर व्यवस्थित करके, कुछ ऊर्जावान वस्तुएं लगाकर ठीक किया जा सकता है। सभी वास्तु दोषों के कुछ न कुछ उपाय हैं। उपाय करने पर सुख एवं शांति जीवन में पुनः वापस मिल सकती है। गार्डेन एवं लैंडस्केपिंग (प्राकृतिक दृश्य) अच्छी तरह से विकसित लैंडस्केप अतिथियों को प्रभावपूर्ण तरीके से लुभाता है तथा इन्हें देखते ही उनका मन तरोताजा एवं स्वस्थ हो जाता है। लैंडस्केपिंग स्वास्थ्य एवं सफाई के दृष्टिकोण से सिर्फ निवासियों के लिए ही आवश्यक नहीं है बल्कि हरे पौधे एवं वृक्षों से पूरा क्षेत्र ही जीवंत हो उठता है। पूरे घर के लोग साफ आवो-हवा में सांस लेते हैं तथा सहज एवं शांत महसूस करते हैं। वास्तु द्वारा निर्देशित गार्डेन काफी बेहतर परिणाम देता है यदि यहां के पौधे, वृक्ष एवं जल स्रोत अर्थात फव्वारे आदि वास्तु नियमों के अनुकूल लगाये जायें। पूरे वातावरण को ऊर्जावान बनाने के लिए वास्तु के अनुसार स्वस्थ पौधे लगाने से निवासियों का जीवन स्तर बेहतर होता है तथा ये शांति महसूस करते हैं। गार्डेन एवं लैंड स्केपिंग के लिए वास्तु टिप्स ््गार्डेन मकान के पूर्व अथवा उत्तर हिस्से में लगाना चाहिए जबकि दक्षिण-पूर्व एवं दक्षिण-पश्चिम में किसी भी प्रकार के पौधे लगाने से बचना चाहिए। - एक पानी का फव्वारा पूर्व अथवा उत्तर दिशा में उत्तर-पूर्व एवं उत्तर-पश्चिम कोने से थोड़ा हटकर लगाना चाहिए। - घर के गार्डेन में कोई भी पौधा 3 फीट से ऊंचा न लगाएं। -झूले पूर्व अथवा उत्तर दिशा में लगाना चाहिए। -गार्डेन के मध्य में विशाल वृक्ष अथवा पौधे न लगाएं। - बच्चों के लिए मनोरंजन का क्षेत्र उत्तर-पश्चिम में बनाया जा सकता है। - गार्डेन में कांटेदार झाड़ियां न लगाएं तथा गार्डेन को सूखी लताओं, पत्तियों आदि से मुक्त रखें ताकि यह जगह साफ-सुथरा एवं आरामदायक प्रतीत हो। - गार्डेन में हमेशा कुछ आकर्षक चीजें जैसे मूर्तियां, कलात्मक तस्वीरें अथवा राॅक लैंडस्केपिंग आदि लगाएं जिससे कि वातावरण शांतिपूर्ण एवं सुखद महसूस हो। - फलदार वृक्ष पूर्व दिशा में लगाना चाहिए तथा यदि वहां स्वीमिंग पूल हो तो इसका प्रवेश उत्तर अथवा उत्तर-पूर्व से होना चाहिए। - स्वीमिंग पूल अथवा अन्य जल स्रोत मध्य, दक्षिण, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम एवं उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में अवस्थित नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे मानसिक अस्थिरता उत्पन्न होती है जिसके कारण स्वास्थ्य समस्याएं एवं दूसरे दुष्परिणाम उपस्थित हो सकते हैं।


वास्तु विशेषांक  दिसम्बर 2015

वास्तु संरचना का विज्ञान है जिसका उद्देश्य मनुुष्य की सुख समृद्धि है। हर संरचना चाहे वह घर हो अथवा दुकान अथवा फैक्ट्री अथवा कार्यालय, प्रत्येक संरचना के निर्माण में वास्तु नियमों का अनुपालन किया जाना आवश्यक है। यदि कोई भी संरचना वास्तु सम्मत नहीं हैं तो यह अनेक प्रकार की आर्थिक, स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं, दुःख, वैवाहिक जीवन में कठिनाई, पारिवारिक विवाद आदि को जन्म देता है। फ्यूचर समाचार के वास्तु सम्बन्धित इस विशेषांक में अनेक उल्लेखनीय आलेखों को समाविष्ट किया गया है जिसमें वास्तु के महत्वपूर्ण सिद्धान्तों का विश्लेषण सूक्ष्मता से किया गया है। इनमें से अति महत्वपूर्ण आलखों में शामिल हैं: नारद पुराण में वास्तुशास्त्र का सूक्ष्म वर्णन, वास्तु शास्त्र में पंच तत्व, भवन निर्माण में वास्तुशास्त्र का महत्व, वास्तु शास्त्र एक वैज्ञानिक पद्धति, वास्तु शास्त्र एवं धर्म, दिशा दोष दूर करने के वास्तु उपाय, फेंग शुई और वास्तु में अंतर और समानताएं, वास्तु एवं फेंग शुई के उपाय, मल्टीस्टोरी फ्लैट की वास्तुु की उपयोगिता एवं व्यवस्था, फ्लैट खरीदने में किन बातों का खयाल रखें आदि। इसके अतिरिक्त इस विशेषांक में सभी स्थाई स्तम्भों का समावेश भी पूर्व की भांति किया गया है जिसमें विविध आयामी आलेख सम्मिलित हैं।

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