पितृ पूजा, पहचान एवं उपाय

पितृ पूजा, पहचान एवं उपाय  

व्यूस : 991 | सितम्बर 2016
पितृ पहचान 1. श्रीमद्भागवद गीता के 11वें अध्याय का पाठ करें तो आप को कुछ दिनों में ही स्वप्न में पितृ दर्शन होंगे। 2. रात में सोने से पूर्व हाथ पैर धोकर अपने हृदय में अपने पितृ से प्रार्थना करें कि जो भी मेरे पितृ हो वे मुझे दर्शन दें। 3. यदि आप का कोई कार्य अटक रहा है तो अपने पितृ देव का स्मरण करें और उन से प्रार्थना करें कि यदि आप हैं तो मेरा अमुक कार्य पूर्ण करा दें। मैं आपके लिए शांति-पाठ कराउंगा। आपके प्रार्थना करने पर कार्य-सिद्ध हो जाए तो यह सिद्ध हो जाएगा कि आपको पितृ शांति करवानी चाहिए। पितृ दोष के उपाय Û सोमवती अमावस्या (जिस सोमवार को अमावस्या हो), उस दिन आप पीपल के वृक्ष के पास जाइये। दोपहर में पीपल के वृक्ष पर जल पुष्प, अक्षत, दूध, गंगाजल, काले तिल श्रद्धा से अर्पित करें। स्वर्गीय परिजनों का स्मरण कर उन से आशीर्वाद मांगें। Û शाम के समय दीप जलायें तथा नाग स्तोत्र व नवग्रह स्तोत्र, महामृत्युंजय मंत्र या रूद्र सूक्त या पितृ स्तोत्र का पाठ करें। इससे पितृ दोष को शांति मिलती है। Û सोमवार को प्रातः काल स्नान कर नंगे पांव शिवालय में जाकर आक के 21 फल, कच्ची लस्सी, बिल्व पत्र के साथ शिवजी की पूजा करें। 21 सोमवार करने से पितृ दोष का प्रभाव कम होता है। Û प्रतिदिन इष्ट देवता या कुल देवता की पूजा करने से भी पितृ दोष का शमन होता है। Û कुंडली में पितृ दोष होने से किसी गरीब कन्या का विवाह अथवा उसकी बीमारी में सहायता करने पर भी लाभ प्राप्त होता है। Û ब्राह्मणों को प्रतीकात्मक गोदान, गर्मी में पानी पिलाने के लिए कुएं खुदवायें या राहगीरों को शीतल जल पिलाने से भी पितृ दोष से छुटकारा मिलता है। Û पवित्र पीपल तथा बरगद वृक्ष लगाएं। विष्णु भगवान के मंत्र जाप, श्रीमद्भागवद गीता का पाठ करने से भी पितरों को शांति प्राप्त होती है। Û प्रत्येक अमावस्या विशेषतः सोमवती अमावस्या को पितृ भोग- इस दिन गोबर के कण्डे जलाकर, उस पर खीर की आहुति दें व जल की छींटे देकर हाथ जोड़े तथा पितृ को नमस्कार करें। पितृ पूजा के लिए ध्यान देने योग्य विशेष बातें: 1. पितरों को तामसी भोजन अर्पित न करें। 2. पूजा के अवसर पर मांस का भोजन न करें। 3. पितृ पूजा में लोहा, प्लास्टिक, स्टील व शीशे के बर्तन का प्रयोग न करें। मिट्टी या पत्तों के बर्तनों का ही प्रयोग करें। 4. घंटी न बजाएं। 5. पितृ पूजा करने वाले व्यक्ति की पूजा में व्यवधान मत डालें। बुजुर्गों का आदर करंे।

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