आपके हाथ पैर भविष्य का दर्पण

आपके हाथ पैर भविष्य का दर्पण  

आपके हाथ पैर भविष्य का दर्पण एम. एन. स्वामी प्राचीन ऋषि महर्षियों के निरंतर चिंतन मनन और साधना के माध्यम से सामुद्रिक शास्त्र और अन्य ज्योतिष ग्रंथों की रचना की गई। इन ग्रंथों के निर्माण का मूल उद्देश्य जन-कल्याण है साथ ही उनकी समस्याओं का समाधान किन-किन उपायों द्वारा संभव है उसकी खोज करना और लोगों के बीच पहुंचाने का प्रयास करना है। उन्हीं शास्त्रों की सारगर्भित बात को आप तक पहुंचाने की कोशिश कर रहें हैं। आप की हथेली की बनावट- (क) हथेली मोटी या भारी हो तो जातक लालची होता है, तथा सामान्य स्तर का जीवन यापन करता है। (ख) संकड़ी हथेली हो तो ऐसे लोग कमजोर प्रकृति वाले, अपने स्वार्थ को सर्वाधिक महत्त्व देते हैं । (ग) पतली तथा कमजोर हथेली वाला जातक गरीबी का जीवन जीता है। (घ) लंबी हथेली वाले स्पष्टवादी व्यक्ति होते हैं और मुंह के ऊपर बोलने वाले होते हैं। (ड़) लंबी किंतु गोल हथेली वाले अवसरवादी व हंसमुख होते हैं तथा आर्थिक पक्ष अच्छा होता है। (च) समचौरस हथेली - हथेली की लंबाई और चौड़ाई बराबर हो तो वे व्यक्ति स्वस्थ, शांत और दृढ़ निश्चयी होते हैं। पुरुषार्थी अपने प्रयत्न से उन्नति करने वाले, किसी भी कार्य को पूरा किये बिना नहीं छोड़ते हैं। अंगूठा -अंगूठा जितना लंबा होगा, व्यक्ति उतना ही व अपने आप पर कंट्रोल करने वाला होता है तथा अंगूठा जितना छोटा होगा, व्यक्ति उतना ही शैतानी स्वभाव का होता है या स्वभाव से जिद्दी और आर्थिक स्थिति कमजोर होगी। अंगूठा जितना मोटा होगा वह व्यक्ति उतना ही गरीबी हालत में होगा। अंगूठा सीधा रहता हुआ दिखलाई दे और अंगूठे की नाखून वाली सबसे ऊपर का पोर पीछे की तरफ झुकी हुई हो तो ऐसे जातक की धन दौलत रिश्तेदारों के या सगे संबंधियों के काम आती है। ऐसा जातक स्वभाव से नम्र होता है। सखत हाथ वाला जातक -राज्य करने वाला तथा उसकी मिसाल छोड़ने वाला होता है और ऐसे जातक का जीवन रूखा और कठोर सा होता है। ऐसे जातक अपने आप को ज्यादा महत्व देते हैं। बाधाओं के आने पर भी निराश नहीं होते, बाधाओं में भी कार्य करते रहते हैं। नरम हाथ वाला जातक आराम और सुख सुविधा में ज्यादा रूची लेता है और किसी भी व्यक्ति की सहायता करने के लिए तैयार रहता है। सामान्यतः ऐसे जातक कल्पनाशील होते हैं। नर्म तथा फैले हुए हाथ -ऐसा जातक सुस्त स्वभाव का तथा कम भाग्य वाला होता है। छोटे हाथ वाला-ऐसे जातक का जीवन गुलामी में व्यतीत होता है, आलस्य जरूरत से ज्यादा और बढ़चढ़कर कल्पनाएं करते हैं। अवसर का उपयोग करना ये नहीं जानते और समय बीत जाता है। तब ये पछताते रहते हैं। लंबे हाथ वाला छान बीन की समझ वाला और जीवन को श्रेष्ठ बनाने वाला होता है। अधिक प्रसन्न रहने वाला और भविष्य को पूर्व में ही जानने वाला होता है। लंबा, बेडौल व सखत हाथ वाला - जातक मूढ़ी या जल्लाद की तरह के स्वभाव का होता है। लाल रंग की हथेली वाला-क्रोधी और संकीर्ण विचारों वाला तथा दूरदर्शिता रहित होता है। गुलाबी