सामान्य अंकों की गणना

सामान्य अंकों की गणना  

विशिष्ट अंकों के अलावा भी कुछ अंक होते हैं जिन्हें पाइथागोरियन अंक ज्योतिष में सामान्य अंकों की संज्ञा दी जाती है। ये अंक जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है विशिष्ट अंकों की तरह महत्वपूर्ण तो नहीं होते फिर भी इनके महत्व को नकारा नहीं जा सकता। ये अंक एक संशोधक की भूमिका निभाते हैं तथा महत्वपूर्ण स्थानों पर उपस्थित विशिष्ट अंकों के साथ मिलकर उन्हें सकारात्मक अथवा नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। इनकी गणना तथा विशिष्ट अंकों के साथ इनका समक्रमण एक सही तस्वीर पेश करने में सक्षम होता है जिससे फलकथन के दौरान एक सही निष्कर्ष तक पहुंचने में आसानी होती है। पूर्व के अंकों में विशिष्ट अंकों की गणना की विधि तथा उसकी व्याख्या अर्थपूर्ण एवं तर्कसंगत रूप से कैसे की जाती है, इसे सोदाहरण विस्तार से समझाया गया। पाइथागोरियन अंक ज्योतिष में ये विशिष्ट अंक अति महत्वपूर्ण होते हैं तथा फलकथन में इन सबका तथा सामान्य अंकां का सम्मिलित योगदान होता है। सामान्य अंकों की श्रेणी में जन्मांक, नामांक, आदत अंक, नाम का पहला अक्षर तथा नाम का पहला स्वर वर्ण महत्वपूर्ण हैं जिनकी गणना की विधि तथा उनकी व्याख्या इस अंक में उदाहरण के साथ आपकी सुविधा एवं सहायता के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं ताकि आप लाभान्वित हो सकें। जन्मांक सामान्य अंकों की श्रेणी में सबसे महत्वपूर्ण अंक जन्मांक को माना जाता है। अंक ज्योतिष की अन्य पद्धतियों में तो इसे सबसे महत्वपूर्ण अंक माना जाता है। जैसे: कीरो द्वारा प्रतिपादित अंक ज्योतिष अथवा वैदिक अंक ज्योतिष में यह सर्वप्रमुख अंक माना जाता है। किंतु पाइथागोरियन अंक ज्योतिष में सबसे महत्वपूर्ण अंक योग्यता अंक है जिसकी चर्चा पूर्व में कई बार की जा चुकी है। जन्मांक की गणना ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार जिस तिथि को व्यक्ति का जन्म होता है उसे ही जन्मांक कहा जाता है। नियम वही है, यदि जन्म 9 तारीख के उपरांत हुआ हो तो उसे एकल अंक में परिवर्तित करें, वही आपका जन्मांक होगा। उदाहरण के लिए, क्रिकेटर विराट कोहली का जन्म नवंबर 5, 1988 को हुआ था। अतः उनका जन्मांक उनके जन्म की तिथि यानि 5 होगा। इसी प्रकार मान लें कि किसी व्यक्ति का जन्म 25 तारीख को हुआ है तो उसका जन्मांक = 25 = 2+5 = 7 होगा। 1, 10, 19 तथा 28 तारीख को पैदा हुए व्यक्तियों का जन्मांक समान यानि 1 होगा। तो अब प्रश्न उठता है कि क्या इन सभी व्यक्तियों में एक समान तीव्रता के साथ ही 1 के गुणों का समावेश होगा? उत्तर है नहीं, 1 के महत्वपूर्ण गुण हैं दृढ़ ईच्छाशक्ति, वैयक्तिकता, सूत्रपात, नेतृत्व आदि। अतः इन तिथियों को पैदा हुए व्यक्तियों में इन गुणों का समावेश तो होगा किंतु इनकी मात्रा बढ़ते हुए क्रम में परिलक्षित होगी। 19 तारीख को पैदा हुए व्यक्तियों को ईच्छित परिणाम प्राप्त करने के पहले कुछ कठिनाइयों एवं बाधाओं का सामना करना पड़ेगा क्योंकि 19 एक कार्मिक अंक है। इसी प्रकार 2, 11, 20 अथवा 29 तारीख को पैदा हुए व्यक्ति संवेदनशील, सहयोगी एवं कूटनीतिज्ञ 2 से 29 तक के बढ़ते हुए क्रम मं होंगे। 11 एवं 29 चूंकि कार्मिक अंक हैं, अतः 11 एवं 29 तारीख को पैदा हुए व्यक्ति सनकी अथवा अति धार्मिक होते हैं किंतु तनावग्रस्त रहते हैं। व्यवसाय में इन्हें अधिक सफलता नहीं मिल पाती। यदि ये अंक किसी विशिष्ट अंक के रूप में भी प्रकट होते हैं तो इनकी तीव्रता और बढ़ जाती है। इसी प्रकार से सामान्य अंकों का समक्रमण किया जाता है। नामांक नाम के पहले हिस्से के आंकिक मानों की गणना कर उसे एकल अंक में परिवर्तित करने पर जो अंक प्राप्त होता है उसे नामांक कहते हैं। नामांक भी विशिष्ट अंकों को बल प्रदान कर उसकी क्षमता में सकारात्मक अथवा नकारात्मक रूप से वृद्धि करता है। यह उत्प्रेरक की भूमिका निभाता है। नामांक की गणना उदाहरण में हम विराट कोहली को ही इस आलेख में लेते हैं। VIRAT KOHLI 49912 26839 25/7 28/1 = 8 भाग्यांक नामांक = 25 = 2+5 = 7 नामांक 7 वाले व्यक्ति जुझारू, आकर्षक, बुद्धिमान, विशेषज्ञ, जिम्मेवार एवं प्रतिष्ठा संपन्न होते हैं तथा अपने चुंबकीय व्यक्तित्व से दूसरों पर अपनी अमिट छाप छोड़ते हैं। फिर भी ये अंतर्मुखी एवं चुनिंदा होते हैं तथा दूसरों के द्वारा इन्हें गलत समझा जा सकता है जबतक कि इन्हें अच्छी तरह से जाना नहीं जाय। विराट कोहली मं निस्संदेह ये गुण मौजूद हं तथा अपने इन गुणों का अवलोकन क्रिकेट के मैदान में अक्सर ये हमें करवाते रहते हैं। आदत अंक ;भ्ंइपज छनउइमतद्ध सामान्य अंकों के क्रम में अगला अंक है, आदत अंक जिसकी गणना नाम में शामिल कुल अक्षरों को गिनकर की जाती है। यह अंक वर्षों में बनी हुयी हमारी आदतों को दर्शाता है तथा विशिष्ट अंकों के साथ मिलकर सकारात्मक अथवा नकारात्मक संशोधक के रूप में कार्य करता है। VIRAT KOHLI 5 5 = 10/1 आदत अंक उदाहरण में विराट कोहली के नाम के पहले हिस्से VIRAT में कुल 5 अक्षर हैं तथा दूसरे हिस्स KOHLI में भी उतने ही अर्थात् 5 अक्षर ही हैं। अतः विराट कोहली का आदत अंक = 5+5 = 10/1 होगा। इसी प्रकार से आदत अंक की गणना की जाती है। आदत अंक 1 का तात्पर्य यह है कि विराट कोहली में नेतृत्व क्षमता कूट-कूटकर भरी हुई है तथा हमेशा ये अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहते हैं तथा लीडर के रूप में इन्हें अपनी भूमिका आक्रामक होकर निभाना पसंद है। भारत के उपकप्तान के रूप में, रायल चैलेंजर्स के कप्तान के रूप में तथा एक खिलाड़ी के रूप में उनके आक्रामक प्रदर्शन एवं व्यवहार ने सबका ध्यान आकृष्ट किया है। अभी हाल में आई. पी. एल. के एक मैच के दौरान गौतम गंभीर से मैदान पर उनकी बहस भी उनके आक्रामक रवैये का ही परिचायक है। नाम का पहला अक्षर नाम का पहला अक्षर व्यक्ति के भौतिकवादी दृष्टिकोण को दर्शाता है। अंग्रेजी वर्णमाला के सभी 26 वर्णों के पाइथागोरियन अंक ज्योतिष में विशेष अर्थ होते हैं। स्थानाभाव के कारण उनकी चर्चा यहां संभव नहीं है। विराट कोहली के नाम का पहला अक्षर V है। अक्षर V अत्यधिक कार्य एवं मेहनत के द्वारा महत्वपूर्ण परियोजनाओं में सफलता को निर्दिष्ट करता है। नाम का पहला स्वर वर्ण (Vowel) नाम में मौजूद पहला स्वर वर्ण (Vowel) व्यक्ति के आंतरिक अथवा आध्यात्मिक दृष्टिकोण को प्रदर्शित करता है। नाम का पहला अक्षर तथा नाम में मौजूद पहला स्वर वर्ण दो ऐसे संशोधक हैं जो चुपचाप विशिष्ट अंकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए कार्यरत रहते हैं। विराट कोहली के नाम में मौजूद पहला स्वर वर्ण I है। I उच्च संवेदना एवं भावुकता को दर्शाता है। ऐसे व्यक्ति लोक कल्याणकारी एवं मानवतावादी कार्यों में अभिरूचि लेने वाले होते हैं।


