लियो पाम में प्रष्न कुंडली

लियो पाम में प्रष्न कुंडली  

लियो पाम में प्रश्न कुंडली विनय गर्ग पराने समय में आम व्यक्ति की ज्योतिष में जागरूकता के अभाव में जातक की जन्म तिथि और जन्म समय की जानकारी नहीं रहती थी। जिसका परिणाम यह है कि आज जातकों को अपने जीवन के मार्गदर्शन हेतु ज्योतिष का लाभ लेने में परेशानी का समाना करना पड़ता है। अर्थात जातक अपना भविष्य तो जानना चाहता है, अपनी समस्याओं का निराकरण ज्योतिष के माध्यम से करना चाहता है पर समस्या आती है जन्म विवरण की क्योंकि उनके माता-पिता ने उनके जन्म विवरण को सुरक्षित नहीं रखा होता। ऐसी स्थिति में ज्योतिषी को उसकी समस्या समाधान हेतु प्रश्न शास्त्र का सहारा लेना पड़ता है। ज्योतिषियों के पास इसके अलावा और कोई रास्ता भी नहीं रह जाता है। प्रश्न शास्त्र भी ज्योतिष की ही एक शाखा है। पुराने समय में भी लोग प्रश्न का उत्तर जानने के लिए ज्योतिषियों के पास जाते रहे हैं। जैसे खोई हुई वस्तु वापिस मिलेगी या नहीं? किसने चुरायी होगी, कहां मिलेगी, कब मिलेगी आदि-आदि। ज्योतिषी लोग कुछ लक्षण विचार से तथा कुछ प्रश्नावली की अन्य विधियों से तथा कुछ लोग उसी समय की कुंडली बनाकर प्रश्न का उत्तर देते थे। जिसमें वे गुम हुई वस्तु का स्थान व दिशा आदि की जानकारी भी देते रहे हैं। यही विधि प्रश्न शास्त्र कहलाती है। आज के समय में लोग अपने भविष्य की जानकारी प्रश्न शास्त्र के माध्यम से भी कर रहे हैं। जैसे - मैं जो व्यापार करूंगा उसमें सफलता मिलेगी या नहीं? मेरा विवाह कब होगा? अमुक व्यक्ति से मेरा विवाह होगा या नहीं? मेरी नौकरी कब लगेगी? मैं इस साक्षात्कार (इन्टरव्यूह) में सफल होऊंगा या नहीं? इन सब प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए जिस समय जातक ज्योतिषी से प्रश्न पूछता है, उस समय और प्रश्न पूछे जाने वाले स्थान के आधार पर लग्न कुंडली बनायी जाती है। उसमें प्रश्न-शास्त्र के सिद्धांतों को लागू करके वांछित प्रश्न का उत्तर दिया जाता है। प्रश्न कुंडली के लिये, लिये जाने वाले समय तिथि और स्थान को लेकर विद्वान ज्योतिषियों के मत में अंतर देखा गया है। लेकिन हमें प्रश्न कुंडली के निर्माण के लिए तिथि, समय और स्थान भी उसी प्रकार लेना चाहिए जिस प्रकार किसी जातक की कुंडली निर्माण हेतु जातक की जन्म तिथि समय और स्थान लिया जाता है, क्योंकि प्रश्न के जन्म को भी जातक के जन्म के समय ही माना जाना चाहिए। इस सिद्धांत के आधार पर यदि प्रश्न अमेरिका से फोन पर पूछा जा रहा है और ज्योतिषी भारत में प्रश्न का विश्लेषण कर रहा है तो ज्योतिषी द्वारा प्रश्न कुंडली निर्माण हेतु अमेरिका की तिथि, समय और स्थान लिया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त प्रश्न-शास्त्र के अनुसार एक समय में एक ही प्रश्न का उत्तर दिया जाना चाहिए और जो प्रश्न जातक के लिए सबसे गंभीर हो और जिसका उत्तर वास्तव में जातक जानना चाहता हो उसी प्रश्न का विचार किया जाना चाहिए अन्यथा प्रश्न के उत्तर में गलती की संभावना हो सकती है। प्रश्न कुंडली विश्लेषण के लिये सर्वप्रथम प्रश्न से संबंधित ग्रहों एवं भावों की जानकारी होनी चाहिए। संबंधित भाव का स्वामी कार्येश तथा संबंधित भाव कार्य भाव कहलाता है। लग्न का स्वामी लग्नेश व कार्येश के बीच संबंध देखा जाता है। इसमें इत्थशाल योग प्रश्न का सकारात्मक उत्तर देता है जबकि इशराफ योग नकारात्मक उत्तर देता है। लग्नेश, कार्येश और चंद्र की स्थिति संभावित समय आंकने में सहायता करते हैं। इत्थशाल हेतु तेज गति वाला ग्रह पीछे और धीमी गति वाला ग्रह आगे राशि के क्रमानुसार होना चाहिए। लेकिन यदि दोनों ग्रह वक्री हों तो स्थिति विपरीत होनी चाहिए। इसके अलावा यदि तेज गति वाला ग्रह वक्री होकर आगे हो और तथा धीमी गति वाला ग्रह मार्गी होकर पीछे हो तो इत्थसाल और भी जल्दी होता है। निष्कर्षतः होना यह चाहिए कि लग्नेश और कार्येश गोचर में भविष्य में मिलें तो इत्थशाल होता है और नहीं मिलते हैं तो इशराफ होता है। इसके साथ-साथ इनके बीच ताजिक दृष्टि होना भी आवश्यक है