जुलाई माह के अन्य प्रमुख व्रत त्योहार

जुलाई माह के अन्य प्रमुख व्रत त्योहार  

(8 जुलाई) सोमवती अमावस्या सोमवार के दिन अमावस्या तिथि का संयोग होने से उस अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं। धर्म ग्रन्थों के अनुसार इस दिन स्नान, दान, पितृ यज्ञ तथा तर्पण आदि करने से विषेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस दिन गंगा आदि पुण्य तीर्थों पर स्नान दान करना चाहिए। (10 जुलाई) रथयात्रा महोत्सव यह महोत्सव आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है। पुरी में श्री जगन्नाथ जी को सपरिवार विषाल रथ पर आरूढ़ करके भ्रमण कराया जाता है। इस रथ यात्रा महोत्सव में सम्मिलित होने के लिए देष-विदेष से श्रद्धालु भक्तगण भारी संख्या में एकत्रित होकर पुण्य के भागी बनते हैं। (19 जुलाई) देवषयनी एकादषी आषाढ़ शुक्ल एकादषी का नाम देवषयनी एकादशी है। इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेष-षय्या पर षयन करते हैं। इस दिन भक्तजनों को विधिपूर्वक व्रत रखकर भगवान की अपने घर में पूजा अर्चना करके रात्रि के समय सुन्दर, मनोहर शय्या बनाकर भगवान को शयन कराना चाहिए। इससे भगवान श्री हरि अपने भक्तों पर बहुत प्रसन्न होकर अपनी अनुकम्पा प्रदान करते हैं। (22 जुलाई) गुरूपूर्णिमा आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को गुरूपूर्णिमा कहते हैं। इस दिन विषेष रूप से अठारह पुराणों के रचयिता महर्षि वेदव्यास की पूजा अर्चना की जाती है और फिर अपने दीक्षा गुरु का देवतुल्य पूजा अर्चना की जाती है। इस दिन गुरु की पूजा करने से मनुष्य इह लोक तथा परलोक में अत्यन्त सुख प्राप्त करता है।


पराविद्या विशेषांक  जुलाई 2013

फ्यूचर समाचार पत्रिका के पराविद्या विशेषांक में शिक्षा के क्षेत्र में सफलता/असफलता के योग, मानसिक वेदना, विवाह के लिए गुरु, शुक्र एवं मंगल का महत्व, ईश्वर एवं देवताओं के अवतार, वास्तु दोष व आत्महत्या, श्रीयंत्र का अध्यात्मिक स्वरूप, पितृमोक्ष धाम का महातीर्थ ब्रह्म कपाल, फलित ज्योतिष में मंगल की भूमिका, प्रेम का प्रतीक फिरोजा, स्त्री रोगों को ज्योतिष व वास्तु द्वारा आकलन, हृदय रोग के ज्योतिषीय कारण, क्या है पूजा में आरती का महत्व, राजयोग तथा विपरीत राजयोग, चातुर्मास का माहात्म्य इत्यादि रोचक व ज्ञानवर्धक आलेखों के अतिरिक्त दक्षिणामूर्ति स्तोत्र, अंक ज्योतिष के रहस्य, सीमा का वहम नामक सत्यकथा, अर्जुन की शक्ति उपासना नामक पौराणिक कथा, कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए लालकिताब के अचूक उपाय, भगवान श्री गणेश और उनका मूल मंत्र तथा जियोपैथिक स्ट्रेस व अन्य नकारात्मक ऊर्जाओं आदि विषयों पर भी विस्तृत रूप से चर्चा की गई है।

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