पराविद्या विशेषांक  जुलाई 2013

फ्यूचर समाचार पत्रिका के पराविद्या विशेषांक में शिक्षा के क्षेत्र में सफलता/असफलता के योग, मानसिक वेदना, विवाह के लिए गुरु, शुक्र एवं मंगल का महत्व, ईश्वर एवं देवताओं के अवतार, वास्तु दोष व आत्महत्या, श्रीयंत्र का अध्यात्मिक स्वरूप, पितृमोक्ष धाम का महातीर्थ ब्रह्म कपाल, फलित ज्योतिष में मंगल की भूमिका, प्रेम का प्रतीक फिरोजा, स्त्री रोगों को ज्योतिष व वास्तु द्वारा आकलन, हृदय रोग के ज्योतिषीय कारण, क्या है पूजा में आरती का महत्व, राजयोग तथा विपरीत राजयोग, चातुर्मास का माहात्म्य इत्यादि रोचक व ज्ञानवर्धक आलेखों के अतिरिक्त दक्षिणामूर्ति स्तोत्र, अंक ज्योतिष के रहस्य, सीमा का वहम नामक सत्यकथा, अर्जुन की शक्ति उपासना नामक पौराणिक कथा, कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए लालकिताब के अचूक उपाय, भगवान श्री गणेश और उनका मूल मंत्र तथा जियोपैथिक स्ट्रेस व अन्य नकारात्मक ऊर्जाओं आदि विषयों पर भी विस्तृत रूप से चर्चा की गई है।

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