अच्छे बुरे सगुन - मंगलवार को नीलकंठ पक्षी का पंख जहां पर बच्चा सोता है उस चारपाई के पाये से बांध दें तो जो बच्चा अधिक रोता है वह रोना बंद हो जाएगा। - जो रूठकर चला गया है उसे बुलाने के लिए चमकीले हरे धागे की रील, हरा ही कागज, साबुत हरिद्रा, एक पीतल का टुकड़ा यह सब सामान मिलाकर घर का बुजुर्ग पुरुष या बुढ़िया कुएं में डाल दे तो गया व्यक्ति या स्त्री वापस आ जाती है। - हीरा हींग की 7 ग्राम की डली एक कपड़े में सी कर गले में पहना देने से मिरगी रोग चला जाता है। - भूत-प्रेत बाधा दूर करने के लिए इतवार के दिन 10 तुलसी के पŸो, 8 काली मिर्च व सहदोई की जड़ लाकर पत्र में धूप दीप से पूजन करके धारण करने से ऊपर की हवा चली जाती है। - यदि आपको रास्ते में कोई शव यात्रा दिखाई दे जाय तो सर्वप्रथम शव को प्रणाम करें व कुछ देर तक उस शव यात्रा मंे शरीक हों। फिर अपने कार्य पर चले जाएं, तो उस दिन आपके सभी कार्य ठीक होंगे क्योंकि शव दिखाई देना लाभदायक होता है। - घर से निकलते समय कहीं पर गाय अपने बच्चे को दूध पिलाती हुई दिखाई दे जाय तो यह देखकर रोटी में गुड़ रखकर गाय को खिला दें। यह शुभ होता है - मार्ग मंे जाते समय यदि कहीं नेवला दिखाई दे जाय तो जहां पर से वह जा रहा है उस स्थान से मिट्टी लेकर उसे अपने कैश बाॅक्स में डाल दें, सदा तिजोरी धन से भरी रहेगी। - कोई गर्भवती औरत अपने घर में फल खा रही हो तथा कोई फल उसके हाथ से छूटकर उसकी गोद में गिर जाय तथा उस गोद में गिरे हुए फल को ऐसी औरत को दे दिया जाय जिसके बच्चे नहीं होते हों, तो अवश्य संतान हो जायगी। - शुक्ल पक्ष में रविवार के दिन काले घोड़े के आगे के दाएं पैर की लोहे की नाल को लेकर उसको गंगाजल से धोकर धूप देकर उसे घर में व्यवसाय के स्थान में गाड़ दें, तो आर्थिक लाभ बढ़ जायेगा। - जिन्हें डरावने स्वप्न आते हैं यदि वे अपनी मां का नाम भोजपत्र पर लिखकर अपने तकिये में रख लें तो ऐसे स्वप्न दिखना बंद हो जायेंगे। - जो बच्चे सोते-सोते चैंक जाते हैं या डर जाते हैं वे दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों की काले डोरे में 13 गाँठें लगाकर उसे इस मंत्र से (11) बार पढ़कर ‘‘ऊँ दुर्गे दुर्गे रक्षिणी स्वाहा’’ गले में पहना दो। सभी डर बंद हो जाते हैं।

पितृ दोष  सितम्बर 2016

फ्यूचर समाचार का वर्तमान अंक विशेष रूप से पितृ दोष को समर्पित है। हमारे धार्मिक ग्रन्थों से हमें पता चलता है कि हमें अपने पितरों को समय-समय पर भोजन व अन्य सामग्रियां प्रदान करते रहना चाहिए। विशेष रूप से भाद्रपद महिने के कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से अमावस्या तक के 15 दिन पूर्ण रूप से पितरों की सेवा के लिए ही होते हैं। पुरानों और अन्य धार्मिक ग्रन्थों से पता चलता है कि इस समय हमारे पितर पृथ्वी पर विशेष रूप से अपने सम्बन्धियों से भोजन व सम्मान प्राप्त करने आते हैं तथा इसके बदले में सम्बन्धियों को पूर्ण आशीर्वाद प्रदान करके लौट जाते हैं। इस वर्तमान अंक में बहुत सारे पितृ दोष से सम्बन्धि अच्छे लेख शामिल किए गये हैं। उनमें से कुछ विशेष लेख हैं: जानें क्या होता है पितृ दोष, कैसे कम होता है इसका प्रभाव?, श्राद्ध के साथ करें पितरों को विदा, पितृ पूजा: पहचान एवं उपाय, पितृ दोष से उत्पन्न ऊपरी बाधाएं, पितृ दोष: ज्योतिषीय योग एवं निवारण आदि।

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