तथा दृष्टि, दृष्टि सीमा के अंतर्गत होनी चाहिए। प्रश्न शास्त्र के इन सभी विश्लेषण के आधार पर लियो पाम में प्रश्न कुंडली का प्रोग्राम तैयार किया गया है। प्रश्न कुंडली का प्रोग्राम चलाने के लिये आपको लियो पाम की स्क्रीन के निचले भाग में बायीं ओर 'ज्योतिष' के स्थान पर 'प्रश्न शास्त्र' का चुनाव करना होता है तथा मुखय स्क्रीन में आपको वर्तमान या प्रश्न की तिथि, समय और स्थान देना होगा। इसके पश्चात स्क्रीन के निचले भाग में बीच में बने जन्मकुंडली के निशान पर क्लिक करना होता है। इसके पश्चात आप स्क्रीन में सबसे ऊपर की ओर दायीं तरफ 'उत्तर' वाले काम्बो बॉक्स पर क्लिक करेंगे। इसमें सबसे अंत में 'प्रश्न चुनें' को क्लिक करना होगा। अब आपकी स्क्रीन पर लिखा होगा 'प्रश्न वर्ग' इसके अतिरिक्त आप अपने प्रश्न से संबंधित वर्ग का चुनाव करेंगे जैसे व्यापार, संतान प्रतियोगिता, कोर्ट/कचहरी, मतभेद, शिक्षा, लाभ, सामान्य स्वास्थ्य, घर, नौकरी, भूमि, मुकदमा, हानि संबंधी, खोया/पाया, विवाह, धन, कारोबार, शान्ति, सत्ता, व्यवसाय, संपत्ति, संबंध, आदर, सफलता, यात्रा, वाहन आदि। प्रश्न वर्ग चुनने के बाद आपको पहले से दिये गये प्रश्नों में से अपने प्रश्न का चुनाव करना होगा। इसके लिए आपको प्रश्न के बाक्स पर क्लिक करना होता है। इसमें आपको 15-20 प्रश्नों की सूची प्राप्त होगी। इसके नीचे आपको संबंधित भाव और ग्रह लिखे हुये दिखायी देंगे जो कि आपके चयनित प्रश्न से संबंधित होंगे। यदि आप इन संबंधित ग्रह और भाव में परिवर्तन करना चाहते हैं तो 'भाव' या ग्रह के बॉक्स पर क्लिक करके परिवर्तित कर सकते हैं। परिवर्तन करने के बाद 'ठीक' बटन पर क्लिक करने से आपका किया हुआ परिवर्तन सुरक्षित हो जायेगा। तथा प्रश्न का उत्तर देने में संबंधित ग्रहों एवं भावों का विश्लेषण किया जायेगा। अन्यथा 'रद्द' पर क्लिक करने से कंपनी द्वारा तैयार संबंधित ग्रहों एवं भावों के विश्लेषण के आधार पर उत्तर आयेगा। प्रश्न चुनाव के पश्चात आप 'ठीक' पर क्लिक करेंगे। इसके पश्चात आपके प्रश्न का सारांश आपकी स्क्रीन पर होगा। इस स्क्रीन पर आपका प्रश्न, संबंधित भाव ग्रहों के साथ-साथ 'कार्य पूर्ण होने की संभावना' तथा 'कार्य पूर्ण होने का समय' प्रतिशत के रूप में प्रदर्शित होगा। साथ ही 'निष्कर्ष' के आधार पर आप यह जान पायेंगे कि आपके प्रश्न का क्या उत्तर है तथा कार्य पूर्ण होने की क्या संभावना है। इसके अतिरिक्त यदि आपका प्रश्न या 'प्रश्न वर्ग' इस साफ्टवेयर में नहीं है तो आप प्रश्न इसमें जोड़ सकते हैं। परंतु यह तभी संभव होगा जबकि आप अपने प्रश्न से संबंधित ग्रहों और भावों को इसमें डाल देंगे। इसमें अधिकतम तीन और न्यूनतम एक भाव और एक ग्रह भरना आवश्यक होता है। यदि आप उपरोक्त प्रश्न के उत्तर का ज्योतिषीय विश्लेषण देखना चाहते हैं तो 'सारांश' की जगह 'विस्तृत' का चुनाव करके आप प्रश्न विश्लेषण की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इस विश्लेषण में संबंधित ग्रहों एवं भावों के बल, युति, दृष्टि तथा संबंध आदि की जानकारी के साथ-साथ उपरोक्त वर्णित 'कार्य पूर्ण होने की संभावना' तथा 'कार्य पूर्ण होने का समय' के साथ निष्कर्ष भी प्राप्त होगा। इस प्रकार लियो पॉम में प्रश्न कुंडली द्वारा प्रश्न-शास्त्र पर आधारित आप अपने व्यक्तिगत या जातक के प्रश्न का उत्तर पूर्ण विश्लेषण सहित शुद्ध व सही-सही प्राप्त कर सकते हैं। विस्तृत जानकारी के लिये संपर्क करें या लिखें।


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वास्तु विशेषांक  दिसम्बर 2010

वास्तु का शाब्दिक अर्थ है 'वास' अर्थात् वह स्थान जहां पर निवास होता है। इस सृष्टि की संरचना में पंचतत्व (अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाष) महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तो भवन निर्माण करते समय में भी इनकी उपयोगिता को नकारा नहीं जा सकता।प्रस्तुत विषेषांक में 'वास्तु' से संबंधित समस्त महत्वपूर्ण जानकारी का उल्लेख है

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