सप्ताह के आखिरी दिन सर्जरी के लिए प्रतिकूल क्यों?

सप्ताह के आखिरी दिन सर्जरी के लिए प्रतिकूल क्यों?  

लंदन में हुए एक वृहत विश्लेषण के अनुसार चिकित्सकों के इस विश्वास को सही पाया गया जिसके अनुसार सप्ताह के आखिरी दिनों या सप्ताहांत में होने वाले आॅपरेशन असफल रहते हैं या जीवन के लिए खतरा बन जाते हैं। लंदन के प्उचमतपंस ब्वससमहम के शोधार्थियों के एक अध्ययन के अनुसार सप्ताह के आखिरी दिनों या सप्ताहांत में होने वाले आॅपरेशन में मृत्यु दर अधिक पाई गई। शोधार्थियों ने यह बात जोर देकर कही कि ऐसे रोगी जिनके आपरेशन में अधिक जोखिम हो उन्हें सप्ताह के शुरूआती दिनों में ही सर्जरी करवानी चाहिए। हाॅस्पीटल के 30 दिनों के अन्तराल की मृत्यु संख्या के स्टैटिस्टिक्स के विश्लेषण से यही पाया गया कि रोगियों के लिए मृत्यु का जोखिम सप्ताह के आखिरी दिनों और सप्ताहांत में होने वाले आॅपरेशन्स में सप्ताह के शुरुआती दिनों में होने वाले आॅपरेशन्स के मुकाबले अधिक था। तीन साल के वृहत् विश्लेषण में यह पाया गया कि सप्ताह के शुरुआत के दिन से मृत्यु दर सप्ताहांत तक दिन प्रतिदिन बढ़ती गई।शोधार्थियों ने तीन साल के अंदर 4133346 आॅपरेशन्स का डाटा एकत्रित किया जिनमें 27582 रोगियो की मौत आॅपरेशन के 30 दिन के अंदर हो गई। सप्ताहांत पर जिन रोगियों के आॅपरेशन हुए उनके रोग कम थे और आॅपरेशन में निहित जोखिम कम होने पर भी अधिक मौतें हुई। सोमवार को यदि एक मौत हुई तो मंगलवार को 1.09, बुधवार को 1.18, गुरुवार को 1.27 और शुक्रवार को 1.36 मौतें हुई। शोधार्थियों के चैंकाने वाले इस अध्ययन का ज्योतिषीय आकलन करने से पूर्व हम यह कहना चाहेंगे कि ऐसा शायद इसलिए भी होता है कि जब पूरे सप्ताह शल्य क्रियाओं और अस्पताल में विभिन्न कार्य व योजनाओं में बढ़ती व्यस्तताओं के चलते चिकित्सक थक जाते हैं तो अपनी क्षमताओं को पूर्णरूपेण प्रयोग में नहीं ला पाते जबकि सोमवार के दिन चिकित्सक आराम करने के उपरांत नई स्फूर्ति, नए उत्साह व पूर्णमनोयोग से कार्य करते हैं और अच्छा प्रदर्शन कर पाते हैं। आइए करें इसका ज्योतिषीय आकलन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मृत्यु का भय शनि से सर्वाधिक होता है क्योंकि कुण्डली में शनि के मारक दोष लेने पर वह सभी मारकों को पीछे छोड़कर Unconditional मारक बन जाते हैं। इसलिए शनिवार के दिन आॅपरेशन की असफलता का जोखिम निश्चित रूप से रहेगा अब सूर्य की बात करें तो इसे आरोग्यता का सबसे बड़ा कारकमाना जाता है। इसका सीधा अर्थ यही है कि यदि व्यक्ति रोगी हो गया है तो यह आपसे रूष्ट है और इसलिए यदि आपका उपचारध्शल्य क्रिया आदि रविवार के दिन हुई तो सफलता की संभावना उसी अनुपात में घटेगी। यदि सप्ताह के आरम्भिक दिन सोमवार के स्वामी चन्द्रमा की बात की जाए तो वैदिक ज्योतिष के अनुसार इसका संबंध मृत्यु से सुरक्षा यानी संजीवनी शिवकृपा से है संभवतः इसलिए इस दिन मृत्यु के कारक (Conditional -Unconditional - मारक) कुछ कमजोर रहेंगे। सप्ताह के दूसरे दिन के स्वामी मंगल का संबंध ग्यारवें रूद्रावतार हनुमान से माना जाता है इसलिए इस दिन भी मृत्यु के कारक निष्क्रिय ही रहेंगे। बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार के स्वामी शुभ ग्रह हैं और उनमें क्रूरता का अभाव है। इसलिए हम कह सकते हैं कि लंदन के इम्पीरियल काॅलेज के शोधार्थियों की विश्लेष्णात्मक क्षमता निःसंदेह प्रशंसनीय है और ज्योतिष शास्त्र की वैज्ञानिकता को सिद्ध करती है।


पराविद्या विशेषांक  जुलाई 2013

फ्यूचर समाचार पत्रिका के पराविद्या विशेषांक में शिक्षा के क्षेत्र में सफलता/असफलता के योग, मानसिक वेदना, विवाह के लिए गुरु, शुक्र एवं मंगल का महत्व, ईश्वर एवं देवताओं के अवतार, वास्तु दोष व आत्महत्या, श्रीयंत्र का अध्यात्मिक स्वरूप, पितृमोक्ष धाम का महातीर्थ ब्रह्म कपाल, फलित ज्योतिष में मंगल की भूमिका, प्रेम का प्रतीक फिरोजा, स्त्री रोगों को ज्योतिष व वास्तु द्वारा आकलन, हृदय रोग के ज्योतिषीय कारण, क्या है पूजा में आरती का महत्व, राजयोग तथा विपरीत राजयोग, चातुर्मास का माहात्म्य इत्यादि रोचक व ज्ञानवर्धक आलेखों के अतिरिक्त दक्षिणामूर्ति स्तोत्र, अंक ज्योतिष के रहस्य, सीमा का वहम नामक सत्यकथा, अर्जुन की शक्ति उपासना नामक पौराणिक कथा, कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए लालकिताब के अचूक उपाय, भगवान श्री गणेश और उनका मूल मंत्र तथा जियोपैथिक स्ट्रेस व अन्य नकारात्मक ऊर्जाओं आदि विषयों पर भी विस्तृत रूप से चर्चा की गई है।

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.