वास्तु विशेषांक

वास्तु विशेषांक  दिसम्बर 2010

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वास्तु का शाब्दिक अर्थ है 'वास' अर्थात् वह स्थान जहां पर निवास होता है। इस सृष्टि की संरचना में पंचतत्व (अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाष) महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तो भवन निर्माण करते समय में भी इनकी उपयोगिता को नकारा नहीं जा सकता।प्रस्तुत विषेषांक में 'वास्तु' से संबंधित समस्त महत्वपूर्ण जानकारी का उल्लेख है
vastu ka shabdik arth hai vas arthat vah sthan jahan par nivas hota hai. is srishti ki sanrchna men panchatatva (agni, jal, vayu, prithvi, akash) mahatvapurn bhumika nibhate hain to bhavan nirman karte samay men bhi inki upyogita ko nakara nahin ja sakta.prastut visheshank men vastu se sanbandhit samast mahatvapurn jankari ka ullekh hai



वास्तु विशेषांक  दिसम्बर 2010

वास्तु का शाब्दिक अर्थ है 'वास' अर्थात् वह स्थान जहां पर निवास होता है। इस सृष्टि की संरचना में पंचतत्व (अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाष) महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तो भवन निर्माण करते समय में भी इनकी उपयोगिता को नकारा नहीं जा सकता।प्रस्तुत विषेषांक में 'वास्तु' से संबंधित समस्त महत्वपूर्ण जानकारी का उल्लेख है

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