रंग की हथेली -ऐसा जातक उन्नत विचारों वाला होता है। एवं साधारण श्रेणी से उठकर अत्यंत उंचे स्तर पर पहुंचने में समर्थ होता है। पीले रंग की हथेली -खून में किसी न किसी प्रकार का विकार, चिड़चिड़ा स्वभाव व संकीर्ण बुद्धि होती है। हाथ तथा पांव दोनों छोटे-छोटे हों तो ऐसा जातक दूसरों के लिए मंदा विचार वाला और स्वार्थी होता है। हाथ की अंगुलियों के नाखूनों का रंग पीला हो तो खून की कमी होती है और शारीरिक दृष्टि से कमजोर होता है। दसों अंगुलियों के पोरों में एक चक्र हो तो ऐसा जातक कई प्रकार की विद्याएं जानने वाला एवं राजा की तरह जीवन यापन करने वाला महारथी होता है। दसों अंगुलियों के पोरों पर सिर्फ एक शंख हो तो ऐसे जातक को माता-पिता का पूर्ण सुख मिलता है और स्वयं अपनी आयु के 80 वर्ष तक अच्छे भाग्य के सहारे सुख भोगता है। तर्जनी अंगुली का झुकाव मध्यमा अंगुली की ओर हो तो ऐसा जातक अपने इरादे का पक्का होता है तथा स्वतंत्र विचारों वाला प्रगतिशील विचारों की ओर निरंतर क्रियाशील होता है एवम् उत्साह से भरा होता है। पैरों की बनावट और उसका फल : पैरों के निचले हिस्से में एड़ी से निकलकर एक रेखा अंगूठे तक चली जाए तो जातक को वाहन सुख मिलता है और उसके घर में नौकर चाकर की कमी नहीं होती। यदि बायां पैर दायें पैर से बड़ा हो तो वह व्यक्ति एक जगह नहीं टिक पाता। पैर में अंगूठा और तर्जनी अंगुली आपस में मिलते हों तो भाग्य मंदा या कम साथ देता है। उस जातक का यदि अंगूठा छोटा और तर्जनी बड़ी हो तो पहले लड़के या लड़की का सुख कम मिलता है। अंगूठा और तर्जनी अंगुली बराबर हो तो ऐसा जातक सुख समृद्धि युक्त धनवान होता है। अंगूठा बड़ा और तर्जनी छोटी हो तो ऐसा जातक दूसरे का गुलाम होता है। तर्जनी मध्यमा से छोटी हो तो ऐसे जातक की स्त्री गरीब परिवार से होती है और जातक को उससे सुख कम मिल पाता है। तर्जनी मध्यमा से बड़ी हो तो अच्छा स्त्री सुख मिलता है। अनामिका अंगुली मध्यमा अंगुली से ज्यादा छोटी हो तो ऐसे जातक को स्त्री सुख कम मिलता है। कनिष्ठिका अंगुली अनामिका अंगुली से बड़ी हो तो ऐसे जातक का भाग्य बहुत बढ़िया होता है। कनिष्ठा अंगुली और अनामिका अंगुली बराबर हो तो ऐसे जातक को संतान सुख अच्छा मिलता है। परंतु ऐसे जातक की आयु कम होती है। यदि पांचों उंगलियां बराबर हों तो ऐसा जातक विश्व विखयात होता है या भिखारी होता है। यदि पांचों अंगुलियां एक दूसरे से लंबी हों तो ऐसे जातक को संतान सुख बढ़िया मिलता है।


वास्तु विशेषांक  दिसम्बर 2010

वास्तु का शाब्दिक अर्थ है 'वास' अर्थात् वह स्थान जहां पर निवास होता है। इस सृष्टि की संरचना में पंचतत्व (अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाष) महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तो भवन निर्माण करते समय में भी इनकी उपयोगिता को नकारा नहीं जा सकता।प्रस्तुत विषेषांक में 'वास्तु' से संबंधित समस्त महत्वपूर्ण जानकारी का उल्लेख है

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